चिकित्सा विभाग के सभी अराजपत्रित (Non-Gazetted) कैडर के भाई-बहनों को मेरा नमस्कार!
साथियो आज हमारे सामने सबसे बड़ा मुद्दा हमारी मेहनत के सम्मान और सही ��र्ती चयन प्रक्रिया का है। वर्षों से विभाग को अपनी सेवाएं दे रहे संविदा, प्लेसमेंट और अस्थाई कर्मचारियों के अनुभव को सम्मान दिलाना हमारी पहली प्राथमिकता है।
📌 हमारी मुख्य मांग: 'मेरिट आधारित पारदर्शी भर्ती'
हम सरकार और प्रशासन से पुरजोर मांग करते हैं कि चिकित्सा विभाग की सभी भर्तियों में अनुभव का पूरा सम्मान मिले लंबे समय से सेवा दे रहे कर्मचारियों को उनके कार्यकाल के आधार पर 10, 20 और 30 बोनस अंक दिए जाएं।
योग्यता को प्राथमिकता: उम्मीदवार की व्यावसायिक शैक्षणिक योग्यता (Professional Educational Qualification) के प्रतिशत को भर्ती का मुख्य आधार बनाया जाए।
संयुक्त चयन फॉर्मूला: व्यावसायिक शैक्षणिक योग्यता के प्रतिशत और अनुभव के बोनस अंकों को मिलाकर ही अंतिम मेरिट लिस्ट तैयार करके नई वैकेंसी निकाली जाए। जो सदियों से व्यवस्था बनी हुई है। हम उस��ें किसी भी तरह का परिवर्तन नहीं चाहते।
✊ साथियों, एकजुटता ही हमारी ताकत है! यह मांग किसी एक गुट की नहीं बल्कि हर उस योग्य युवा और अनुभवी कर्मचारी की है जो सालों से अपनी बारी का इंतजार कर रहा है। अलग-अलग गुट बनाना मतलब हमारी मांगों को कमजोर करना है। हमें एक सुर में सरकार के सामने इस फॉर्मूले को रखना होगा।
"अनुभव और ��ोग्यता का हो संगम, तभी रुकेगा युवाओं का शोषण!"
गुटबाजी छोड़ो - एकजुटता जोड़ो,
तभी मिलेगा अराजपत्रित को हक पूरा!"
@GajendraKhimsar
@RajCMO #anuragnehra
@BhajanlalBjp@RajCMO@GajendraKhimsar
नीट
रीट
SI
कृषि लेक्चरर
इतनों के पेपर लीक
तो फिर पेपर किसके लिए ?
योग्य तो यहाँ भी अधूरी आश के साथ
फिर मेरिट बोनस में क्या दिक्कत?
कम से कम साफ सुथरी मेरिट तो दिखेगी
और योग्य को न्याय भी मिलेगा
@RajCMO@GajendraKhimsar
DPC भी इतनी मुश्किल कि DOP के साल में दो DPC करने के आदेश बेकार
पद��्थापन में आफ़्शन फॉर्म मांगे
इनमें पदस्थापन नहीं
परिणाम..
मजबूरी में forgo
या न्यायालय की शरण
नेक्स्ट DPC में Defer बढ़ते हैं
शीट खाली रहती हैं
भर्तियों में पद कम मिलते हैं
@BhajanlalBjp@DIPRRajasthan@GajendraKhimsar
विश्व लैब टेक्नीशियन दिवस की सभी लैब टेक्नीशियन, लैब सहायक कार्मिकों की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं
मरीज को गुणवत्तापूर्ण जांच रिपोर्ट उपलब्ध होती रहे यही लैब टेक्नीशियन संवर्ग का उद्देश्य है
सही जांच ही सही इलाज का आधार है
@RajCMO@DIPRRajasthan@BhajanlalBjp
संस्थान पर जो डॉक्टर है ही नहीं
मरीज ने उस dr को दिखाया ही नहीं
उसकी साइन शील से स्वयं ही जांच कर रही कृष्णा लैब
मरीज की गजब चिन्ता है निजी लैब को
डॉ को दिखाया नहीं और मरीज की 24 जांच की रिपोर्ट भी प्राप्त हो गई
क्या से क्या हो गया?
