अभिजीत दीपके को इस पत्रकार श्रेया अरोड़ा ने बुरी तरह धो डाला!!
श्रेया: आपकी डिमांड क्या है?
अभिजीत दीपके: अगर भारत में अच्छे सरकारी स्��ूल चाहिए तो सभी नेताओं और अफसरों के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ें!!
श्रेया: आप बोस्टन कब गए थे?
अभिजीत दीपके: 2023 में अपना मास्टर्स पूरा करने!!
श्रेया: दिल्ली से मास्टर्स क्यों नहीं किया?
अभिजीत दीपके: क्योंकि उस समय दिल्ली में अच्छे कॉलेज नहीं थे!!
श्रेया: मिस्टर अभिजीत, ये आपका 2022 का ट्वीट है जिसमें आपने अरविंद केजरीवाल के शासन में दिल्ली के वर्ल्ड क्लास स्कूल और कॉलेजों की तारीफ की है!! क्या आप झूठ बोल रहे थे?
अभिजीत दीपके: आप गोदी मीडिया हो, आप बच्चों के लिए अच्छे स्कूल नहीं चाहते। मैं आगे बात नहीं करना चाहता!!
श्रेया: मनीष सिसोदिया, अखिलेश यादव और कई अन्य विपक्षी नेताओं ने अपने बच्चों को विदेश भेजा है, उनके बारे में आप क्यों नहीं बात कर रहे?
अभिजीत दीपके: देखिए आज मेरी सेहत ठीक नहीं है, मैं टाइफाइड से रिकवर हो रहा हूँ। विपक्षी बच्चों का डेटा मेरे पास नहीं है। बाद में चर्चा के लिए जुड़ूँगा!!
श्रेया: लेकिन लेकिन लेकिन अभिजीत!!
और अभिजीत शो से भाग निकले!
मैं Ludhiana Jn से Varanasi Jn तक यात्रा कर रहा हूँ। मेरा टिकट RAC/S7/31 है
कोच में 3 बर्थ खाली थीं। मैंने ड्यूटी पर मौजूद TTE से अपनी RAC ���ीट confirm करने का अनुरोध किया, लेकिन उन्होंने “देखते हैं” कहकर टाल दिया। इसके बाद Waiting List यात्रियों से फाइन/किराया लेकर खाली बर्थ allot किए जाने की जानकारी मिली।
जब RAC यात्री मौजूद है और बर्थ उपलब्ध हैं, तो उसे प्राथमिकता क्यों नहीं दी गई? कृपया TTE की berth allotment एवं संबंधित records/receipts की जांच कर उचित कार्रवाई कर���ं।
Train: 14624 S G VARANASI EXP
PNR: 2361133085
Coach/Seat: S7/31 (RAC)
Route: Ludhiana Jn → Varanasi Jn
@RailwaySeva @IRCTCofficial @RailMinIndia @RailwayNorthern
@jagograhakjago
जिस PNC Infra Ltd मैं #कानपुर#लखनऊ एक्सप्रेसवे में घटिया काम किया, उसे 20 दिन पहले ही उत्तर प्रदेश में ₹3,500 करोड़ के नेशनल हाईवे का नया ठेका मिला है
यही वह कंपनी है जिसके निदेशकों और #NHAI के कुछ अधिकारियों के खि���ाफ 2024 में #CBI ने रिश्वत देकर ठेके हासिल करने के आरोपों में मामला दर्ज किया था।
इसी कंपनी पर अवैध खनन के मामले में ₹104 करोड़ का जुर्माना भी लगाया जा चुका है।
कंपनी के प्रमुख शेयरधारकों में #भाजपा के राज्यसभा सांसद नवीन जैन का नाम है। वह कंपनी के व्होल टाइम डायरेक्टर भी रह चुके हैं, फिलहाल कंपनी उनके भाई संचालित करते हैं
इतने विवादों के बावजूद बार-बार बड़े सरकारी ठेके मिलना कई गंभीर सवाल ��ड़े करता है।
जयपुर में UGC को लेकर हुए प्रदर्शन में घायल देवराज सिंह की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई! खुद को जब गाली पड़ी तो रात को 12 बजे 4 रील डाल दि यहाँ लोग मर रहे हैं और आवाज़ तक ना निकलेगी। समय की बात है, तू भी इंतज़ार कर, हम भी कर रहे हैं
@narendramodi#UGCRegulation2026
जरा गौर से देखिए..
