ठाकुर होना आसान नहीं होता!“
कभी कासिम तो कभी गजनी से भिड़ा ठाकुर!
हार तो तय थी… पर लड़ा ठाकुर!
हारना ही था उसे, वो अकेला लड़ा था,
क्या जन्मभूमि ये तुम्हारी नहीं थी?
फिर क्यों अकेला लड़ा ठाकुर?
पत्नी जौहर हुई, बच्चे अनाथ!!
हिन्दू तो बचा पर, भरी जवानी में मरा ठाकुर!
सदियों से रक्त दे माटी को सींचा,
जन जन्मभूमि और धर्म की वेदी पर मिटा ठाकुर!
जिनके लिए सब कुछ खोया,क्यों उनकी ही नजरों में बुरा?
फिल्मों का ठाकुर!
कहानियों-किस्सों का ठाकुर!
कविताओं का ठाकुर!
जब दुबक बैठे थे घरों में सब तमाशबीन,तब पीढियां युद्धभूमि में बलिदान कर रहा था ठाकुर,
आज बुद्धिजीवी पानी पी पीकर बरगलाते और कोसते क��� आखिर कौन है ये ठाकुर..?
कौन बताए उन्हें कि कफन केशरिया करके,मूंछों पर ताव देकर मौत को गले लगाने वाला जांबाज ही था ठाकुर।”
अरबी इतिहासकार याकूबी लिखता है, जब मोहम्मद बिन कासिम के भारत आक्रमण के बाद दूसरे सारे आक्रमण विफल होने लगे तब खलीफा को उनके अमीरों ने समझाया- "भारत के लोग इतने जुझारू हैं कि उन्हें केवल तलवार से नहीं हराया जा सकता। वे धर्मभीरु हैं, यदि उन्हें प्रेम से अपने वश में किया जाय तो उस देश को आसानी से फतह किया जा सकता है।"
और यही कारण है कि उसके बाद जब जब कोई आतंकी भारत में घुसा तो उसके साथ कोई न कोई सूफी अवश्य था। मोहम्मद गजनवी के साथ आया अलबरूनी, मोहम्मद गोरी के साथ आये मोइनुद्दीन चिश्ती...
खैर! यह हमारा विषय नहीं, हम बात कर रहे हैं कासिम के आक्रमण के बाद की तीन सदियों की।
मोहम्मद बिन कासिम के आक्रमण में जिस बर्बर तरीके से मंदिरों, चैत्यों, बौद्ध मठों को तोड़ा गया था, और निर्दोष बच्चों बूढ़ों को क्र���रतापूर्वक मारा गया था, उसने भारत को एकाएक चैतन्य कर दिया था। और उसके बाद पश्चिमोत्तर भारत में कई राजवंश ऐसे उभरे जिन्होंने दो शताब्दियों तक अपनी साहसी तलवार के बल पर बर्बर तुर्कों को सिंधु के उस पार ही रोक कर रखा। इन्ही में एक था शाही राजवंश...
उत्तर में पेशावर से दक्षिण में मुल्तान तक लगभग छह सौ किलोमीटर की सीमा इन्होंने घेर रखी थी, जिसे पार करना तुर्कों के लिए लगभग असंभव था। ये मूलतः कश्मी���ी पंडित थे।
वैसे हमारा विषय यह भी नहीं! हमारा विषय यह है कि सिन्धु नदी की गोद में, हिमालय की मनोरम छटा के बीच इन्ही शाहियों ने कुछ मन्दिर बनवाये थे। विशाल, भव्य, अद्वितीय सुन्दर... जैसे वही धरा का स्वर्ग हो।
प्रकृति का सौंदर्य ऐसा कि वहाँ पहुँचते ही कोई भी सभ्य मनुष्य अपने समस्त अवगुण भूल कर ईश्वर और प्रकृति के आगे नतमस्तक हो जाय। सभ्य व्यक्ति सौंदर्य को पूजता है और असभ्य उसे तहस नहस कर देता है। जिन बर्बरों के संस्कार में केवल तोड़ना और काटना ही था, उन्हें तो मनुष्य मानना ही असभ्यता है।
ये मन्दिर पूरी तरह प्रकृति को समर्पित थे। उन सात नदियों को समर्पित मन्दिर, जिनके नाम पर युगों पूर्व इस विशाल भूभाग को सप्तसैंधव प्रदेश कहा गया था। सिन्धु, सरस्वति, वितस्ता, अस्किनी, पुरुषणि, शतद्रु, विपाशा... आज की सिंधु, लुप्त सरस्वति, झेलम, चनाव, रावी, शतलज, व्यास...
