मेरी ज़िंदगी बर्बाद कर दी…” — जब 17 साल का छात्र ऐसा कहने पर मजबूर हो, तो शिक्षा व्यवस्था कटघरे में खड़ी होती है।
संदिग्ध ठेकों और लापरवाही से छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों की जवाबदेही तय ��ोनी चाहिए। @RahulGandhi @priyankagandhi
#ChhatronKiGoonj ✊🇮🇳
Addressed the National Legal Conclave 2026 in Hyderabad.
Always good chatting with members of the legal fraternity, public representatives and young minds who believe in the Constitution.
In the age of instant information, the battle for truth strengthens democracy.
Spoke on "Who Writes the National Story? Narrative, Power and Democracy in the Age of Information"
📍 Hyderabad
दक्षिण 24 परगना के बारुईपुर की 12 साल की मासूम बेटी का कई हवस के भूखे भेड़ियों ने मिलकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया और फिर बेरहमी से उसकी हत्या कर दी।
महिला विरोधी डबल इंजन भाजपा सरकार न्याय करने की बजाय अपने पूरे पुलिस- प्रशासनिक को उन हत्यारों की ढाल बनाकर ��ड़ा कर दिया है.
क्योंकि उन दरिंदों के तार सत्ता की मलाई चाटने वाली भाजपा नेताओं से जुड़े हैं.
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' का नारा कहाँ गया?
#चलो_दिल्ली_जंतर_मंतर
आज इंदिरा भवन में राष्ट्रीय अध्य���्ष @LambaAlka जी के नेतृत्व में दिल्ली महिला अध्यक्ष @PushpaSatbirSingh और हरियाणा प्रदेश महिला अध्यक्ष #पर्ल_चौधरी के साथ बैठक हुई।
जिसमें आने वाली 21 तारीख को जंतर मंतर पर एक बड़ा कार्यक्रम होने जा रहा है
महिला आरक्षण बिल #नारी_वंदन_अधिनियम_2023_लागू_करो आज करो अभी करो महिला सुरक्षा और महंगाई।
इस संबंध में मीटिंग रखी गई
इसी संबंध में दोनों प्रदेश अध्यक्षों ओर दिल्ली और हरियाणा की जिला अध्यक्षों के साथ सलाह मशवरा किया गया कार्यक्रम सफल करने के लिए सबको जिम्मेवारी दी गई l
बस इस��� हवा-हवाई और हवा-बाजी के चलते भारत 🇮🇳 का पासपोर्ट नीचे गिर कर विश्व 🌍 में 127 वें स्थान पर लुढ़क गया है और भारत में हवाई चप्पल 🩴 पहनने वाला -अपनी चप्पल सहित आपके भारत आने और हवाई यात्रा करने का इंतज़ार कर रहा है.
काम की बात - संदीप दीक्षित के साथ
भारतीय संस्कृति किसी एक भाषा, एक विचार या एक पहचान का नाम नहीं है, बल्कि भारत की आत्मा विविधता, भाषा, लोकगीतों, संगीत और साझा विरासत में बसती है।
संस्कृति पर नहीं, उसके संरक्षण के लिए क्या किया गया- यही है आज की काम की बात 👇
: रचनात्मक कांग्रेस के चेयरमैन Shri @_SandeepDikshit
• राम मंदिर से 40 दिन में 70 चोरियां हो गईं
• CCTV फुटेज का कोई बैकअप नहीं मिला
• पिछले 5 साल में कितनी चोरी हुई, इसकी जानकारी नहीं है
• चंपत राय पर कोई FIR नहीं हो रही है
क्या ये बिना सरकार के संरक्षण के मुमकिन हो सकता है?
