#કબીરસાહેબનું_તત્વજ્ઞાન
ભગવાન કબીરે પોતે કહ્યું છે કે એક એકવીસ બ્રહ્માંડનું ક્ષેત્ર બ્રહ્મ નો લોક છે,બીજો પરબ્રહ્મ નો લોક છે,જે સાત સાંખ બ્રહ્માંડનું ક્ષેત્ર છે,ત્રીજું છે પૂર્ણ બ્રહ્મ,કબીર ��રમેશ્વરનું નિજધામ એટલે કે સતલોક છે જે પૂર્ણ મોક્ષનું સ્થાન છે
Kabir Prakat Diwas 14 June
अध्याय 11 श्लोक 32 में पवित्र गीता बोलने वाला प्रभु कह रहा है कि ‘अर्जुन मैं बढ़ा हुआ काल हूँ। अब सर्व लोकों को खाने के लिए प्रकट हुआ हूँ।‘#भगवदगीता_के_गूढ़_रहस्य
गीता अध्याय 15 श्लोक 1
गीता का ज्ञान सुनाने वाले प्रभु काल ने कहा कि ऊपर को पूर्ण परमात्मा आदि पुर��ष परमेश्वर रूपी जड़ वाला नीचे को शाखा वाला अविनाशी विस्त्तारित, पीपल का वृक्ष रूप संसार है जिसके
छोटे-छोटे हिस्से या टहनियाँ पत्ते कहे हैं #भगवदगीता_के_गूढ़_रहस्य
गीता अध्याय 15 के श्लोक 4 में कहा है कि उस तत्वदर्शी संत के मिल जा��े के पश्चात् उस परमेश्वर के परम पद की खोज करनी चाहिए अर्थात् उस तत्वदर्शी संत के बताए अनुसार साधना करनी चाहिए जिससे पूर्ण मोक्ष(अनादि मोक्ष) प्राप्त होता है। गीता ज्ञान दाता ने कहा है
#भगवदगीता_के_गूढ़_रहस्य
गीता अध्याय 3 श्लो�� 14 से 15 में भी स्पष्ट है कि ब्रह्म काल की उत्पत्ति परम अक्षर पुरूष से हुई वही परम अक्षर ब्रह्म ही यज्ञों में पूज्य है। #भगवदगीता_के_गूढ़_रहस्य
गीता सार
वास्तविक भक्ति विधि के लिए गीता ज्ञान दाता प्रभु काल ब्रह्म किसी तत्वदर्शी की खोज करने को कहता है (गीता अध्याय 4 श्लोक 34) इस से सिद्ध है गीता ज्ञान दाता (ब्रह्म) द्वारा बताई गई भक्ति विधि पूर्ण नहीं ह��।#भगवदगीता_के_गूढ़_रहस्य
गीता अध्याय 15 श्लोक 1
गीता का ज्ञान सुनाने वाले प्रभु काल ने कहा कि ऊपर को पूर्ण परमात्मा आदि पुरुष परमेश्वर रूपी जड़ वाला नीचे को शाखा वाला अविनाशी विस्त्तारित, पीपल का वृक्ष रूप संसार है जिसके
छोटे-छोटे हिस्से या टहनियाँ पत्ते कहे है
#भगवदगीता_के_गूढ़_रहस्य
📙पवित्र गीता जी को बोलने वाला काल (ब्रह्म-ज्योति निरंजन) है, न कि श्री कृष्ण जी। क्योंकि श्री कृष्ण जी ने पहले कभी नहीं कहा कि मैं काल हूँ त��ा बाद में कभी नहीं कहा कि मैं काल हूँ।#भगवदगीता_के_गूढ़_रहस्य
📙गीता अध्याय 15 श्लोक 17 में काल ने कहा है कि वास्तव में अविनाशी परमात्मा तो इन दोनों (क्षर पुरूष तथा अक्षर पुरूष) से दूसरा ही है वही तीनों लोकों में प्रवेश करके सर्व का धार�� पोषण करता है वही वास्तव में परमात्मा कहा जाता है।#भगवदगीता_के_गूढ़_रहस्य
📙पवित्र गीता जी को बोलने वाला काल (ब्रह्म-ज्योति निरंजन) है, न कि श्री कृष्ण जी। क्योंकि श्री कृष्ण जी ने पहले कभी नहीं कहा कि मैं काल हूँ तथा बाद में कभी न���ीं कहा कि मैं काल हूँ।#भगवदगीता_के_गूढ़_रहस्य
#भगवदगीता_के_गूढ़_रहस्य
Essence of Gita
Shrimad Bhagwat Geeta adhyay 2 shlok 18
This body made up of five element is imperishable the internal god is said to be the imperishable .
#GodMorningWednesday
नशा करता है नाश
सौ नारी जारी करै, सुरापान सौ बार। एक चिलम हुक्का भरै, डूबै काली धार।।
सौ स्त्रियों से भोग करे और ���ौ बार शराब पीऐ, उसे जो पाप लगता है, वह पाप एक चिलम भरकर हुक्का पीने वाले को देने वाले को लगता है।
#GodMorningWednesday
नशा चाहे शराब, सुल्फा, अफीम, हिरोईन आदि-आदि किसी का भी करते हो, यह आपका सर्वनाश का कारण बनेगा।
इस का किसी भी शास्त्र में उल्लेख नहीं कि नशा करें।
यह मानव समाज को बर्बाद कर रहा है।