आरक्षण की समीक्षा और उसकी माँगों पर बात करने के लिए, दिखावे के लिए ही ���ही, इस सरकार के सलाहकारों की मूर्खता देखिए कि उन्होंने एक ब्राह्मण मंत्री @JPNadda को आगे किया है।
जहाँ माँगों में 'उपवर्गीकरण' एक प्रमुख माँग है, वहाँ भील, मुसहर, बाल्मीकि, लोहार, घुमंतू आदि जातियों के नेताओं के दल को आगे करना क्या उचित नहीं रहता?
ये लोग एकदम ही नहीं सोचते कि ऑप्टिक्स कैसा रहेगा? मुझे क्या, मैंने तो माँग पत्र दे ही दिया है, अब इन्हें जो करना है करें!
गडकरी ने नागपुर के एक कार्यक्रम में कहा कि 30 वर्षों से पब्लिक लाइफ में हैं, अब वो थक गए हैं इसलिए नई पीढ़ी को अवसर मिलना चाहिए।
सरकार के सारे गुडविल की वाट लगा कर, ये और प्रधान जैसे लोग अब हज के लिए निकल रहे हैं। अगस्त 2025 से मैं एथनॉल और उसे 80% नॉन-कम्प्लायंट गाड़ियों में डालने का विरोध कर रहा हूँ। सरकार पेट्रोल पम्प पर हो रही मिलावट पर भी चुप ही रही ���ै।
जब इन्होंने गन्ने के शीरे की जगह, सारा जूस ही एथनॉल को दे दिया और कॉस्मेटिक, फार्मा सेक्टर को अमेरिका से इंपोर्ट को विवश किया, तो आज न तो जनता को उचित मूल्य पर पेट्रोल मिल रहा है, न ही चीनी।
ऐसे मंत्री की विदाई के लिए माहौल लंबे समय से बन रहा था, और अब स्वयं संकेत दे रहे हैं। क्या आवश्यकता थी कि 2030 के टारगेट को 2025 में पूरा करके नाचने की? गाड़ियाँ बनी नहीं, सड़कों पर करोड़ों गाड़ियाँ पुराने इंजन की हैं और इनको छाती ठोकनी थी।
Aura बनाना है? आरक्षण उस औरे का #% बना देगा।
टैलेंट खींचने की क्षमता? आपके माननीय का वश चले तो इस सेक्टर में भी -40 वाले को एडमिशन दिलवाने को जस्टिफाय करने लगेंगे।
तीन बजे दोपहर से लगातार आठ बजे तक जंतर मंतर पर बोलता रहा। दो घंटे के गैप के बाद, साढ़े चार घंटे का लाइव किया। 362 लोगों के प्रश्नों का लाइव में उत्तर दिया। 13000 कमेंट आए थे।
अब बारह घंटे में साढ़े नौ घंटे आरक्षण पर बोलने के पश्चात सोने जा रहा हूँ। आशा है कि सत्ताधीशों की भी नींद कल सुबह खुल जाए।
शुभ रात्रि! (वैसे तो अब ब्रह्म मुहूर्त होने वाला है।)
केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट कर दिया है कि SC/ST कोटा में ‘क्रीमी लेयर’ की अवधारणा नहीं लागू होगी क्योंकि वह केवल OBC के लिए थी। तो मोदी जी, OBC रिजर्वेशन तो पहले था ही नहीं, फिर वो क्यों आया और आपकी पार्टी ने उसका समर्थन क्यों किया था?
दूसरी बात, आपके वकील ने कहा कि ‘आय के आधार पर’ SC/ST आरक्षण बिलकुल नहीं होगा क्योंकि उसका आधार केवल ‘आर्थिक पिछड़ापन’ ही नहीं, ‘ऐतिहासिक उत्पीड़न और अन्याय’ है। ‘केवल’ आर्थिक पिछड़ापन कहाँ, आप तो इनकम को कहीं भी आधार नहीं मानते!