: @NayakRagini जी
📍 दिल्ली
कांग्रेस अधिवेशन की कहानी- 30
कांग्रेस के 30वें अधिवेशन की कहानी: 1915 बॉम्बे
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का 30वाँ अधिवेशन 27 से 29 दिसंबर 1915 तक बॉम्बे (अब मुंबई) में आयोजित हुआ। उस समय प्रथम विश्वयुद्ध चल रहा था और ब्रिटिश सरकार भारत से सैनिकों, आर्थिक संसाधनों तथा अन्य प्रकार की सहायता की अपेक्षा कर रही थी। 1907 के सूरत व��भाजन के बाद कांग्रेस में नरम दल का प्रभाव बना ह��आ था, लेकिन 1914 में बाल गंगाधर तिलक जेल से रिहा होकर सक्रिय राजनीति में लौट आए थे।
1914 के मद्रास अधिवेशन में कांग्रेस ने युद्ध के दौरान ब्रिटिश सरकार के प्रति सहयोग की नीति अपनाई थी। 1915 के बॉम्बे अधिवेशन में भी यही नीति जारी रही, लेकिन इसके साथ यह स्पष्ट कर दिया गया कि भारत की सहयोग के बदले ब्रिटिश सरकार को स्वशासन की दिशा में ठोस संवैधानिक कदम उठाने होंगे। उस समय देश में उत्तरदायी शासन और अधिक र���जनीतिक अधिकारों की मांग लगातार तेज़ होती जा रही थी।
अधिवेशन की अध्यक्षता
इस अधिवेशन की अध्यक्षता सर सत्येंद्र प्रसन्न सिन्हा ने की। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के ऐसे पहले अध्यक्ष थे जिन्हें आगे चलकर ब्रिटिश सरकार ने 'लॉर्ड' की उपाधि से सम्मानित किया। उनका जन्म 1863 में बंगाल के बीरभूम ज़िले के रायपुर में हुआ था। उन्होंने इंग्लै��ड से कानून की शिक्षा प्राप्त की और एक प्रतिष्ठित वकील तथा राजनेता के रूप में अपनी पहचान बनाई। 1919 में वे ब्रिटिश सरकार में Under-Secretary of State for India नियुक्त होने वाले पहले भारतीय बने।
अपने अध्यक्षीय भाषण में सर सत्येंद्र प्रसन्न सिन्हा ने कहा-
भारत युद्ध के इस कठिन समय में ब्रिटिश साम्राज्य का सहयोग करने के लिए तैयार है, लेकिन यह सहयोग भारत की राजनीतिक आकांक्षाओं की उपेक्षा करके नहीं दिया जा सकता।
उन्होंने उत्तरदायी शासन तथा व्यापक संवैधानिक सुधारों की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही उन्होंने हिंदू, मुसलमान और अन्य सभी समुदायों से राष्ट्रीय एकता बनाए रखने का आह्वान करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि भारतीयों की बढ़ती राजनीतिक चेतना अंततः स्वशासन का मार्ग प्रशस्त करेगी।
अधिवेशन में पारित प्रस्ताव
अधिवेशन की शुरुआत में सर सत्येंद्र प्रसन्न सिन्हा ने उसी वर्ष दिवंगत हुए गोपाल कृष्ण ग��खले और सर फिरोजशाह मेहता को श्रद्धांजलि अर्पित की। अधिवेशन का प्रमुख प्रस्ताव यह था कि भारत युद्ध में ब्रिटिश सरकार का सहयोग करेगा, लेकिन इसके बदले भारत में उत्तरदायी शासन स्थापित किया जाए और व्यापक संवैधानिक सुधार लागू किए जाएँ।
इस अधिवेशन की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि कांग्रेस के संविधान में किए गए संशोधन थे, जिनके माध्यम से संगठन को अधिक व्यवस्थित स्वरूप दिया गया। विषय समिति (Subjects Committee), क्रेडेंशियल्स समिति तथा अन्य संगठनात्म�� समितियों की भूमिका को अधिक स्पष्ट किया गया।
इसके अतिरिक्त मॉर्ले-मिंटो सुधारों को अपर्याप्त बताते हुए विधायी परिषदों में भारतीय प्रतिनिधित्व बढ़ाने की मांग की गई। आर्थिक क्षेत्र में स्वदेशी उद्योगों को प्रोत्साहित करने तथा युद्ध से प्रभावित भारतीय उद्योगों को सहायता देने पर बल दिया गया।
शिक्षा के क्षेत्र में प्राथमिक शिक्षा के विस्तार और तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने की मांग की गई। साथ ही प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा तथा भारतीयों के राजनीतिक अधिकारों के विस्तार पर भी जोर दिया गया।
प्रभाव और विरासत
1915 का बॉम्बे अधिवेशन कांग्रेस के संगठनात्मक विकास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध हुआ। कांग्रेस के संविधान में किए गए संशोधनों ने संगठन को अधिक सुदृढ़ और व्यवस्थित बनाया। इसी अवधि में कांग्रेस और अखिल भारतीय मुस्लिम लीग के नेताओं के बीच संवाद और सहयोग का वातावरण मजबूत हुआ।
युद्ध के दौरान कांग्रेस द्वारा अपनाई गई सहयोग की नीति ने ब्रिटिश सरकार पर ���ारत में संवैधानिक सुधारों की दिशा में आगे बढ़ने का नैतिक और राजनीतिक दबाव बनाया, जिसका परिणाम आगे चलकर 1917 की मॉन्टेग्यू घोषणा के रूप में सामने आया। यह अधिवेशन नरम और गरम दल के बीच बढ़ती दूरी को कम करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित हुआ और राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करने में सहायक बना।
कुल मिलाकर 1915 का बॉम्बे अधिवेशन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के इतिहास में इसलिए विशेष महत्व रखता है ���्योंकि इसने संगठनात्मक सुधारों, संवैधानिक राजनीति और राष्ट्रीय एकता के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास किया।
यही संगठनात्मक मजबूती, संवैधानिक राजनीति और राष्ट्रीय एकता की भावना आगे चलकर कांग्रेस को एक व्यापक राष्ट्रीय जनआंदोलन में बदलने की आधारशि��ा बनी।