@BhajanlalBjp@GajendraKhimsar@DIPRRajasthan
सरकारी क्षेत्र जांचों का निजीकरण
बिना सैंपल के जांच रिपोर्ट देना
खां��ी की जांच में अविवाहिता को प्रेगनेंसी रिपोर्ट पकड़ना
हेपेटाइटिस सी (लिवर कैंसर संभावना) नेगेटिव मरीज को पॉजिटिव बताना
इन सब के ऊपर विभाग की चुप्पी समझ से परे
प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी,आपका ध्यान राजस्थान राज्य की अत्यंत चिंताजनक एवं बदहाल सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की ओर आकर्षित करना चाहता हू��। वर्तमान में राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था लगभग “वेंटिलेटर” पर है, जहाँ आम जनता को बुनियादी उपचार भी समुचित रूप से उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार करने के बजाय अपने निजी व्यवसायों को बढ़ाने में अधिक ध्यान दे रहे हैं। इसके अतिरिक्त, एक निजी डायग्नॉस्टिक कंपनी को सरकारी अस्पतालों में लैब जांच का कार्य सौंपा गया है, जो कथित र���प से स्वास्थ्य मंत्री के करीबी व्यक्ति से जुड़ी हुई है। सरकारी स्वास्थ्य संस्थाओं में निजी लैब द्वारा की जा रही कई गंभीर अनियमितताएँ सामने आ रही हैं ,बिना सैंपल जांच किए ही रिपोर्ट जारी की जा रही हैं,स्वस्थ व्यक्तियों को थायराइड एवं कैंसर जैसे गंभीर रोगों से ग्रसित बताया जा रहा है और इन घटनाओं से संबंधित समाचार प्रतिदिन समाचार पत्रों में प्रकाशित हो रहे हैं। यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि सीधे-सीधे लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ है, जो आपराधिक श्रेणी में आता है। प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp से यह प्रश्न है कि इस निजी लैब को संरक्षण क्यों दिया जा रहा है? गलत रिपोर्टों के कारण जिन मरीजों के जीवन पर खतरा उत्पन्न हो रहा है, उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? यह मामला केवल जांच का नहीं, बल्कि आपराधिक लापरवाही का है, और राजस्थान की जनता शासन से जवाब मांग रही है। जिस स्वास्थ्य मंत्री से पूरा राजस्थान अपेक्षा रखता है,उनके खुद के गृह जिले नागौर की स्वास्थ्य सेवाएँ भी अत्यंत दयनीय स्थिति में हैं,चिकित्सकों की कमी, खराब एवं बंद मशीनें तथा व्यापक अव्यवस्थाएँ यह दर्शाती हैं कि वर्तमान में स्वास्थ्य विभाग की स्थिति अत्यंत कमजोर है। सरकारी अस्पतालों के हालत देखते हुए मैं यह कहना चाहता हूं कि राजस्थान को ऐसे नाकारा और गैर जिम्मेदार स्वास्थ्य मंत्री की कोई जरूरत नहीं है जिन्हें अ��ने महकमे में धरातल से जुड़ी कोई जानकारी तक नहीं है | प्रधानमंत्री जी को इस स्थिति पर त्वरित संज्ञान लेकर एक कड़ा संदेश गैर - जिम्मेदार मंत्रियों को देना चाहिए ताकि राजस्थान में स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण महकमे का जिम्मा संभाल रहे व्यक्ति को कड़ा सबक मिले और जनता को सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं का बेहतर लाभ मिल सकें | सरकार द्वारा लैब से जुड़ा कार्य निजी कंपनी को देने से वर्षों से अल्प वेतन पर क��र्य कर रहे संविदा कार्मिकों / प्लेसमेंट कार्मिकों की आजीविका पर भी संकट आ गया | मैं राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा को पुनः कहना चाहता हूं कि आपको विगत दस दिनो में राज्य के विभिन्न जिलों में प्राइवेट लैब को जांचों का कार्य देने से क्या स्थिति बनी ? उसकी उच्च स्तरीय समीक्षा करनी चाहिए क्योंकि राज्य के स्वास्थ्य मंत्री अपनी जवाबदेही के प्रति लापरवाह है और उन्हें इस महकमे से जुड़ी ध���ातल की कोई जानकारी भी नहीं है |
@PMOIndia @RajCMO
@cmo@BhajanlalBjp@DIPRRajasthan@GajendraKhimsar
खांसी में प्रेग्नेंसी की रिपोर्ट देने के बाद
मदर लैब ..
