ये है इन नेताओ की असलियत…
भीड़ जुटाने के लिए लोगो को बेवक़ूफ़ बनाके और झूठे वादे दिखा कर बुला लिया जाता है
आख़िर में ये सब हो जाता है जो हर नेता आमजन के साथ करता है!
नई रेल की शुरुआत में मंत्री जी और सांसद को अंदर जाने दिया गया लेकिन एक बुजुर्ग को धक्का मारकर वहाँ से निकाल दिया जाता है
जिस जनता के टैक्स के पैसों से व्यवस्था चलती है उसी जनता के सा��� इस तरह का बर्ताव करना बेहद शर्मनाक और निंदनीय हरकते है
@AshwiniVaishnaw @LumbaramChoudh4
#Jaipur: किसको दर्द सुनाए अ��ना..?
शिक्षक भर्ती लेवल प्रथम और द्वितीय से जुड़े अभ्यर्थियों की दास्तान
भर्ती परीक्षा में 11 प्रश्न डिलीट होने से हजारों अभ्यर्थियों का परिणाम प्रभावित,लेकिन बोर्ड और परिजनों की नजरों में प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए यह मात्र एक बहाना,उधर..
#RajasthanWithFirstIndia #Jaipur @RajGovOfficial @DineshKasana15
जूनियर अकाउंटेंट भर्ती 2023 में 150 में से 14 प्रश्न डिलीट हुए थे। तब बोर्ड अध्यक्ष ने कहा था कि भविष्य में ऐसी गलतियाँ नहीं होंगी और व्यवस्था में सुधार किया जाएगा।
लेकिन 2026 में भी वही हाल है। REET में दर्जनों प्रश्न डिलीट करने पड़ रहे हैं।
आखिर तीन साल में सुधार कहाँ हुआ?
अगर हर भर्ती में प्रश्न हटाने ही हैं, तो अभ्यर्थी तैयारी किस आधार पर करें?
लाखों युवाओं क��� भविष्य से जुड़े पेपरों में बार-बार होने वाली ये गलतियाँ केवल "मानवीय भूल" नहीं, बल्कि परीक्षा प्रणाली की गंभीर विफलता हैं।
अध्यापक भर्ती परीक्षा के परिणामों के साथ एक गंभीर सवाल भी खड़ा हो गया है।
लेवल-1 और लेवल-2 में कुल मिलाकर लगभग 36 प्रश्न डिलीट किए गए। यानी प्रश्नपत्र का करीब 10% हिस्सा मूल्यांकन से बाहर कर दिया गया।
जब अभ्यर्थी से अपेक्षा की जाती है कि वह पाठ्यक्रम का हर विषय पूरी तैयारी के साथ पढ़े, तो प्रश्न निर्माण और सत्यापन की जिम्मेदारी निभाने वाली व्यवस्था से वही अपेक्षा क्यों नहीं?
एक अभ्यर्थी की छोटी सी गलती उसके चयन और असफलता के बीच अंतर बन सकती है, लेकिन दर्जनों गलत प्रश्नों की जवाबदेही किसकी है?
प्रश्न डिलीट करना समाधान नहीं, बल्कि यह स्वी��ार करना है कि प्रश्नपत्र निर्माण में गंभीर त्रुटियां हुईं। यदि ऐसी स्थिति बार-बार बन रही है तो सुधार की आवश्यकता अभ्यर्थियों में नहीं, व्यवस्था में है।
भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता केवल परिणाम जारी करने से नहीं, बल्कि त्रुटिरहित प्रक्रिया से बनती है।
कितने विद्यार्थियो का समय व पैसा बर्बाद हुआ होगा?
कोई इन्ही प्रश्न के सही होने से नॉकरी से चूक गया
ऐसे हजारों विद्यार्थी हैं।
सब इंस्��ाग्राम व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपने दुख रो रहे हैं
@alokrajRSSB
@alokrajRSSB आपके ये कहने से क्या होगा जो नुकसान हुआ उसका क्या 11 प्रशन जिनके सही थे उनकी क्या हालत होती होगी
पहले पेपर गलत बनाया
फिर आपत्ति के नाम पर भी लूटा
और बाद में प्रशन डिलीट कर दिया
सबसे पहले आपको इस्तीफा देना चाहिए
यदि आप यह मानते हैं कि प्रतियोगी परीक्षाओं में केवल मेहनत ही सफलता का निर्धारण करती है, तो मुझे लगता है कि यह पूरी सच्चाई नहीं है।
राजस्थान में विशेष रूप से कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा आयोजित कई परीक्षाओं में अक्सर 10 12 तक प्रश्न बाद में डिलीट कर दिए जाते हैं। यह केवल एक तकनीकी त्रुटि नहीं, बल्कि हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है। सवाल यह है कि यदि वे प्रश्न गलत थे, तो उन्हें प्रश्नपत्र में शामिल ही क्यों किया गया? और यदि शामिल किए गए, तो प्रारंभ में उन्हें सही मानकर परीक्षा का हिस्सा क्यों बनाया गय��?