मन्दिर अद्भुत पत्थरों से बने थे। कुछ पत्थर शहद के रङ्ग के, तो कुछ श्वेत पारदर्शी...कुछ नीलम जैसे, तो कुछ रक्त की तरह लाल! लगता जैसे स्वयं विश्वकर्मा ने बहुमूल्य रत्नों से बनाया हो इस तीर्थ को... ऐसे पत्थर उस क्षेत्र में नहीं होते। किवदंतियों में है कि ��िमालय की ऊंचाई से सिंधु नदी के रास्ते ये पत्थर लाये गए थे।
मन्दिर के रक्षण हेतु हर ओर कुछ विशाल अट्टालिकाएं बनीं थीं, जहाँ छोटी सी सेना निवास करती थी।
दशवीं सदी में जब गजनवी ने भारत में प्रवेश किया और शाही राजवंश पराजित हुआ तो इन मंदिरों की प्रतिष्ठा भी चली गयी। तबसे अब तक सैकड़ों बार इन मंदिरों के सुंदर पत्थरों पर बर्बरों की तलवारें चली हैं। पर समय की मार झेलते ये खंडहर अब भी ऐसे हैं कि पूरे पाकिस्तान में इनसे सुन्दर और कुछ नहीं।
सात में से दो मन्दिर तो गिर गए, पाँच के ध्वंसावशेष बचे हैं। सम्भव है कल वे भी गिर जांय! समय सबकुछ समाप्त कर देता है।सभ्यता भी एक दिन मरती है और बर्बरता भी! बचती है कहानियां, जो बताती हैं कि कौन बनाने आये थे और कौन तोड़ने...
मेवाड़ के महाराणा अमरसिंह जी की संक्षिप्त जीवनी :-
जन्म : 16 मार्च, 1559 ई.
1582 ई. :- दिवेर युद्ध में सेनापति बने व अकबर के सेनापति सुल्तान खां को उसके कवच व घोड़े समेत भाले से कत्ल किया
1587 ई. :- गुजरात के एक शाही थाने पर विजय प्राप्त की
1599 ई. :- अकबर ने राजा मानसिंह व अपने बेटे सलीम (जहांगीर) को महाराणा अमरसिंह के खिलाफ मेवाड़ भेजा। सलीम ने उदयपुर पर हमला किया। महाराणा अमरसिंह ने मुगल फौज को आमेर तक खदेड़ दिया व मालपुरा से जुर्माना वसूल करते हुए मेवाड़ आए।
महाराणा अमरसिंह ने अपने हाथों से सुल्तान खां खोरी को मारकर बागोर पर अधिकार किया व इसी तरह रामपुरा पर भी अधिकार किया।
1600 ई. :- अक���र ने मिर्जा शाहरुख को फौज समेत मेवाड़ भेजा, पर महाराणा के खौफ से मिर्ज़ा भागकर बांसवाड़ा चला गया।
महाराणा अमरसिंह ने अपने हाथों से ऊँठाळा दुर्ग में तैनात कायम खां को मारकर दुर्ग पर अधिकार किया।
1603 ई. :- अकबर ने शहजादे सलीम को दोबारा मेवाड़ भेजा, पर महाराणा अमरसिंह से मिली पिछली पराजय से घबराकर वह मेवाड़ अभियान छोड़कर गुजरात चला गया।
1605 ई. :- जहांगीर मुगल बादशाह बना व उसने आसफ खां और शहजादे पर��ेज को 50 हज़ार की फ़ौज समेत मेवाड़ भेजा।
1606 ई. :- देबारी के युद्ध में महाराणा अमरसिंह ने ��हजादे परवेज को पराजित किया।
1608 ई. :- जहांगीर ने शहजादे परवेज को बुलाकर महाबत खां को 15 हज़ार की फौज समेत मेवाड़ भेजा। महाराणा अमरसिंह ने महाबत खां को पराजित किया।
1609 ई. :- महाराणा अमरसिंह ने मांडल के थाने पर हमला किया, जहां मुगल फौज का सेनापति जगन्नाथ कछवाहा घावों के चलते कुछ दिन बाद मारा गया, जिसकी 32 खंभों की छतरी भीलवाड़ा के मांडल में स्थित है।
1609 ई. :- जहांगीर ने फौज समेत अब्दुल्ला खां को मेवाड़ भेजा।
1611 ई. :- रणकपुर के युद्ध में महाराणा अमरसिंह ने अब्दुल्ला खां को पराजित किया।
1611 ई. :- जहांगीर ने अब्दुल्ला खां को बुलाकर राजा बासु को मेवाड़ भेजा।