जिस EWS का आप ढोल पीटते हैं, उसमें न तो फॉर्म के द��म कम हैं, न हॉस्टल की फीस, न कोर्स फीस… तो ये दो कौड़ी का राजनैतिक झुनझुने का सामान्य वर्ग करे क्या? @narendramodi यह बताएँ कि सामान्य वर्ग के टैक्स के पैसों से फंड हो रही SC/ST आरक्षण सब्सिडी का लाभ, सामान्य वर्ग के EWS को ही क्यों नहीं मिलता?
कोई तर्क है इसका कि आप जिसे सर्टिफाइड गरीब मानते हैं, वो प्रमाण पत्र उससे माँगते हैं, उसे सत्यापित करते हैं और उसे नौ लाख से सोलह लाख तक का लोन ले कर पढ़ाई करनी पड़ती है। ���िर आप 1000 SC और 1000 OBC जातियों के शून्य प्रतिनिधित्व पर मौन हो जाते हैं कि इन जातियों का आरक्षण कहाँ है?
सत्य यह है कि आपका ‘विकसित भारत’ टूटते हायवे और निम्न गुणवत्ता के 50% लोगों से भरे कॉलेजों और विद्यालयों से कभी पूरा नहीं हो सकता। आरक्षण की समीक्षा करनी ही होगी, उसे तार्किक रूप से लाना ही होगा।
१. शून्य प्रतिनिधित्व वाली जातियों की पहचान
२. EWS की SC के स्तर की आर्थिक छूट
३. न्यूनतम अंक का विधान, GC से 10% से अधिक का कटऑफ में अंतर न हो SC/ST में
४. सक्षम लोगों को फर्जी तर्क के कारण आरक्षण न दिया जाए
५. हर श्रेणी में सबसे गरीब, पिछड़े को ही आरक्षण मिले
६. हर दस वर्ष में जातियों की समीक्षा और निष्कासन, नई जातियों को लिस्ट में जोड़ना बंद करें
तो सरकार अब खुल कर सामने आ रही है कि उखाड़ लो हमारी %# यदि दम है तो। ये @nitin_gadkari का कथन है (मनी कंट्रोल पर), पर गडकरी या @narendramodi यह बताएँ कि आपने प्योर पेट्रोल का विकल्प किस पेट्रोल पम्प पर दिया है? एक्सट्रा प्रीमियम तो प्रीमियम पेट्रोल है, जो 2009 में भी मिलता था और तब के ‘प्योर पेट्रोल’ से 10-12% महँगा होता था।
एक तो कभी ठीक से बताया नहीं कि कौन सा तेल दे रहे हैं, उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी की, और अब ज्ञान दे रहे हैं कि दिक्कत है तो ₹167 वाला ��रवाओ! जो लोग बोलें उन पर नागपुर में FIR करवाओ?
कायर! कापुरुष!!
तो सरकार अब खुल कर सामने आ रही है कि उखाड़ लो हमारी %# यदि दम है तो। ये @nitin_gadkari का कथन है (मनी कंट्रोल पर), पर गडकरी या @narendramodi यह बताएँ कि आपने प्योर पेट्रोल का विकल्प किस पेट्रोल पम्प पर दिया है? एक्सट्रा प्रीमियम तो प्रीमियम पेट्रोल है, जो 2009 में भी मिलता था और तब के ‘प्योर पेट्रोल’ से 10-12% महँगा होता था।
एक तो कभी ठीक से बताया नहीं कि कौन सा तेल दे रहे हैं, उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी की, और अब ज्ञान दे रहे हैं कि दिक्कत है तो ₹167 वाला भरवाओ! जो लोग बोलें उन पर नागपुर में FIR करवाओ?
कायर! कापुरुष!!
आप सबका प्रतिकार ही इस कानून को खत्म कर सकता है ,इसलिए अपनी आवाज को और अधिक बुलंद करे ....
साथ मिलकर सभी इस कानून का बहिष्कार करे ...
