हाल ही में गुजरात में पुलिस द्वारा लाठी के सहारे किया गया “न्याय” चर्चा में था, और अब आंध्र प्रदेश में भी कुछ ऐसा ही नज़ारा देखने को मिल रहा है।
लगता है कानून की किताबें पढ़ने के बजाय लाठी चलाने की कला का प्रशिक्षण ज्यादा ज़ोरों पर है।
आम आदमी का जब न्याय व्यवस्था से भरोसा उठने लगता है, तब शायद ऐसे नज़ारे देखने को मिलते हैं।
हम आम इंसान बस इतना चाहते हैं कि कानून अपना काम इतनी प्रभावी तरीके से करे कि कोई अपराध करने से पहले सौ बार सोचे उसे अपने किए का कानूनी अंजाम भुगतना पड़ सकता है।