अजीत भारती गाली दे तो थाने पहुंच गए
जब आए दिन देवी देवताओं पर,सवर्णों की बेटियों को गालियाँ दी जाती हैं तो यही कथित शोषित वंचित लोग किस बिल में घुस जाते हैं?
देखो अजीत भारती तुमसे ज्यादा बदतमीज़ी से और तुमसे ज्यादा सभ्य तरीके से किसी बात को रख सकता हैं।
ये उसका टैलेंट हैं तुम सोचोगे की तुम किसी पर ��्यक्तिगत अभद्र टिप्पणी करोगे और प्रत्युत्तर में किसी से सभ्यता की अपेक्षा रखोगे तो भूल जाओ
बाकी बात रही महिला सम्मान का ढिंढोरा पीटने वाले लोगों के लिए,, महिलाओं का विषय भारत में ऐसे भी बहुत नाजुक होता है जब क्रिया के प्रतिक्रिया स्वरूप अजीत भारती ने जो बोला ऐसा नहीं लगता कि पूरे महिलावर्ग को लक्षित करके ऐसा बोला हैं।
और होगा यही तुम कुछ भी कर लो अजीत भारती से ढीठ थोड़ी होंगे??
ये बीजेपी के पाले-पोसे लोग होते हैं, जो जानबूझकर समाज में ऐसी बातें करते हैं ताकि लोग डरें कि बीजेपी गई तो क्या होगा।
अब या तो SC/ST एक्ट में सुधार करना होगा या बीजेपी को जाना होगा, क्योंकि उसी ने SC/ST एक्ट को और मजबूत किया है।
#StopMisuseOfSCSTAct
चंद्रशेखर रावण कौनसे राज्य से सांसद है- उत्तर प्रदेश
@ajeetbharti भाई कौनसे राज्य में रहते है- उत्तर प्रदेश
सवाल- सांसद UP से है तो कंप्लेन वहा ना करके दिल्ली में क्यों करी गई ?
क्युकी UP में योगी जी है और रावण जानता है की योगी जी ये कंप्लेन होने ही नहीं दे��े, इसलिए दिल्ली चुना गया।
कुछ सवर्ण नेताओं की नीतियां ही दोगली है
खुद के बच्चों को विदेश भेजकर, यहाँ के GC को बोलते हैं UGC के नियमों पर सवाल क्यों??
जब अपने बच्चे सेफ रहें, तो दूसरे ��े बच्चों की चिंता क्यों हो भला
9450424471 इस नंबर पर पुलिस की बर्बरता वाली विडियोज भेजें। कोर्ट में एक लीगल टीम तैयार हो गई है, इनका हिसाब भी चुकता करेंगे।
GC को एक थप्पड़ ��ारने वाले को भी नहीं छोड़ेंगे!
हर हर महादेव।
SC ST काला कानून रद्द होना चाहिए।
मोदी सरकार इसको तत्काल रद्द करे। अगर नहीं कर सकती है तो सवर्णों को इस एक्ट के दायरे से बाहर रखें भले ओबीसी पर यह एक्ट लागू रहे हमे कोई आपति नहीं।
राजपूत सभा भवन जयपुर के अध्यक्ष “श्री राम सिंह चंदलाई” जयपुर में समाज पर लाठियाँ बरसाने और महिलाओं पर वाटर कैनन का इस्तेमाल किए जाने के कारण मुख्यमंत्री भजनलाल को फूलो का गुलदस्ता देकर धन्यवाद ज्ञापित करने पहुंचे ….
साथ में समाज के अन्य प्रबुद्ध लोग भी मौजूद रहे
हर्ष दुबे के पिता पहले से ही लखनऊ में उपस्थित थे इसे दिल्ली से इसकी मामी अर्चना पांडेय जो कन्नौज से भाजपा है
खनन मंत्री हैं दिल्ली से लखनऊ लाईं और उसके बाद पच्चीस लाख रुपये तथा एक टिकट के नाम पर इसका सौदा तय कराया गया हर्ष दुबे को उसके पिता ने प्रारं��� में ही इस आंदोलन को बाधित करने के लिए उतारा था यह बिकाऊ परिवार से था क्योंकि इसका परिवार राष्ट्रीय स्वयंसेव�� संघ का पुराना सदस्य है हर्ष दुबे ने अपने वीडियो में जयचंद जयचंद कहकर निशाना साधा है जबकि यह स्वयं कन्नौज नरेश राजा जयचंद की भूमि से आता है जिनको लेकर इतिहास में अनेक भ्रांतियां फैलाई गई थीं जिनका तथ्यात्मक खंडन पहले ही किया जा चुका है देखा जाए तो हर्ष दुबे जैसे लोग राघव चेतन की वह नस्ल हैं जिन्होंने न जाने कितने दुर्गों और साम्राज्यों को केवल अपनी व्यक्तिगत लालसा के चलते नष्ट कर दिया
BJP ने पंचिंग बैग के लिए ब्राह्मणों को रख रखा है।
कांड कोई और करे, बयान दिलवाने के लिए निशिकांत दुबे, ब्रजेश पाठक, मनोज पांडे और अजय आलोक जैसे चेहरों को आगे कर दो।
ब्राह्मण नेता ही बेवकूफ़ हैं।
थैंक्यू स्वामी रामदेव जी
कोई तो बोला
Sc st कोई दूध के धुले नहीं होते है
जैसे सभी जातियों में चोर डकैत
बलात्कारी है वैसे एससी एसटी में भी है
इसलिए SC ST का अपमान संविधान के खिला��� है
तो राजपूत का अपमान भी संविधान के खिलाफ है
One single family filed 16 fake cases under SC/ST act & earned lakhs of rupees in compensation!!