जब अभ्यर्थी आपत्तियाँ दर्ज कराते हैं, तब उन प्रश्नों को हटा दिया जाता है। लेकिन इस प्रक्रिया का सबसे बड़ा नुकसान उन विद्यार्थियों को होता है जिन्होंने उन प्रश्नों के सही उत्तर दिए थे। एक गलत प्रश्न-निर्माण की कीमत वे बच्चे चुकाते हैं, जिन्होंने पूरी ईमानदारी और मेहनत से तैयारी की थी।
कई बार यही डिलीट हुए प्रश्न किसी अभ्यर्थी को चयन सूची से बाहर कर देते हैं। यह केवल अंक खोने की बात नहीं होती, बल्कि उसके आत्मविश्वास, उसके सपनों और उसके वर्षों की मेहनत पर भी गहरा प्रभाव डालती है। जो अभ्यर्थी इस पीड़ा से गुज़रा है, वही समझ सकता है कि अंतिम चयन से कुछ अंकों से बाहर हो जाना कितना दर्द देता है।
आख़िर आयोग की गलती ईमानदार बच्चा क्यों भुगते
डॉ धीर सिंह धाभाई
#rsmmb #thirdgradeteacher #result
Presenting #TeamIndia's newest T20I captain 🇮🇳
Congratulations to Shreyas Iyer as he takes the helm in the shortest format of the game 👏
@ShreyasIyer15
मारवाड़ में शिक्षा की ज्योति से अनवरत प्रकाश फैलाने वाले, आदर्श शिक्षाविद् और प्रेरणा प्रतीक आदरणीय गुरुवर श्री कमल सिंह जी महेचा को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ।
परमपिता परमेश्वर से आपके उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु जीवन की कामना करता हूँ।
बाड़मेर में गिरल लिग्नाइट माइंस के मजदूरों का 38 दि��� से धरना प्रदर्शन जारी है। शिव विधायक श्री @RavindraBhati__ भी 15 दिन से इन मजदूरों के साथ बैठे हैं परन्तु न तो सरकार ने कोई वार्ता की और न ही प्रशासन ने ध्यान दिया। इस उदासीनता के कारण वे मजदूरों के साथ कलेक्ट्रेट कूच करने एवं अपने ऊपर पेट्रोल उड़ेलने तक को मजबूर हुए।
भाजपा के शासन में एक विधायक को अपनी मांगों पर ध्यानाकर्षण के लिए ऐसा कदम उठाना पड़ रहा है तो आम आदमी की स्थिति की कल्पना की जा सकती है। राज्य सरकार को अविलंब इनकी मांगों पर ध्यान देकर सकारात्मक हल निकालना चाहिए।
बाड़मेर के शिव क्षेत्र में मजदूरों के हक और अधिकारों की लड़ाई को लेकर गिरल लिग्नाइट माइंस में पिछले 38 दिनों से धरना जारी है,लेकिन राजस्थान सरकार अब तक पूरी तरह मौन बनी हुई है।पिछले 15 दिनों से शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी स्वयं मजदूरों के समर्थन में धरने पर बैठे रहे।
यह प्रदेश सरकार की घोर विफलता है कि मजदूरों और जनप्रतिनिधियों की आवाज़ को लगातार अनदेखा किया गया,जिसके चलते एक निर्वाचित विधायक को पेट्रोल छिड़ककर आत्मदाह का प्रयास करना पड़ा।यदि सरकार अब भी नहीं जागी,तो यह केवल प्रशासनिक असफलता नहीं,बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों पर गंभीर आघात माना जाएगा।
@RavindraBhati__
दौरा स्थगित…!!
करोड़ों रुपये लगे…
लाख लोगों के आने की व्यवस्था की गई…
हज़ारों लोगों को तैयारियों पर लगाया गया…
लेकिन छोटी सी लापरवाही ने आग लगाई…
और सब कुछ ख़त्म हो गया…!!!
अब कुछ महीने बाद फिर से सारी तैयारियाँ होगी…
दोबारा सारे पैसे खर्च हों���े…
इतनी बड़ी चूक का ज़िम्मेदार कौन…??