Dr ने 90 Rs की CBC लिखी
मदर लैब में HBA1C, B12, TSH, लगभग 850 की जांचे अपनी तरह से जोड़ दी
ये सरकार को सीधे आर्थिक नुकसान पहुंचाया जा रहा है
क्या इस पर एक्शन होगा?
@hanumanbeniwal ‼️कृष्णा डायग्नोस्टिक कंपनी ❌
पूर्णतया प्रतिबंधित 🚫 हों जिससे राजस्थान में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाया जा सके ।
इस संबंध में मंत्री जी @hanumanbeniwal जनता के हित के लिए इसे पूर्णतया बंद 🔏 करवाये ।।
धन्यवाद 🙏🏻 @hanumanbeniwal
राजस्थान के स्वास्थ्य संस्थानों में लैब की जांच से जुड़े कार्यों को हब एंड मॉडल के तहत निजी कम्पनियों को देने का निर्णय अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण व जनविरोधी है | यह निर्णय न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित करेगा बल्कि मरीजों, मेडिकल छात्रों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए गंभीर संकट खड़ा करेगा | निजी कम्पनियों को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से किए गए ऐसे निर्णय से मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर, इंटर्न, नर्सिंग स्टूडेंट्स और पैरामेडिकल स्टाफ की पढ़ाई और प्रशिक्षण पर सीधा असर पड़ेगा,मरीजों को जांच और इलाज के लिए अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ेगा वहीं इमरजेंसी सेवाओं में देरी जानलेवा साबित हो सकती है साथ ही बार-बार अस्पताल के चक्कर लगाने की मजबूरी ���े आम जनता की तकलीफ बढ़ेगी। उदाहरण के तौर पर बताऊं तो थैलेसीमिया जैसे गंभीर रोगों से पीड़ित मरीजों को समय पर जांच और उपचार नहीं मिल पाएगा वहीं वर्षों से अल्प वेतन पर संविदा पर जो लोग कार्य कर रहे थे उन्हें उम्मीद थी कि कभी न कभी सरकार उनके साथ न्याय करेगी और वर्षों की मेहनत का उन्हें सकारात्मक फल मिलेगा मगर सरकार के ऐसे तुगलकी फरमान ने पहले से संविदा पर लगे कार्मिकों के भविष्य पर भी प्रश्न चिन्ह खड़ा कर दिया | मैं राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp को कहना चाहता हूं कि ऐसे निर्णय की तत्काल उच्च स्तरीय समीक्षा करके हब एंड मॉडल के तहत निजी कम्पनियों को दिए गए कार्य पर रोक लगाए | चिकित्सा क्षेत्र में ऐसे महत्वपूर्ण कार्य में निजीकरण को बढ़ावा देना प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए शुभ संकेत नहीं है |
@RajCMO
@BhajanlalBjp@GajendraKhimsar@DIPRRajasthan@DainikBhaskar
कृष्णा लैब, कारनामे जारी....
TB और प्रेग्नेंसी दोनों जांच अलग हैं
डॉ, ने प्रेगनेंसी टेस्ट ही नहीं लिखा
बिल के लिए फर्जी जांच कर दी
एक अविवाहित को पॉजिटिव दे दिया
उस परिवार की ओर उस लड़की की हालत क्या रही होगी?
@BhajanlalBjp@GajendraKhimsar@DIPRRajasthan
निजी लैब को मैनपॉवर मशीन स्वयं की लगानी थी
लेकिन अब संविदा तो दूर सरकारी कर्मचारियों को भी अपने अंडर कार्य करने को बोला गया है
नियमित कर्मचारी गलती करते तो कितने सारे नोटिस? कितनी कार्यवाही?
निजी लैब की ग़लत रिपोर्ट पर मेहरबानी?
📢 राजस्थान चिकित्सा विभाग में,
पारदर्शिता ही होगी असली पहचान।
🚫 कोचिंग माफिया और दलाली पर लगेगी रोक,
📜 राजस्थान चिकित्सा सेवा नियम 1965 यथावत रहे,
भर्ती प्रक्रिया निष्पक्ष और ���्यायसंगत बने।
🔥 जब संविदा निविदा कर्मी जागरूक और संगठित होगा,
हर गलत व्यवस्था का अंत निश्चित होगा!
📌 हमारी स्पष्ट मांग:
मेरिट + बोनस आधारित पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया जारी रहे
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#Transparency
#YouthVoice
#Justice
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