What a great business model!!
#StopMisuseOfSCSTAct
इस Podcast को जरूर देखिए।
जातिगत आरक्षण की सच्चाई!
और झूठे जातिवाद के कहानियों की सच्चाई।
इस वीडियो को देखने के बाद आप��े कोई भी जातिवाद और आरक्षण पर बहस नहीं करेगा।
यह ट्रेलर है। देखिए और फीडबैक शेयर कीजिए🙏
पॉडकास्ट का लिंक कमेंट में डाल रहा हूं।
ज्यादा से ज्यादा लोगों के साथ शेयर करें।
“आरक्षण का लाभ वही लोग ले रहे हैं जो मजबूत हैं. DM, SP, DIG, IG, DGP, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, राष्ट्रपति… आज उनके बेटे और ये आरक्षण का लाभ उठा रहे हैं.”- ओपी राजभर
हर तरह के आरक्षण का विस्तार भाजपा ने किया | SC ST एक्ट भाजपा के दबाव में बीपी सिंह को लागू करना पड़ा था | 2015 में मोदी ने उसे ज्यादा खतरनाक बना दिया | 2018 में सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी पलट दि���ा जबकि राम मंदिर का मामला कोर्ट में है बोलकर बचता रहा | जिस राम मंदिर को बनवाने में उसकी भूमिका नहीं रही उसका श्रेय दोगे लेकिन SC -ST एक्ट पर कोर्ट का फैसला पलटा लेकिन तुम्हे यहां सांप सूंघ जाता है | अब कह रहे हो कि कोई पार्टी नहीं हटा रही तो भी तुम्हारे लिए बड़े विलेन विपक्ष के नेता है | अगर लाता ही नहीं तो हटाने की बात ही नहीं होती | ये सब करने वाला बड़ा विलेन है या इसको ��हीं हटाने की बात करने वाला ? जिसके तुम वोट बैंक हो वो तुम्हे गड्ढे में डाल रहा है और गड्ढा से ना निकालने के लिए दूसरों को दोषी बता रहे है |
आज तुम्हारे साथ जो हो रहा है,उसके जिम्मेदार तुम स्वयं हो | तुम इसी के लायक हो,जो तुम्हारे साथ राजा बाबू कर रहा है |
पाप तुम किए हो तो सजा कोई और नहीं भुगतेगा|
ये विष्णु तिवारी जी है, फ़र्जी एससी/एसटी एक्ट में 21 साल तक जेल में बंद थे, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2021 में इन पर लगे सभी इलिगेशंस को फ़र्जी मानते हुए इन्हें बरी किया.
इन 21 सालों के कारावास के दौरान विष्णु तिवारी के माता-पिता और दो भाइयों की मौत हो गई, और ये अपने परिवार के किसी भी सदस्य के अंतिम संस्कार में शामिल भी नहीं ���ो सके,
हम सब की तरह इन्हें भी एक ही जीवन मिला था,
वो भी जातिवादी क़ानून की सूली चढ़ गया, जवानी के बेहतरीन 21 वर्ष जेल में रहे, पूरा परिवार बर्बाद हो गया. क्या जेल से छूट जाना न्याय है ? इनके जीवन के कीमती 21 सालों की भरपाई कैसे होगी ?
विष्णु तिवारी यूपी के ललितपुर जिले के रहने वाले है,
ये कहानी सिर्फ एक ‘विष्णु तिवारी�� की नहीं है, ऐसे न जाने कितने लोग होंगे जिन्हें एससी/एसटी एक्ट के फ़र्ज़ी मुकदमों में जेल की सज़ा काटनी पड़ रही है,
भारत की न्याय प्रणाली कितनी कमज़ोर है, ये भी सबको पता है, जमीनी विवाद का मामला पीढ़ी दर पीढ़ी चलता रहता है. हत्या, बलात्कार, छिनैती, डकैती, चोरी, अपहरण जैसे न जाने कितने मामलों में सुनवाई दशकों तक चलती रहती है, निर्णय आने तक या तो पीड़ित की मौत आ जाती है या आरोपी ईश्वर के यहाँ शरण ले च��का होता है,
SC/ST Act जैसे जातिवादी कानूनों को कैसे जस्टिफाई किया जा सकता है ?
