मैं भी विकास भाई का समर्थन करता हूँ, बस मेरी दो शर्त है।
1. विकास भाई अपने कोचिंग में आरक्षण कब लागू करेंगे, 85 प्रतिशत शिक्षक बहुजन समाज से कब होंगे ?
2. एससी/एसटी को हज़ारो सालो से पढ़ने का अधिकार नहीं मिला, लेकिन विकास भाई लाखो रुपये फीस लेकर मलाई कमाने पर क्यो ध्यान दे रहे ?
क्या एससी/ एसटी की शिक्षा फ्री नहीं हो सकती ?
विकास भाई, अपने कोचिंग में ये नियम जल्दी लागू करो। 🤷🏻♂️
@narendramodi देश आपको कभी माफ नहीं करेगा कि कैसे आपने एक शांति पूर्ण प्रदर्शन को बदनाम करने की साजिश की पत्थर भरे ट्���क प्रोटेस्ट साइट पर भिजवाये और छात्रों पर गोले और लाठियां बरसाई। थूकता है भारत ... आपकी ओछी और गंदी राजनीति पर जिसने देश के बच्चों को पाकिस्तानी करार दिया और राजनीति खेली.. थू
आरक्षण पर चर्चा किसी भी पार्टी को असहज करेगी, और अब वही करना पड़ेगा। पटरी उखाड़ कर आरक्षित हो जाना, सामाजिक न्याय नहीं, राजनैतिक गिरोहबाज़ी है। अब जबकि प्रताड़ित वर्ग इस पर लामबंद हो रहा है, तो सत्ता के चाटुकारों को समस्या होने लगी है कि ये 'मूर्खता' ��ै।
UGC, NEET, CBSE पर बोलना भी सबको मूर्खता और षड्यंत्र ही लग रहा था, फिर एक भीड़ आई, आप पर थूका और आपको चाटना पड़ा। अंततः, हुआ वही जो हम आपको बता रहे थे।
अब आरक्षण पर भी एक संगठित, सघन और गंभीर चर्चा होगी। इसके चक्कर में चुनावों पर असर पड़ना चाहिए कि क��न इन विषयों पर चर्चा से भाग रहे हैं, कौन इसे नकार रहे हैं, और कौन एक ही श्वास में 'विकसित भारत' और निजी क्षेत्र में आरक्षण ढूँढ रहे हैं।
अब मुझे यह मैटर नहीं करता कि कौन सत्ता में है और किसको होना चाहिए, मैंने पिछले 7 महीनों में जो देखा और फिर गत शनिवार को जो हुआ, उस से में आश्वस्त हूँ कि बिखरा हुआ, बिका हुआ नैरेटिव काम नहीं आता। सत्ता में रहने या निकाले जाने की चिंता राजनैतिक दलों को होनी चाहिए, आम ��ागरिक को नहीं।
आरक्षण की पूर्ण समाप्ति लक्ष्य है, जो की संविधान का भी लक्ष्य है, तो हम तो वही कर रहे हैं जो संविधान निर्माताओं ने सोचा था। ठीक है, समय सीमा नहीं थी, पर OBC आरक्षण भी तो नहीं था? उस समय के वंचित-पीड़ित-शोषित यदि आज भी वंचित-पीड़ित-शोषित ही हैं, तो इस पर सर्वेक्षण होना चाहिए कि तथाकथित सामाजिक न्याय तक पहुँचने के लिए कोई और मार्ग है क्या?
मेरा उद्देश्य प्रथम चरण में चर्चा का है, सरकार से इस पर संसद में आँकड़े रखवाने का है कि किस जाति समूह कि किन जातियों में कितनों को आरक्षण मिला, उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति क्या है, उन्हीं जाति समूहों में कौन ऐसे लोग हैं जो अभी तक घिसट कर जीने को विवश हैं?
सामान्य वर्ग के लोगों में कितने लोग आर्थिक रूप से विपन्न हैं, उनके लिए सरकार की क्या नीतियाँ हैं, उन्हें फॉर्म भरने से ले कर हॉस्टल और कोर्स की फीस में छूट क्यों नहीं है? यदि आरक्षण EWS से दिया है तो यह इतना घटिया रूप में क्यों है कि निर्धन सामान्य वर्ग का विद्यार्थी लोन चुकाने में ही जवानी खपा देता है?
