किसी के पास इसका जवाब हो तो बता दो...
क्योंकि सवाल सिर्फ सावन का नही है
बल्कि ये सोच का है
अगर जीव हिंसा गलत है, तो क्या वो सिर्फ एक महीने के लिए गलत है?
या फिर सालभर के लिए?
सवाल ठीक लगे तो बुकमार्क करते हुए आगे भेज देना वरना इगनोर करना..
ये है रवि त्रिपाठी
Zee News के वरिष्ठ पत्रकार जो आज पत्रकारिता छोड़कर बीजेपी ज्वाइन कर चुके हैं
अब वो ऑफिशियली ऑन एयर और ऑफ एयर दोनों जगह बीजेपी के लिए बोलेंगे
वैसे बता दूं कि Zee News चैनल के मालिक सुभाष चंद्रा भी बीजेपी के समर्थन से राज्यसभा सांसद रह चुके हैं
अब समझ आ रहा है क्यों हर न्यूज़ में एक ही तरफ का सच दिखता है?
असली देशभक्ति ये नहीं कि सरकार की गलत नीतियों पर चुप रहो
सच बोलना देशभक्ति है, चाहे सत्ता के खिलाफ ही क्यों न हो
गलत का समर्थन करना भी एक तरह की देश से गद्दारी है।
इस आपकी क्या राय है?
@LegalAdvisour राशन कुछ दिन साथ देता है, शिक्षा पूरी उम्र। गरीबी भूख से नहीं, अज्ञानता से पनपती है। अगर सिर्फ आज का पेट भरेंगे तो कल फिर भूख लगेगी, लेकिन अगर दिमाग भरेंगे तो जिंदगी भर खुद कमाएंगे और देश को भी आगे बढ़ाएंगे।
सरकार को पता है कि भरे पेट वाला वोट देता है,
लेकिन भरे दिमाग वाला सवाल पूछता है
राशन कुछ दिन पेट भरता है, लेकिन शिक्षा ज़िन्दगी भर का भविष्य बदल देती है
गरीबी सिर्फ भूख से नहीं बल्कि अज्ञानता से भी आती है
अगर हम सिर्फ पेट भरेंगे तो कल फिर भूख लगेगी लेकिन अगर दिमाग भरेंगे तो ज़िन्दगी भर खुद कमाएंगे
अब आप बताओ कि सिर्फ आज का पेट भरना या पूरी ज़िन्दगी का भविष्य बनाना है?
अब समय आ गया है कि मालिक से भी देशभक्ति का सबूत मांग लिया जाए
भक्तों के मालिक की देशभक्ति अब देश को भारी नुकसान पहुंचा रही है
क्या देशभक्ति सिर्फ आम जनता के लिए है?
या फिर भक्तों और उनके मालिकों के लिए भी है?
अंधभक्तों की मानो तो
राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी ने लेई बनाकर पोस्टर लगाए थे, ये बात झूठ है।
मगर इनका बाप बचपन में मगरमच्छ पकड़कर लाया था और भीख मांगकर खाया था। वाले जुमले है 100 टका सच।
दोगलेपन की भी सीमा होनी चाहिए। हमारा जूता पकड़ना रे भाई । 😀
ICICI बैंक अब जनता को और लूटने जा रहा है।
बैंक का कहना है कि अब खाता धारकों को 50000 ₹ न्यूनतम राशि रखनी होगी।सोचिए इससे आम जनता का कितना पैसा बैंक के पास इक्कठा होगा और जो न्यूनतम राशि नहीं रख पाएंगा उस पर जुर्माना लगाया जाएगा।दोनों तरफ की मार से जनता का पैसा लूटा जाएगा।
भारत में 90% फिल्मों में रोमांटिक कहानी होती है.
जब राजेन्द्र कुमार, शम्मी कपूर और राजेश खन्ना जवान थे 99% फिल्में रोमांस पर बनती थीं.
जब आमिर खान, सलमान खान और शाहरुख खान जवान थे 95% फिल्में रोमांस पर बनाई जाती थीं.
भारत के युवाओं को प्यार करने नही दिया जाता है. वो अपने प्यार की अधूरी फैंटेसी को पूरा करने के लिए सिनेमा हॉल में जाते हैं.
अगर दो अलग अलग जाति के युवक और युवती ने प्यार किया तो उनकी जान पर बन आती है. हरियाणा में पेड़ पर टांग दिया जाता है. यूपी बिहार में कट्टा चल जाता है.
भारत में अंतरजातीय प्रेम विवाह करना अपनी मौत को दावत देना है. हर युवा को इस विषय पर गहन चिंतन करना चाहिए. जाति आधारित कमजोर भारत बनाना है या जातिविहीन मजबूत भारत बनाना है ?
Photo : TANU PRIYA SAROJ (Widow of Rahul Mandal)
@LegalAdvisour जब देश का नेता स्कूल का उद्घाटन करने में रुचि न ले और शिक्षा को फोटो-ऑप समझे, तो समझ लो असली प्राथमिकता क्या है। सड़क, मंदिर, एयरपोर्ट पर दिखावा आसान है, लेकिन स्कूल में निवेश से वोट नहीं मिलते, यही वजह है कि बच्चों का भविष्य राजनीति की भीड़ में गुम हो जाता है।
क्या पिछले 11 सालों में आपने कभी प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, रक्षामंत्री या किसी बीजेपी मुख्यमंत्री को किसी सरकारी स्कूल का उद्घाटन करते देखा है?
ज़रा सोचो...
मंदिर, स्टेडियम, एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, डिफेंस डील सबका उद्घाटन होता है, वो भी पूरे तामझाम के साथ..
लेकिन जब बात शिक्षा की आतीं है तो सब खामोश..
ना स्कूल की फिक्र होती है न बच्चों की बात न किसी नेता को उनके भविष्य की चिंता होती है
क्या ये इत्तेफाक है या सोची समझी प्राथमिकता?
सवाल जायज लगे तो आगे भेज देना वरना चुपचाप स्क्रॉल कर देना...जैसे सब करते है