सिर्फ़ एससी/एसटी एक्ट ही नहीं बल्कि बलात्कार, छेड़खानी, महिला उत्पीड़न, दहेज प्रथा के अधिकांश मामलें सिर्फ़ फ़साने के उद्देश्य से लगाये जाते है,
मीडिया और सोशल मीडिया पर SC/ST एक्ट को लेकर बहस चल रही है। मैं एक आदिवासी के तौर पर अपनी बात रखती हूँ;
SC/ST एक्ट का इस्तेमाल कौन करता है? मैंने देखा है कि SC/ST एक्ट के तहत ज़्यादातर फ़र्ज़ी मामले अनुसूचित जाति (SC) के लोगों द्व��रा दर्ज कराए जाते हैं, जबकि अनुसूचित जनजाति (ST) के बहुत कम लगभग न के बराबर...
मैं दलितों की बात नहीं करूँगी, वे अपना देखें; मैं सिर्फ़ आदिवासियों (ST) के बारे में लिखूँगी। मैं अपनी ही बात करूं तो अब तक ज़िंदगी में मुझे कभी भी अपनी जाति की वजह से किसी तरह के भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा। बल्कि, मुझे समाज के हर वर्ग और जाति के लोगों से प्यार और अच्छा व्यवहार ही मिला है।
मैं झारखंड की आदिवासी हूं। मैंने देखा है जो आदिवासी जंगलों, पहाड़ों और दुर्गम ग्रामीण इलाकों में रहते हैं, उन्हें तो इस एक्ट के प्रावधानों के बारे में 'ABCD' तक नहीं पता। सिर्फ़ तथाकथित आदिवासी एक्टिविस्ट, ज़मीन माफ़िया और आदिवासी नेता ही इसका इस्तेमाल अपने विरोधियों को फंसाने या बदला लेने के लिए राजनीतिक और कानूनी हथियार के तौर पर करते हैं। आम आदिवासी समुदाय का इससे कोई बहुत ज्यादा लेना देना नहीं है। हाँ, कुछ पिछड़े और ग्रामीण इलाकों में थोड़ा-बहुत भेदभाव हो सकता है, इसकी संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
कई लोग SC/ST एक्ट को खत्म करने की मांग कर रहे हैं। मैं SC/ST एक्ट को हटाने कि पक्षधर नहीं, आदिवासी समुदाय के लिए एससी एसटी एक्ट, आदिवासियों को उनके "जल जंगल जमीन" को गैर - आदिवासी (दिकू) भू-माफियाओं से संरक्षित करने और बचाने में कानूनी रूप से कारगर है। SC/ST एक्ट को खत्म करने की नहीं बल्कि इसमें व्यापक संशोधन की ज़रूरत है। किसी सूरत में SC/ST एक्ट का गलत इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। @ajeetbharti
#StopMisuseOfSCSTAct
यह SC/ST Act आखिर और कितनी ज़िंदगियाँ बर्बाद करेगा?
अगर 92% केस फर्जी साबित होते हैं, तो झूठे मामलों पर सख्त सज़ा का प्रावधान क्यों नहीं है?
#StopMisuseOfSCSTAct
इसे कहते है उड़ती तीर लेना 😂
अनुच्छेद 16(4) उन पिछड़े वर्गों के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण का आधार देता है, जिनकी सरकारी सेवाओं में पर्याप्त हिस्सेदारी नहीं है।
तो अनुच्छेद 16(4) के मुताबिक,
OBC में शामिल व�� सभी जातियां जो ओवर रिप्रज़ेंटेड है उन्हें आरक्षण नहीं मिलना चाहिए, इनका आरक्षण समाप्त होना चाहिए,
जैसे बिहार में कुर्मी समाज अपनी आबादी की अनुपात में ज़्यादा नौकरी के कर बैठा है, जैसे यूपी पुलिस में 36% पदों पर अकेले यादव समाज के लोग नियुक्त है,
अनुच्छेद 16(4) के तहत ही इनका आरक्षण समाप्त हो और OBC की अन्य वंचित जातियां जैसे लोहार, भुज,तेली, हलवाई, बिंद, गोस्वामी समाज को मौक़ा मिल सकें,
हम तो चाहते ही है की आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा हो, लेकिन इसका सबसे ज़्यादा विरोध ओबीसी में घुसी जमींदार जातियां ही करती है, जो अपने ही वर्ग के गरीबों/वंचितों की हकमारी कर रहे है…