शांति से चल रहे मार्च पर लाठीचार्ज कैसे हुआ...
एक जातिवादी कीड़ा BL मीणा (3 स्टार) नाम का पुलिस वाला....
सभी साथी इस वीडियो को ज्यादा से ज्यादा फैला दो... इस जातिवादी कीड़े का इलाज जरूरी है...
#UGC_काला_कानून_वापस_लो
कल लाठी चार्ज कैसे हुआ ? आप गौर से देखें। UGC का विरोध संयमित व अनुशासन के साथ संवैधानिक तरीके से रैली निकाले जा रहे थे। पुलिस प्रशासन ने बिना वजह लाठी चार्ज कर दिया। पुलिस प्रशाशन सवंम हिंसा करना चाहती है। भजनलाल शर्मा अब पुलिस वालों पर करवाही करेंगे?
@RajCMO#UGCRollBack
मैं खुद इस प्रोटेस्ट में शामिल था.. रैली की अनुमति थी.. एकदम शांतिपूर्ण रैली निकल रही थी..
पुलिस वालो ने 4 जगह बैरिकेट्स लगाए.. एक ���गह महिलाओं पर वाटर कैनन चलाए..
फिर महिलाओं,बच्चों पर लाठीचार्ज किया.. महिलाओं के कपड़े फट गई,लड़कों के सिर फोड़ दिए..
BL मीणा(3 स्टार) के कहने पर..
इस वीडियो को ध्यान से देखिए ..अनुमति के अनुसार युवक मार्च निकाल रहे थे कोई भड़काऊ नारा नहीं लेकिन फिर भी राजस्थान पुलिस का एक अधिकारी अपनी मंडली को को बोलता है कि
“दौड़ कर आओ रे” ��सके बाद लाठीचार्ज शुरू कर दिया जाता है जिसमे कई युवकों को चोटें आई
बीजेपी का साफ़ फ़ंडा है पहले प्रदर्शन और मार्च की अनुमति दो उसके बाद बिना बात के लाठीचार्ज कर दो जिससे भीड़ उकसेगी …फिर आंदोलन करने वालो को दंगाई,अराजक तत्व और गद्दार की संज्ञा दे दो …बस हो गया आंदोलन कमजोर
गाली देना गलत है, इसमें दो राय नहीं।
हर बार हम लक्षण का इलाज करते हैं, बीमारी का नहीं। कोई युवा गाली दे दे तो FIR कर दो |लेकिन ये कभी पूछा कि उसकी भाषा ऐसी बनी कैसे?
पिछले 10–15 साल में हमने उसे क्या दिखाया? OTT पर गाली-गलौज, फिल्मों मे�� vulgarity, सोशल मीडिया पर trolling , नेताओं की प्रेस कॉन्फ्रेंस, टीवी डिबेट्स में चीख-पुकार, it cell की भाषा....
मुन्ना भैया की गालियाँ 'डायलॉग' , gangs of वासेपुर के किरदारों की गालियाँ डायलॉग - लेकिन वही भाषा अगर कोई 20 साल का युवा बोल दे, तो अचानक पूरी Gen Z असभ्य ?
सवाल यही है कि भाषा का माहौल बनाया किसने?