इसके बाद, हर राजनैतिक व्यक्ति को, दल को हम चुनावों के समय पूछेंगे कि उन्हें सामान्य वर्ग वोट क्यों दे? उनका मेरिट को ले कर क्या स्टैंड है, विकसित भारत में मेरिट की कितनी जगह है और शिक्षा व्यवस्था में आरक्षण के कारण राष्ट्र को कब तक नकारात्मक दिशा में ले जाया जाता रहेगा?
यही आरम्भ है, और यदि आवश्यकता पड़ी तो हम और भी विकल्प देखेंगे। हमें इस से अब मतलब नहीं है कि कौन आ जाएगा तो क्या हो जाएगा, उसका लोड वो लें जिनकी विधायकी और सांसदी जाएगी। हमें अपने बच्चों और इस समाज की चिंता हैं। हम बस अपने हिस्से की चिंता कर रहे हैं।
महोदय .@police_haryana@NayabSainiBJP
इस व्यक्ति का नाम विजेता दहिया है ये व्यक्ति भगवान श्री राम प्रेमानंद जी महाराज और ब्राह्मण समाज पर पिछले कई दिनों से लगातार सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणियां कर रहा है। कृपया इसपर जल्द से जल्द कार्यवाही करें।
20 जुलाई को हुए कॉकरोच जनता पार्टी के संसद चलो मार्च पर चप्पल पहनकर, बिना वर्दी के एक व्यक्ति प्रदर्शनकारियों पर डंडे भांज रहा था.
लल्लनटॉप के पत्रकार अभिलाष ने सवा��� किया तो केवल सवाल पूछने की वजह से ही रिपोर्टर को लाठी मार दी गई.
इसके बाद पुलिस ने भी लाठी मारने वाले का बचाव किया और बदतमीज़ी करते हुए माइक जमीन पर फेंक दिया.
@DelhiPolice
CJP | Delhi Police | Reporter
@alokrajRSSB सर चतुर्थ श्रेणी में वेटिंग का क्या सीन है, क्योंकि हम वो थोड़ा किनारा गैंग वाले जनरल से फाइनल कट ऑफ में 3 no. कम पड़ रहे , आपकी जानकारी अनुसार बताना जरूर सर @alokrajRSSB
@alokrajRSSB@alokrajRSSB सर इन विषयों को किन स्रोत से पढ़ा जाए, कहाँ से डाटा लिए जाए ये भी साथ में बताए ताकि कोचिंग नोट्स के जाल में फंसने से छात्र बच सके और सही जानकारी के साथ इन विषयों पर अपनी समझ विकसित कर सके, अन्यथा भ्रमित छात्र नोट्स के मायाजाल में फ���सकर रह जाएगा।एक ��ोटी सी अपील है बस।
अंजना ओम कश्यप के खिलाफ FIR हुईं
- कोई रिजल्ट नहीं निकला
चित्रा त्रिपाठी के खिलाफ FIR हुईं
- कोई रिजल्ट नहीं निकला
सुधीर चौधरी के खिलाफ FIR हुईं
- कोई रिजल्ट नहीं निकला
अशोक श्रीवास्तव के खिलाफ FIR हुईं
- कोई रिजल्ट नहीं निकला
लेकिन अगर 6 जून को होने वाले धरने में शामिल होने आये युवाओं पर FIR हुईं तो?
इसका रिजल्ट ये निकलेगा
- पासपोर्ट बनने में समस्या आएगी
-विदेश जाने में समस्या आएगी
- एडमिशन लेने में समस्या आएगी
- नौकरी करने में समस्या आएगी
- माँ बाप जमानत करवाने के लिए परेशान होंगे
- सारी उम्र आपराधिक रिकॉर्ड रहेगा सो अलग
तो मेरे देश के युवाओं, इसके और बाकी इंस्टाग्राम वाले क्रन्तिकारी लोगों के झांसे में फंसकर अपना भविष्य मत बर्बाद ना करना.
विरोध करने के और भी ���रीके हैँ
जरूरी नहीं आप किसी के बहकावे में ही आकर विरोध करें..
इनका कुछ जाना नहीं.. ये तो विदेश भाग लेंगे
देश को नया अन्ना हज़ारे टाइप सतियापा नहीं चाहिए.. 🙏