#UGC_काला_कानून_वापस_लो
सर, एक बार कमोड पर बैठ कर सुनते हुए डाल दीजिएगा, तो 2029 तक के लिए रास्ता क्लियर हो जाएगा। कार पर सुनना तो पुरानी बात हो गई है। @narendramodi जी की टीम इसके लिए 5 में से केवल 3 नंबर देती है।
4 या 5 के लिए श्मशान घाट से, नदी में डूबते हुए, दस्त लगे हुए कमोड से या रास्ते में ��ाड़ी रोक कर, धूप में बाहर खड़े हो कर फ़ोन को 3000 निट्स पर, यह कहते हुए सुनिए कि नेटवर्क यहीं आ रहा था तो हमने सोचा कि धूप तो हर दिन होती है, मोदी जी के मन की बात की छाँव से शीतलता आ जाएगी।
ऐसे चाटुकारिता होनी चाहिए, अभी तो नंबर काट लिए जाएँगे।
हम धर्मनिष्ठता और सत्यनिष्ठता के साथ ये संकल्प लेते हैं कि नई सरकार बनाकर ‘अयोध्या’ को एक ऐसी अनुपम-अनुकरणीय धार्मिक नगरी के रूप में विकसित करेंगे, जहाँ विश्व भर से आए श्रद्धालु सच्ची आध्यात्मिकता की अद्वितीय अनुभूति क���ेंगे।
प्रभु के आशीर्वाद के साथ, हम अयोध्या के सनातन मान को आस्था-श्रद्धा, अखंड विश्वास और सच्ची भावना के ‘सियाराम-धाम’ के रूप में पुनर्स्थापित और पल्लवित करेंगे।
इससे अयोध्यावासियों के भी परंपरागत गौरवभान और अधिकारों को पुन: स्थापित करेंगे।
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को ‘अपराधियों का एनकाउंटर’ और ‘पुलिस को पूरी छूट’ जैसी शब्दावली का त्याग कर देना चाहिए। अपनी पहचान के स्थायित्व के पीछे भागते सम्राट चौधरी यह भूल रहे हैं कि योगी, हिमांता या शुवेंदु अधिकारी की पहचान इन सबने परिश्रम से गढ़ी है।
इनकी लीग में खड़े होने के लिए दो दिन का बुल्डोजर और चार रैंडम एनका��ंटर बेकार है। आपको राज्य मिला है, संचालन आपके हाथ में, पर्यटन जैसे अविकसित क्षेत्र हैं जो पूरे राज्य की अर्थव्यवस्था सुदृढ़ कर सकता है। आपकी लेगेसी समृद्ध बिहार होना चाहिए।
अपराध मुक्ति उसका प���ला चरण है, पर क्या पुलिस इतनी उच्छृंखल हो जाएगी कि सारण में पीड़िता को ही चरित्रहीन कह देगी? पटना की नीट छात्रा की आत्महत्या की गुत्थी आज तक नहीं सुलझी है। भारत भूषण की हत्या एक नया तीर है, जो बिहार पुलिस ने ले लिया है।
पुलिस को पुलिसिंग पर ध्यान देने कहिए, करुणा उसका आभूषण है, शक्ति का प्रयोग उसका विवशता होनी चाहिए। भारत भूषण के हाथ का पिस्तौल उसे भगत सिंह नहीं बनाता, वह एक आपराधिक कृत्य है। प���लिस पर तानना और भी बड़ा अपराध।
उसके पोस्ट में जिसको फिलॉसफी दिखे, वो मानता रहे, पर मैं यदि इस नैराश्य के भाव में हाथ के बंदूक को उचित कहने लगूँ तो फिर कश्मीर के अल्गाववादी और दिल्ली के अलफला के आतंकी भी अपने आप को फिलॉसफी से समझा लेते हैं।
@samrat4bjp पुलिस निर्दोष नहीं है, वह दंड का पात्र है क्योंकि भारत (अपराधी होने के बाद ��ी) हत्या से पूर्व पिस्तौल दे चुका था। आप अपनी भाषा पर नियंत्रण रखिए क्योंकि उसे आधार बना कर यदि पुलिस खुन्नस में एनकाउंटर करने लगेगी, तो आपकी ही साख पर बट्टा लगेगा।