हम मूल कारण को नहीं समझ रहे हैं, घटिया web series, घटिया फिल्में, घटिया reels shorts , क्या सिखा रही हैं बच्चों को? और उन बच्चों से उम्मीद- बहुत अलग है हमारी |
और सबसे बड़ा सवाल- भाषा की मर्यादा तय करेगा कौन? जहाँ सांसद किसी को 'गटरछाप', 'परजीवी', 'पप्पू', 'गद्दार', 'टुकड़े-टुकड़े' जैसे शब्द कह रहे हो |
हमने एक ऐसी डिजिटल दुनिया बना दी है, जहाँ 27M युवा रोज़ 10–11 घंटे बिता रहे हैं और उस दुनिया में सबसे ज़्यादा दिखने वाली चीज़ गाली-गलौज, नफ़रत, अश्लीलता, ट्रोलिंग और सनसनी है। फिर सिर्फ़ युवाओं से आदर्श व्यवहार की उम्मीद करना पूरी तरह गलत है।
Hypocrisy की भी एक सीमा होती है।
वो झुका था शाहीन बाग में, तब मरे थे तिरपन
किसान आंदोलन में फिर झुका, छाती थी छप्पन
फर्जी आंदोलन के नल्लों ने लाया घुटनों पर इस बार
अबकी बार मोदी सरकार, अबकी बार मोदी सरकार
प्रधान ने त्यागपत्र दे दिया है। अब कॉकरोच क्या करेंगे? राहुल गाँधी अब कह रहा है कि कैबिनेट से ही हटा दो। फिर अब नई माँग हैं कि कमिश्नर माफी माँगे और पुलिस पर ही FIR की जाए।
साथ ही, हर दंगाई पर किया FIR निरस्त किया जाए चाहे व��� प्रोटेस्टर छात्र थे या नहीं।
यह तमाचा जरूरी था सरकार के लिए। मुझे प्रसन्नता होनी चाहिए क्योंकि मैं सात महीने से शिक्षा मंत्रालय की बर्बादी पर लिख और बोल रहा था। पर मैं दुखी हूँ कि दंगाइयों के सामने सरकार कायरता से बिछ गई। फिर भी, परिस्थितियों के आलोक में अभिमान को पीछे रख कर समाज के हित में ही निर्णय है।
जब सरकार पुलिस का काम भी स्वयं करती है, तो यही सब होता है। मुझे याद है कि 19 दिसंबर 2019 को जामिया नगर का दंगा @DelhiPolice मे बंद करा लिया था, पूरा क्षेत्र खाली था। सरकार ने फिर अगले दिन उन्हें बैठने पर छोड़ दिया ताकि दिल्ली चुनाव में लाभ लिया जा सके।
इन सबमें एक बात और है। @RSSorg और @BJP4India के सौ से अधिक संगठन हैं, वीसी बनाए हैं, कला-वि��्ञान की संस्थाएँ हैं जिसमें इन्होंने चेयरमैन बनाए हैं, वो हरामखोर कहाँ हैं? किसी ने एक लेख भी लिखा सरकार या विद्यार्थियों के पक्ष में?
वास्तविकता यह है कि आज की डेट में इस सरकार के पास न तो कोई संस्था है, न व्यक्ति। मोदी और शाह हर कार्य नहीं कर सकते। संस्थाएँ इसी दिन काम में आती हैं। अब आइटी सेल, चाटुकार गिनें कि कितने व्यू आ रहे हैं।
यह आरंभ है। जिस दिन पचास और सौ लोग थे जंतर मंतर पर, दिल्ली पु���िस के दो थाने और तीन बसें काफी थीं। आपने राम मंदिर की गर्मी से बचने के लिए उसे चलने दिया। पीएम के सलाहकारों पर यह प्रश्नचिह्न है कि वो स्थिति को समझ क्यों नहीं पाए?
सरकार को क्या सच में लगता है इथेनॉल का विषय दब जाएगा? राम मंदिर पर चर्चा नहीं होगी? सब होगी, समय
से होगी। जैसे कि शिक्षा पर चर्चा सात महीने से हो रही थी, लेकिन समय पर बवाल हुआ, जिसने भी किया।
राम मंदिर, इथेनॉल भी लौटेगा। यह यहाँ नहीं रुकेगा। सरकारी नकारेपन पर हर पार्टी रोटी सेंकेगी। मेरा दुख यह है कि अमृतकाल में त्यागपत्र दिया गया।
जबतक इस कर्मचारी को @RailwaySeva सस्पेंड नहीं करती तबतक Video को शेयर करें।
पटना जंक्शन पर इंक्वायरी काउंटर का बाबू सफेद कमीज़ में कुर्सी पर लेटा हुआ, माइक सामने है, यात्री खड़े हैं, और ये आराम से सुस्की ले रहा है।
चोर को आया हार्ट अटैक
बेंगलुरु के कब्बनपेट में मोबाइल छीनने की कोशिश तब नाकाम हो गई, जब एक मज़दूर ने स्कूटर पर सवार चोरों पर बोरी फेंक दी। भागते समय दिल की बीमारी के कारण एक संदिग्ध, ज���नैद (18) की मौत हो गई; उसके साथी अरबाज़ (23) को गिरफ़्तार कर लिया गया।
#MobileTheft #CCTV #Bengaluru | #ZeeNews
कुछ चादरमोरों को लगता है की भरत तिवारी को लोग ब्राम्हण होने के लिए साथ दे रहे हैं तो सुन बे चादरमोर, लहन के बौरे
भरत भूषण तिवारी जिसके के लिए शासन प्रशासन से लड़ते लड़ते शहीद हो गए वो लोग पिछड़े और दलित समाज से थे, उन लोगों का कहना है की भरत तिवारी उनके लिए भगवान थे क्योंकि
भरत तिवारी के कारण उनके घरों तक बिजली आई,
भरत तिवारी के कारण उनको चलने के लिए सड़क मिला,
और उन्होंने अब वहां ���िट्टी डलवाने के लिए SDM को पत्र लिखा और बोला तो SDM अपना Ego पर ले लिया और सब मिलकर उनकी हत्या कर दिया
सुनो ये चाचा पासवान जाति के हैं और इनकी आंसू देख
जेबकतरों से सावधान - आज वो CBSE के अंदर बैठे हैं। CBSE की गलती से नंबर ग़लत ��ए तो आपको क्या मिलता है?
