"इनकी ड्यूटी खत्म ही नहीं होती..." वर्दी की चमक के पीछे का यह दर्द आज अखबार की सुर्खियों में है। 🗞️
24-24 घंटे की ड्यूटी, न छुट्टी का ठिकाना न आराम का। स्वीकृत पदों और वास्तविक तैनाती के बीच बढ़ती खाई हमारे जवानों को मानसिक तनाव की ओर धकेल रही है।
पहली विडियो में देखो ���ितनी बत्तमीजी से बात कर रही कैसे चिढ़ चिढ़ा रही...
स्कूल की प्रिंसिपल- बच्चों के माता पिता से वजह सिर्फ इतनी सी थी, की बच्चे के माता पिता ने स्कूल से किताब नहीं खरीदी क्योंकि स्कूल में किताब बहुत महंगी थी, वही किताब बाहर से खरीद ली क्योंकि बाहर किताब सस्ती थी,,
इसमें कुछ गलत नहीं किया माता पिता ने भाई उनमें महंगी किताब खरीदने की संभाई नहीं थी...
उनके पैसे जितने होंगे उसी हिसाब से लेंगे
प्रिंसिपल को सभी गलत बता रहे हैं...
तो दूसरी विडियो में नाक रगड़ कर माफ़ी मांगने की कह रही है।
देखो हमारे सेहत के साथ किस तरह खेलवाड़ किया जा रहा है
आज कुछ घंटे पहले मैं शहर से अपने गाँव लौट रहा था
तो ���ास्ते में एक ढाबे पर रुका, सोचा लंच कर लूँ
जब मैं ढाबे पर रुका
तो हाथ-मुँह धोने अंदर चला गया
तभी किचन में जो देखा
उसे देखकर मैं हैरान रह गया
चिकन की कढ़ाई पर
एक चप्पल रखी हुई थी
मैंने धीरे से
फोन पर बात करने के बहाने
उसकी फोटो भी क्लिक कर ली
बाहर देखा तो
काफी लोग आराम से बैठकर
खाना खा रहे थे
और कुछ staff आपस में
झगड़ा भी कर रहे थे
हो सकता है लड़ाई-झगड़े में
ये सब हुआ हो
लेकिन जो मैंने देखा
वो सच में परेशान कर देने वाला था
बाहर बैठे लोग
चिकन खा रहे थे
अब पता नहीं
वही कढ़ाई व���ला था
या अलग बना था
लेकिन ये देखकर
मेरी भूख ही खत्म हो गई
मैंने बाइक चालू की
और सीधे गाँव वापस आ गया
अब तो यही सोच है
बाहर खाने से
पूरी तरह बचना चाहिए
क्योंकि लापरवाही
बहुत ज्यादा हो रही है
आप बताओ
क्या आप चिकन में चप्पल देखकर भी
वहीं बैठकर खा सकते थे ?
आज मैं केले खरीद रही थी
तो मैंने दुकानदार से पूछा
ये केले पेड़ पर पके हैं या किसी और तरीके से?
वो हंसकर बोला
मैडम, आजकल ज्यादातर केले कार्बाइड नामक एक कैमिकल स्प्रे से ही पक रहे हैं।
एथलीन गैस से भी पकाते हैं कुछ लोग
लेकिन वो केला थोड़ा महंगा पड़ता है।
उसका जवाब सुनकर एक पल को मैं चुप रह गई
यानी जो केला हम रोज़ खा रहे हैं,
वो समय से पका फल नहीं,
बल्कि कैमिकल से जल्दी तैयार किया गया केला है।
ऊपर से एकदम पीला, चमकदार, परफेक्ट
लेकिन अंदर क्या है
ये कोई नहीं पूछता।
सच ये है
जल्दी में पकाए गए फल
दिखने में अच्छे होते हैं,
पर स्वाद और सेहत दोनों में कमी छोड़ जाते हैं।
और जो फल
धीरे धीरे प्राकृतिक तरीके से पकता है
वही असली मिठास और पोषण देता है।
अब आप बताइए
आपके यहां कैमिकल से पका केला मिलता है
या नेचुरल तरीके से पका हुआ??
