टू नेशन थ्योरी की मुख़ालफ़त करने वाले महान स्वतंत्रता सेनानी, सामाजिक संगठन मोमीन कॉन्फ्रेंस के सूत्रधार बाबा-ए-कौम मरहूम अब्दुल कय्यूम अंसारी के यौमे-ए-पैदाइश पर हम ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश करते हैं।
मरहूम अब्दुल कय्यूम अंसारी साहब ने अपनी ज़िंदगी सामाजिक न्याय, ग़रीबों और वंचितों की भलाई में लगा दी। शिक्षा की बेहतरी के लिए उस दौर में उन्होंने बिहार में बेहतरीन कार्य किया था। #TejashwiYadav #Bihar #RJD
महान स्वतंत्रता सेनानी, प्रखर राष्ट्रवादी नेता एवं सामाजिक न्याय के अग्रदूत स्व.अब्दुल कयूम अंसारी साहब की जयंती पर उन्हें खेराजे अकीदत.
आज उनकी जयंती के अवसर पर हम उनके आदर्शों को आत्मसात करने तथा एक समतामूलक एवं सशक्त समाज के निर्माण का संकल्प लेते हैं।
#अब्दुल_कयूम_अंसारी
महान देशभक्त, देश के पहले राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य, 'मसावात (बराबरी)' पत्रिका के संपादक, राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र ���ें पिछड़ों की हिस्सेदारी के लिए संघर्ष करने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अब्दुल कय्यूम अंसारी जी की जयंती पर उन्हें शत्-शत् नमन व विनम्र आदरांजलि।
अब्दुल कय्यूम अंसारी : पसमांदा विचार के ज़रिये नये भारत के राष्ट्र निर्माता
फख्र-ए-कौम, बाबा-ए-कौम अब्दुल कय्यूम अंसारी का पैतृक गांव जनपद गाज़ीपुर की नवली ग्रामसभा है। उनकी पैदाइश 1 जुलाई 1905 को हुई थी। यहां से उनके लोग बिहार के डेहरी-ऑन-सोन चले गए। उन्होंने प्राथमिक शिक्षा ग्रहण करने के ��ाद उच्च शिक्षा के लिए अलीगढ़ का रुख किया। उसके बाद शिक्षा के लिए कोलकाता तक का सफर किया।
बाबा-ए-कौम अब्दुल कय्यूम अंसारी, एक महान राष्ट्रवादी और स्वतंत्रता सेनानी थे। आज उनकी जयंती है। वे अलीगढ़ भी रहे और भारत की आज़ादी के लिए अपनी विलासितापूर्ण जिंदगी छोड़कर मात्र 16 साल की उम्र में जेल भी चले गए।
अब्दुल कय्यूम अंसारी वो पहले नेता थे, जिन्होंने जिन्ना के दो-राष्ट्र सिद्धांत का विरोध किया�� गांधी जी और उनकी टीम से उन्होंने भारत का विभाजन न करने की बात कही। उसके बाद देश में कई मुस्लिम नेताओं ने भी जिन्ना के सिद्धांत का विरोध किया। 1931 में मुस्लिम लीग के लोग घर-घर जाकर मोमिन कॉन्फ्रेंस के खिलाफ़ अभियान चलाते थे कि आप केवल धर्म बताइए, जाति नहीं।
अब्दुल कय्यूम अंसारी जनता के नेता थे। वे विशेष रूप से वंचित और गरीब लोगों के सबसे करीब थे। अपनी मृत्यु तक वे कांग्रेस के सच्चे और वफादार नेताओं में रहे। लगभग सभी मुख्यमंत्रियों के मंत्रिमंडल में वे कैबिनेट मंत्री रहे। वे ���भी समुदायों के गरीबों के लिए मसीहा थे।
अब्दुल कय्यूम अंसारी की कई खासियतों में एक सबसे बड़ी बात यह थी कि वे दलितों, पिछड़ों और गरीबों के बारे में हमेशा फिक्रमंद रहते थे। उन्होंने बिहार के लगभग सभी जिलों में गरीब छात्रों के लिए छात्रावास और मुफ्त भोजन की व्यवस्था कराई। आज जिसे केंद्र और राज्य सरकारें पूरे भारत में मिड-डे मील योजना के अंतर्गत चला रही हैं।
अब्दुल कय्यूम अंसारी एक कुशल पत्रकार, लेखक और कवि भी थे। वे उर्दू साप्ताहिक "अल-इस्ला" (सुधार) और उर्दू मासिक "मुसावत" (समानता) के संपादक भी रहे।
कय्यूम अंसारी बिहार राज्य जमायत-उल-मोमिनीन के अध्यक्ष भी थे। बिहार के सासाराम में अली बंधुओं के संपर्क में आने के बाद उन्होंने खिलाफत आंदोलन के ज़रिये स्वाधीनता संग्राम में भाग लिया। सन् 1930 और 1940 के दशक में उन्होंने मुस्लिम लीग और द्विराष्ट्र सिद्धांत का जबरदस्त विरोध किया�� स्वतंत्रता के बाद वे बिहार की कांग्रेस सरकारों (1946–52, 1955–57 व 1962–67) में मंत्री रहे। वे बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष, कांग्रेस कार्यकारी समिति के सदस्य तथा राज्यसभा के सदस्य (1970–72) भी रहे।