एक bill:
Digital scan copy: ₹100/विषय
Re-totalling: ₹100/paper
Re-evaluation: ₹25/सवाल
��पनी ही answer sheet की सही जाँच के लिए एक बच्चे को ₹2000 तक भरने पड़ सकते हैं।
सोचिए, जब 4 लाख बच्चों ने ऐसे आवेदन डालें हैं तो CBSE कितनी कमाई कर रहा है।
जब scanning फ़ोन से हुई हो, ग़लत मार्किंग तय है। और उसे ठीक करवाने की क़ीमत बच्चा भर रहा है।
गलती CBSE की। सज़ा बच्चे की। कमाई सरकार की।
जब शिक्षा को सेवा नहीं, कारोबार बना दिया जाए तब गलती सुधारी नहीं जाती। बढ़ाई जाती है। और इसकी सबसे बड़ी क़ीमत हमारे बच्चे चुका ��हे हैं - अपने समय से, अपने आत्मविश्वास से, और अपने भविष्य से।
पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल केस की कहानी बच्ची के एक रिश्तेदार से मेरी बातचीत के आधार पर...
●पहली जानकारी
शंभू गर्ल्स हॉस्टल की मालकिन नीलम अग्रवाल,नीलम अग्रवाल का पति शंभू अग्रवाल का निधन हो चुका है,नीलम अग्रवाल का दो बेटा,श्रवण और अंशु।
जिस बिल्डिंग में शंभू गर्ल्स हॉस्टल चल रहा है उस बिल्डिंग का मालिक मनीष रंजन(सांसद पप्पू यादव ने कहा है कि मनीष रंजन पटना में सेक्स रैकेट बहुत पहले से चलाता आ रहा है)
मनीष रंजन खुद हॉस्टल में ही रहता है सबसे ऊपर के फ्लैट में अपने परिवार के साथ।
●दूसरी जानकारी
5 जनवरी को मृ���क छात्रा जहानाबाद से पटना शाम को हॉस्टल पहुंचती है,परिजन का कहना है कि 5 तारीख को रात 9 बजे बेटी से फोन पर बात हुई थी...फिर 6 जनवरी को शाम में परिजन को हॉस्टल संचालक/मकान मालिक/हॉस्टल स्टाफ के द्वारा नहीं बल्कि किसी दूसरे व्यक्ति ने परिजन को खबर दिया कि आपकी बेटी की तबीयत खराब है जो डॉ सहजानंद के हॉस्पिटल में भर्ती है,परिजन ने पटना में अपने ��क परिचित को फोन कर हॉस्पिटल भेजा,परिचित ने डॉ सहजानंद के हॉस्पिटल पहुंचा,डॉ सहजानंद का हॉस्पिटल...हॉस्टल के बगल में ही है,परिचित हॉस्पिटल पहुंचा तो वहां बच्ची बेहोश एडमिट थी,डॉ सहजानंद ने बच्ची को सेंट्रल हॉस्पिटल पटना रेफर किया,वहां पर साथ में हॉस्टल की एक केयर टेकर नीतू भी थी, सेंट्रल हॉस्पिटल न ले जाकर बच्ची को हॉस्टल के स्टॉफ नीतू ने प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल लेकर गयीं,साथ में वो परिचित ��ी था,6 तारीख के रात को 8 बजे के आस-पास बच्ची के परिजन प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल पहुंचतें हैं,6 जनवरी को ही रात में एक महिला SI परिजन से प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल में ही मिलती हैं और नंबर देती हैं कि कुछ भी शक हो तो फोन कीजिएगा।
