चंपत राय का इस्तीफ़��� हो गया ।
कार सेवकों पर गोली चलवाने वाले निपेन्द्र मिश्रा का दोष तब मुलायम सिंह यादव पर डाल दिया गया ; तो अब राम मंदिर की चोरी के लिए योगी ज़िम्मेदार क्यों नहीं ? मीठा मीठा गप- कड़वा कड़वा थू ।
प्रभु श्रीराम के मंदिर में हुए ज़मीन घोटाले से संबंधित 13 दस्तावेज मैंने SIT को दिया और भी काग़ज़ात देने के लिए समय माँग रहा हूँ।
ज़मीन के नाम पर चंपत राय गैंग ने सैकड़ों करोड़ का घोटाला किया है, अगर कार्यवाही नही हुई तो कोर्ट जाऊँगा।
देखिए नीतीश राजपूत की ये रिपोर्ट।
ज़िंदगी बदलना आसान नहीं होता...
इसके लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है,
आराम छोड़ना पड़ता है,
और कई बार वो त्याग करने पड़ते हैं जो बाकी लोग नहीं करते।
सफलता की कीमत हमेशा पहले चुकानी पड़ती है,
इनाम बाद में मिलता है। 🔥
#sonusharma#inspirational#motivationalspeaker
अब पता चला कि खुफिया जानकारी अखिलेश जी को पत्रकार अभिषेक उपाध्याय ने दी थी....
अभिषेक जी ने खुलासा किया था कि SIT की टीम में जो व्यक्ति है उस पे 420 का मुकदमा दर्ज है
कारसेवकों पर गोली चली - भाजपा 35 साल से इस एक घटना को बार-बार दोहराती रही है। लेकिन क्या भाजपा अयोध्या का पूरा इतिहास बताने का साहस करेगी?
क्या वह बताएगी कि 1990 में अदालत का आदेश क्या था और प्रशासन के सामने परिस्थितियाँ क्या थीं? क्या वह 1992 में सुप्रीम कोर्ट को दिए गए आश्वासनों और उसके बाद हुए विध्वंस की कहानी भी उतनी ही जोर से सुनाएगी? क्या वह बताएगी कि सुप्रीम कोर्ट ने उस विध्वंस पर क्या टिप्पणी की थी?
और सबसे दिलचस्प सवाल - 1990 में मुख्यमंत्री कार्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था के केंद्र में रहे नृपेंद्र मिश्रा आगे चलकर भाजपा के इतने भरोसेमंद कैसे बने कि नरेंद्र मोदी ने उन्हें अपना प्रधान सचिव बनाया और बाद में वही राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष बने?
भाजपा की राजनीति की सबसे बड़ी ताकत शायद यही रही है - इतिहास से अपने काम के पन्ने निकालो, बाकी छिपा दो और आधे सच को बार-बार दोहराकर पूर��� सच बना दो।
इस वीडियो में नारा नहीं, पूरी कहानी है। 1990 भी है, 1992 भी। अदालत के आदेश भी हैं और भाजपा से वे सवाल भी, जिनके जवाब उसके भाषणों में नहीं मिलते।
वीडियो देखिए और साझा कीजिए - क्योंकि इतिहास आधा नहीं, पूरा बताया जाना चाहिए।