बाड़मेर पुलिस के जांबाज़ कांस्टेबल जेठाराम द्वारा रोडवेज बस के ब्रेक फेल होने पर
करीब 40 यात्रियों की जान बचाना
अद्वितीय वीरता और कर्तव��यनिष्ठा का प्रतीक है।
ऐसे बहादुर कर्मवीर को राजस्थान पुलिस विभाग एवं सभी सामाजिक व संगठनों द्वारा सम्मानित कर प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं।
ईश्वर से प्रार्थना है कि आपका आने वाला वर्ष सुख, समृद्धि, अच्छी सेहत और ढेर सारी खुशियों से भरा हो। आप जीवन में नई ऊंचाइयों को छुएं और आपकी हर मनोकामना पूरी हो।
@jpk_11@BhagirathT47312
@JATbera1@JATbera1 जी एक बार जवाब जरूर दे जब रीट 2021 रद्द हुई उसमें 15500 घरों में दुख था तब आप कहा थे तब क्या हुआ था आज आपके बहिन जीजाजी के साथ हुआ तो आपको गलत लग रहा है
असली कमाई तो ये ही है...
कल राजस्थान विश्वविद्यालय के पास से गुजर रहा था। पुलिस की गाड़ी खड़ी थी। बोनट पर काटा हुआ केक रखा था। दो-तीन वर्दीधारी और दो-तीन सिविलियन हंसी-खुशी के माहौल में केक खा रहे थे और खिला रहे थे। एक महिला के गोद में बच्चा भी था। मैंने गाड़ी चला रहे हैं मेरे दोस्त को बोला यार थोड़ा बैक लो। बड़ा ही मस्त दृश्य लग रहा है। छोटा सा वीडियो बनाते हैं।
मैं अपने हिसाब से सोच रहा था कि कोई महिला पुलिसकर्मी ड्यूटी पर है और बच्चे का बर्थडे होगा इसलिए यहीं पर केक काटकर खुशी मना रहे होंगे। शायद असली बात पता ही नहीं चलती अगर उनमें से एक पुलिस का जवान हमारी गाड़ी के पास नहीं आता। जवान ने पूछा कि वीडियो क्यों बना रहे हैं? मैंने कहा, यार बड़ा अच्छा लग रहा है देखकर। बच्चे का बर्थडे पुलिस वाले ऐसे मनाते हैं, कितनी मुश्किल ड्यूटी होती होगी पुलिस ��ालों की?
पुलिस का जवान धीरे से मुस्कुरा दिया। फिर बोला- सर जी, बात यह नहीं है। आप नीचे उतरेंगे तो बताऊंगा। मैंने कहा लो भाई, नीचे आ जाते हैं। अब बता दो क्या बात है। उसने जो कहानी बताई वह तो सच में ही दिल को छू गई। फिर हम भी गाड़ी के पास ही पहुंच गए।
असल बात यह थी कि बर्थ-डे बच्चे का नहीं बल्कि वहां ड्यूटी पर तैनात महिला इंस्पेक्टर गुंजन सोनी का था। केक अलवर से एक दंपती लेकर आए थे। इंस्पेक्टर गुंजन सोनी ने अपनी अलवर पोस्टिंग के दौरान इस जोड़े की शादी को टूटने से बचाया था। दोनों के बीच कुछ अनबन और गलतफहमी थी जिसे समझाईश से गुंजन ने दूर कर दिया था और दोनों तभी से खुशी-खुशी साथ रहते हैं। गुंजन के हर जन्मदिन पर दोनों केक लेकर जोड़े से आते हैं। कल गुंजन की ड्यूटी दिन भर यूनिवर्सिटी के गेट पर थी तो दोनों यहीं आ गए।
मैं हैरान रह गया। आप ड्यूटी के दौरा��� कई बार कितने अच्छे काम कर जाते हैं और उसकी छाप कितनी गहरी पड़ती होगी? हम नौकरी और प्रोफेशन में कितना कमाते हैं, कितना बचाते हैं यह मायने नहीं रखता लेकिन अगर हम लोगों का ऐसा प्यार कमाते हैं, तो मैं समझता हूं कि असली कमाई यही है। बाकी सब कुछ इसके नीचे-नीचे ही है।
@arvindchotia @PoliceRajasthan
असली कमाई तो ये ही है...
