डॉक्टर्स का बड़ा हाथ है। अब सरकार को चाहिए़ डॉक्टर को नॉर्मल डिलीवरी के लिए पाबंद करें बहुत जरूरी होने पर ही सिजेरियन पर जाएं। दूसरा सरकार जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए और अपनी व्यवस्थाओं को दुरुस्त करें ताकि जच्चा और बच्चा स्वस्थ रहें मस्त रहें।
धन्यवाद 🙏
ये सही भी हो स��ता हैं। कड़वी बात है लेकिन सच्चाई भी सिजेरियन डिलीवरी करवाने की दो धारणा वर्तमान में ज्यादा प्रचलित हैं
एक की दर्द कम होगा
दूसरा बाद में मजा ज्यादा आयेगा समझ रहे हो
लेकिन एक सच्चाई ये भी है डॉक्टर आजकल कमाई के लिए सिजेरियन विकल्प की ओर जा रहे। इन धारणाओं में
100% सही बात है मंत्री जी की
लेकिन आजकल के माहौल में यह विवादित बयान की श्रेण��� में ही आएगी। नहीं आएगी तो जबरन ले आया जाएगा। आप सरकारी और निजी अस्पतालों के आंकड़े उठाकर देख लीजिए। सरकारी अस्पतालों में आने वाली महिलाओं के फिर भी एक हद तक नॉर्मल डिलीवरी करवाई जाती है लेकिन निजी अस्पतालों में सिजेरियन डिलीवरी का प्रतिशत बहुत ऊंचा है।
दर्द सहन नहीं कर��े के अलावा सिजेरियन डिलीवरी के पीछे आर्थिक पहलू भी होते हैं। निजी अस्पतालों में लंबे बल बनाने के लिए भी सिजेरियन डिलीवरी प्राथमिकता पर की जाती है। कुछ सिजेरियन डिलीवरी मुहूर्त के हिसाब से भी तय की जाती है। लेकिन आप किसी भी महिला विशेषज्ञ चिकित्सक (किसी भी पैथी की) से पूछ लीजिए, सिजेरियन डिलीवरी महिलाओं की सेहत के लिए हर हाल में घातक ही बताई जाएगी।
सिजेरियन डिलीवरी में जो प्रसव पीड़ा है, वह ���रूर कम हो जाती है लेकिन उसके बाद जीवन भर अनेक समस्याएं बनी रहती हैं। मंत्री जी के अनेक बयान विवादित और गैर जरूरी होते हैं। लेकिन यह बात बहुत सही है। जरूरी यह है कि महिलाओं को नॉर्मल डिलीवरी के लिए कैसे प्रेरित किया जाए और अस्पतालों को ज्यादा से ज्यादा नॉर्मल डिलीवरी करवाने के लिए कैसे तैयार किया जाए, इसकी कार्य योजना बनाई जानी चाहिए।
अब ये घपले नहीं रुकने वाले क्योंकि सजा होती ही नहीं हैं,डर है ही नहीं। और जब तक सजा बड़ी नहीं होगी, कानून सही से काम नहीं करेगा। बच्चों का भविष्य ऐसे ही चोर लूटते रहेंगे
“40₹ पाकिस्तान से आए तो मेट्रो लिया
20₹ अमेरिका से एक तो रिक्शा लिया…”
��्या ज़बरदस्त जवाब है!
इस जवाब को सुनने के बाद तो उन नामुरादों को अपना चेहरा रेत में गोत लेना चाहिए जो किसी भी असंतोष और प्रदर्शन के पीछे विदेशी फंडिंग देखते हैं
VC @Nher_who
"चंपत राय चोर नही हो सकता। चोर होता तो विश्वस्त नहीं होता। विश्वस्त लोग अपने लिए चोरी नहीं करते, अपने आका के लिए चोरी करते हैं। जिन्होंने उनको वहां बैठाया, वे कौन हैं? चंपत राय ने जो किया होगा, उनके लिए किया होगा।"
- शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती
किस कंपनी का AC फटा ये सबसे अहम सवाल हैं। क्या AC में कमी हो सकत��� क्या लोगों के घरों में ऐसी मौतें खुल्ले आम बेची जा रही हैं। उस कंपनी की ac की भी जांच हो। दूसरा प्रशासन और नेताओं का का काम ही घटना होने के बाद रोना। ये भारत में नया कुछ भी नहीं है।
दुखद खबर
लखनऊ के कोचिंग सेंटर लर्निंग स्पेस में आग से 15 स्टूडेंट्स की मौत हो गई है। इनमें तीन छात्राएं और 12 छात्र बताए जा रहे हैं।
अब क्या होगा?
अब वो सारी बात���ं सामने आएंगी कि वहां क्या क्या कमियां थीं।
किसी सरकारी विभाग में लंबे समय से निरीक्षण नहीं किया था।
फलां फलां तरह की परमिशन नहीं ली गई थी।
प्रधानमंत्री से लेकर क्षेत्र के पार्षद तक शोक जताएंगे
अखबार और टीवी वाले बेहद ही मार्मिक तरीके से इस खबर को प्रकाशित और प्रसारित क��ेंगे।
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री राहत कोष से मुआवजे की घोषणा की जाएगी।
कुछ लोग राजनीतिक रोटियां सेंक लेंगे।
फिर कुछ दिन बाद दुनिया पहले की तरह चलने लग जाएगी।
जिंदगी भर की पीड़ा मृतक छात्र-छात्राओं के परिवार भोगेंगे।
है मेरे भगवान क्या होगा हमारे प्यारे राजस्थान का। कैसे नेता हैं। शर्म कुछ बची नहीं। कुछ दिन पहले प्रसूता नाचते हुए आई थी। अब दर्द सहन नहीं होता इसीलिए सिजेरियन डिलीवरी करवाती हैं ऐसा ब��ान वो ही लोग दे सकते हैं जिनको लगता हैं अब हम ही भगवान हैं। हमने कह दिया वही सही। https://t.co/DdhYaMhH3P
पहले तो आप आरोप लगाने वालों की संपत्ति जब्त, फांसी,आजीवन कारावास आदि की मांग कर रहे थे। अब चोरों की संपति जब्त, नागरिकता की मांग कर रहे हैं। लेकिन आपने फां���ी आजीवन कारावास की मांग नहीं की। और आप पलट कैसे गए।
शायद आपको लगा होगा आरोप झूठे है फ़िर पता चला होगा ये आरोप सही हैं।🤔
अ��ोध्या के राम मन्दिर में पहले रोज 12-13 लाख रुपये दान पेटियों से निकलते थे, जब से दान चोरी का मामला आया, तब से एक लाख रुपये भी नही निकल रहे। जबकि रोज 1 लाख से ज्यादा लोग दर्शन कर रहे हैं। अब श्रद्धालु दान देने से बच रहे, उनके विश्वास को गहरा धक्का लगा है।
इस देश में पेपर लीक की समस्या तो हइये है लेकिन सबसे बड़ी समस्या है पूरे एजुकेशन सिस्टम में नेताओं का घुस जाना।
हर पार्टी के नेता स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी खोले बैठे हैं। जिनको सरकारी एजुकेशन सिस्टम ठीक करना था वो अपना स्कूल/कॉलेज खोलकर कमाई कर रहे है��। देखिए क्या हाल हो रखा है।