"मस्जिद तक हम उनके भाई हैं,
मस्जिद के बाहर हम नाई हैं।"
— गुलज़ार सलमानी
एक सवाल ख़ुद से कीजिए कि इन शब्दों के बारे में आप कितना जानते हैं—
ब्राह्मणवाद – सैयदवाद
अक़लियत (मुसलमान)
अकसरियत (बहुजन)
अशराफ़ (सैयद, शेख, ख़ाँ, पठान)
अज़राफ़ (पिछड़ा)
अरज़ाल (दलित) यानी 85 सैकड़ा आबादी
हंटर कमीशन – रंगनाथ मिश्रा आयोग – सच्चर समिति
अविभाजित भारत में मुसलमान लगभग 20 फीसदी थे और नौकरियों में उनकी हिस्सेदारी लगभग 60 फीसदी थी। उसमें भी 2 से 3 फीसदी सवर्ण मुसलमानों का 55 फीसदी से ज़्यादा पदों पर कब्ज़ा था।
1वीं से 13वीं संसद तक — लगभग 7500 सांसदों में लगभग 400 मुसलमान रहे, जिनमें केवल लगभग 60 पसमा���दा थे। सवर्ण मुसलमान लगभग 2.01% आबादी होने के बावजूद सांसदों में लगभग 4.5% प्रतिनिधित्व रखते रहे।
पसमांदा — फ़ारसी लफ़्ज़, जिसका अर्थ है दलित-पिछड़ा यानी बहुजन मुस्लिम। ओबीसी, शूद्र-अतिशूद्र मुसलमान। बाद के दिनों में असीम बिहारी, एजाज़ अली से होते हुए जनाब अली अनवर अंसारी साहब ने पसमांदा आंदोलन को एक नई दिशा दी। इस आंदोलन ने भारत निर्माण को एक कदम आगे बढ़ाया और यह ��ारा दिया—
"दलित-पिछड़ा एक समान,
हिंदू हो या मुसलमान।"
विस्तार से जानने के लिए #सामाजिक_न्याय_की_पाठशाला का यह ख़ास एपिसोड देखिए, जिसे मैंने चार साल पहले बनाया था।
वीडियो लिंक — https://t.co/ajC6nvahoa
स्वतंत्रता सेनानी, सामाजिक समरसता के प्रखर संवाहक एवं बिहार के पूर्व मंत्री स्व. अब्दुल कयूम अंसारी जी की जयंती पर उन्हें शत्-शत् नमन।
राष्ट्र की एकता, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनका समर्पण सदैव हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा।
Remembering the great Pasmanda leader, Fakhr-e-Qaum Abdul Qaiyum Ansari (July 1, 1905 – Jan 18, 1973), on his 121st birth anniversary. He was a freedom fighter and the most prominent leader of the Momin Conference during the first wave of the Pasmanda Movement (1920–1947).
आज पसमांदा मुसलमानों के महानायक, महान स्वतंत्रता सेनानी, मोमिन कॉन्���्रेंस के नेता और 'फख्र-ए-क़ौम' अब्दुल क़य्यूम अंसारी जी की 121वीं जयंती है, जिसे हम 'मसावात दिवस' के रूप में मनाते हैं।
(1 जुलाई 1905 - 18 जनवरी 1973)
The Indian mainstream media is lying; they are serving exit polls to the public based on the whims of their owners, while the ground reality is entirely different.
Contemporary anti-caste movements have become experts in pluralism (counting identities, demanding quotas) but have lost the art of pluralisation. The global crisis of democracy is a crisis of pluralisation – elites are happy to have many cultures,
Israel is not a country, but an illegal Zionist project supported by U.S. imperialism. Israel has no legitimate existence; it was established on the stolen land of Palestinian territory. The Zionist regime is the root of terrorism, and Netanyahu is a modern-day Hitler.
एप्स्टीन फाइल ज़ायनिस्ट रेजीम इज़राइल का नया हथियार है। एप्स्टीन फाइल में ऐसा कोई राज़ छिपा है जिससे डोनाल्ड ट्रंप की कुर्सी जा सकती है। ट्रंप अपने आसपास के इज़रायली मोसाद एजेंटों से घिरे हुए हैं। जब-जब डोनाल्ड ट्रंप ईरान से समझौता करने की कोशिश करेंगे,
Without acquiring nuclear weapons, Iran can no longer ensure its own security, as the United States has effectively given Israel a free hand to act across the Middle East. Israel has launched successive military strikes in Palestine, Iran, and now Lebanon,