कल राजस्थान विश्वविद्यालय के पास से गुजर रहा था। पुलिस की गाड़ी खड़ी थी। बोनट पर काटा हुआ केक रखा था। दो-तीन वर्दीधारी और दो-तीन सिविलियन हंसी-खुशी के माहौल में केक खा रहे थे और खिला रहे थे। एक महिला के गोद में बच्चा भी था। मैंने गाड़ी चला रहे हैं मेरे दोस्त को बोला यार थोड़ा बैक लो। बड़ा ही मस्त दृश्य लग रहा है। छोटा सा वीडियो बनाते हैं।
मैं अपने हिसाब स�� सोच रहा था कि कोई महिला पुलिसकर्मी ड्यूटी पर है और बच्चे का बर्थडे होगा इसलिए यहीं पर केक काटकर खुशी मना रहे होंगे। शायद असली बात पता ही नहीं चलती अगर उनमें से एक पुलिस का जवान हमारी गाड़ी के पास नहीं आता। जवान ने पूछा कि वीडियो क्यों बना रहे हैं? मैंने कहा, यार बड़ा अच्छा लग रहा है देखकर। बच्चे का बर्थडे पुलिस वाले ऐसे मनाते हैं, कितनी मुश्किल ड्यूटी होती होगी पुलिस वालों की?
पुलिस का जवान धीरे से मुस्कुरा दिया। फिर बोला- सर जी, बात यह नहीं है। आप नीचे उतरेंगे तो बताऊंगा। मैंने कहा लो भाई, नीचे आ जाते हैं। अब बता दो क्या बात है। उसने जो कहानी बताई वह तो सच में ही दिल को छू गई। फिर हम भी गाड़ी के पास ही पहुंच गए।
असल बात यह थी कि बर्थ-डे बच्चे का नहीं बल्कि वहां ड्यूटी पर तैनात महिला इंस्पेक्टर गुंजन सोनी का था। केक अलवर से एक दंपती लेकर आए थे। इंस्पेक्टर गुंजन सोनी ने अपनी अलवर पोस्टिंग के दौरान इस जोड़े की शादी को टूटने से बचाया था। दोनों के बीच कुछ अनबन और गलतफहमी थी जिसे समझाईश से गुंजन ने दूर कर दिया था और दोनों तभी से खुशी-खुशी साथ रहते हैं। गुंजन के हर जन्मदिन पर दोनों केक लेकर जोड़े से आते हैं। कल गुंजन की ड्यूटी दिन भर यूनिवर्सिटी के गेट पर थी तो दोनों यहीं आ गए।
मैं हैरान रह गया। आप ड्यूटी के दौरान कई बार कितने अच्छे काम कर जाते हैं और उसकी छाप कितनी गहरी पड़ती होगी? हम नौकरी और प्रोफेशन में कितना कमाते हैं, कितना बचाते हैं यह मायने नहीं रखता लेकिन अगर हम लोगों का ऐसा प्यार कमाते हैं, तो मैं समझता हूं कि असली कमाई यही है। बाकी सब कुछ इसके नीचे-नीचे ही है।
@arvindchotia @PoliceRajasthan
कहां है वो फर्जी काले धोले पीले चितकबरे
जो रोज मेरी TL पर अपने संस्कार दिखाया करते थे
न्यायपालिका के फैसले का भी सम्मान करोगे या फिर अपने संस्कार दिखाओगे
#si_भर्ती_2021_रद्द हो गई है
X छोड़कर किताब पकड़ लो