●7 जनवरी के दिन बच्ची दिनभर प्रभात मेमोरियल में एडमिट रही,डॉक्टर ने 7 तारीख को नहीं बताया कि लड़की के साथ क्या-कुछ हुआ है,बस इलाज चल रहा था,बच्ची बेहोश थी,7 को बच्ची का वह रिश्ते��ार शंभू गर्ल्स हॉस्टल गया,वहां पर कुछ और छात्राएं थी,किसी ने भी उनसे बात नहीं की,हॉस्टल के जिस कमरे में बच्ची रहती थी वह कमरा साफ था,उसी दिन बच्ची के उस रिश्तेदार को एक वहां कि ��ात्रा ने फोन पर बताया कि वॉर्डन अंटी सीसीटीवी चेक कर रही हैं,कल रात को 10 बजे हॉस्टल में मेरी बात हुई थी।
●8जनवरी को प्रभात मेमोरियल का डॉ अभिषेक ने शाम को बताया कि बच्ची के साथ Physically कुछ हुआ है,चोट की निशानी है,Bleeding हुई है,परिजनों का कहना है कि 8 जनवरी को शाम 6 बजे बच्ची को होश आया था,उसकी मां मिली तो बच्ची तेज रोने लगी,बच्ची बोली कि गलत हुआ है,फिर डॉक्टर परिजन को बाहर कर दिया,8 जनवरी को बच्ची के वो रिश्तेदार फिर से हॉस्टल गये,वहां उस वक्त चंचला नाम की एक केयर टेकर थी,रिश्तेदार बच्ची के कमरे से कुछ सामान निकाला,साथ में कुछ पैसे भी करीब 11 हजार,कमरे का फर्श बिल्कुल साफ था लेकिन सामान बिखरा पड़ा था।
●9 जनवरी को परिजन ने उस नम्बर पर फोन किया,जो 6 जनवरी की रात को महिला SI ने दी थी,फिर कदमकुआं थाना से पुलिस आती है,बयान लेकर जाती है,फिर कदमकुआं थाना इस केस को चित्रगुप्त नगर थाना में भेजती है,फिर चित्रगुप्��� नगर थाना प्रभारी रोशनी कुमारी प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल पहुंचती है,रोशनी कुमारी परिजन का बयान/बच्ची की तस्वीर सबकुछ लेकर जाती है,��च्ची बेहोश रहती है,फिर 9 जनवरी के शाम को नीलम अग्रवाल प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल पहुंचती है,नीलम अग्रवाल खुद को हॉस्टल की मालकिन बताती है और कहती है कि हॉस्टल का नाम बदनाम हो जाएगा इसलिए केस को वापस ले लीजिए और मैनेज कर लीजिए,नीलम अग्रवाल से परिजन की बकझक होती है फिर बच्ची की रिश्तेदार चित्रगुप्त नगर थाना प्रभारी रोशनी कुमारी को फोन करते हैं,रोशनी कुमारी फोन पर बोलती हैं कि वहां पहुंच गई वो,रो���नी कुमारी तुरंत हॉस्पिटल पहुंचती है,रोशनी कुमारी और नीलम अग्रवाल में भी बकझक होती है,फिर साथ के एक महिला कांस्टेबल ने नीलम अग्रवाल को एक थप्पड़ मारती है और फिर नीलम अग्रवाल को थाना लेकर चली जाती है,और फिर परिजन को पता चलता है कि नीलम अग्रवाल को थाना से छोड़ दिया गया है,9 जनवरी को दिनभर-रातभर बच्ची बेहोश ही रहती है।
●10 जनवरी को परिजन बच्ची को इस अस्पताल से बाहर ले जाना चाहते थें,लेकिन प्रभात मेमोरियल के डॉ सतीश जाने नहीं दे रहा था,परिजन ICU में गयें,जहां डॉ सतीश के साथ बकझक हुई,धक्का-मुक्की भी हुई,परिजन बच्ची को 10 तारीख को ही 2-3 बजे के आस-पास मेदांता लेकर गयें,मेदांता में एडमिट लेने से पहले ही डॉक्टर ने कहा कि हम बच्ची को बचा नहीं सकते,बचने की संभावना सिर्फ 1 प्रतिशत है,फिर भी परिजन बच्ची को मेदांता में एडमिट कराते हैं।
●11 जनवरी को मेदांता ने बच्ची को 12:34 दोपहर में मृत घोषित कर दिया।
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