1613 ई. :- महाराणा अमरसिंह ने शाहबाद थाने पर हमला किया, जिसमें राजा बासु मारे गए।
1613 ई. :- जहांगीर ने फौज समेत मिर्जा अजीज कोका को मेवाड़ भेजा, पर वह भी महाराणा अमरसिंह से पराजित हुआ।
1613 ई. :- जहांगीर अजमेर पहुंचा और वहां से उसने शाहजहां को समूचे मुगल साम्राज्य की फौज समेत मेवाड़ भेजा। डेढ़ वर्ष तक 20 हजार मेवाडी बहादुरों ने तकरीबन 4 लाख से अधिक फ़ौज से छापामार संघर्ष जारी रखा।
1615 ई. :- मेवाड़ के बन्दी नागरिकों की रक्षा की खातिर महाराणा अमरसिंह ने मुगलों से सन्धि कर ली। सन्धि के बाद चित्तौड़ पर महाराणा अमरसिंह का अधिकार हुआ।
1615 ई. से 1620 ई. :- महाराणा अमरसिंह संधि की ग्लानि से उदयपुर में एकान्तवास में रहे।
26 जनवरी, 1620 ई. :- महाराणा अमरसिंह का देहान्त
एक ऐसे योद्धा, जिन्होंने अपने जीवनकाल में महाराणा बनने के बाद 18 वर्षों तक संघर्ष करते हुए 17 बड़ी लड़ाईंयों में बहादुरी दिखाई व 100 से अधिक मुगल थानों पर विजय प्राप्त की
अ���िलेश यादव ने मथुरा के बांके बिहारी मंदिर की 12 एकड़ जमीन को कब्रिस्तान में बदलने के लिए कितनी नीचता किया सोचिए
आजम खान ने अपने सरकारी लेटर पैड पर मथुरा के एसडीएम और डीएम को पत्र लिखा कि किसी भी तरह से मंदिर की जमीन को कब्रिस्तान को दे दो
फिर समाजवादी पार्टी की सरकार ने जमीन के खसरा नंबर को जो 108 था उसे बदल��र 1081 कर दिया और नए खसरा नंबर डालकर उसे कब्रिस्तान में बदल दिया
अभी भी जो हिंदू समाजवादी पार्टी का समर्थक है वह अपना डीएनए चेक करवा ले वह हिंदू हो ही नहीं सकता
क्योंकि यदुकुल भगवान श्री कृष्णा की जमीन को यह दोगला कब्रिस्तान बनने के लिए दे दिया
एक खतरनाक बिजनेस मॉडल का पर्दाफाश ...
आपको राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात के हाइवे पर तमाम ऐसे होटल मिलेंगे जिनका नाम भाग्योदय, तुलसी, बनास, डिनरवेल, अरुणोदय, आदि हिंदू नाम वाला होगा लेकिन इन होटलों की ��ेन जिसमे हजारो होटल है उन्हें गुजरात के बनासकांठा के रहने वाले "चेलिया मुस्लिम" चलाते है
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इन होटलों में एक भी हिन्दू को नौकरी नही दी जाती.. चेलिया ग्रुप ऑफ़ होटल्स का हेड ऑफिस अहमदाबाद में है । इनका पूरा खरीद सेंट्रलाइज्ड होता है । ये डाइरेक्ट कोल्डड्रिंक, नमकीन आदि बनाने वाली कम्पनीज के साथ बल्क में डील करते है,.. फिर उसे हर एक होटल में सप्लाई करते है । जहाँ तक सम्भव हो ये खरीदारी मुस्लिम से ही करते है । इनके होटल्स में इनवर्टर, बैटरी, आरओ आदि सप्लाई करने वाला भी मुस्लिम ही होता है ।
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चूँकि ये अपने होटलों का नाम हिन्दू नाम जैसा रखते है और "ओनली वेज" लिखते है । और इनके होटल साफ सुथरे दिखते है .. इसलिए हिन्दू इनके होटलों के तरफ आकर्षित होते है । इनका ये मानना है की हिन्दुओ से पैसा निकालो और उसे मुस्लिमो के बीच लाओ ।
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इनका पूरा बिजनस फ्रेंचाइजी माडल पर आधारित होता है इनकी एक सहकारी कमेटी है जो अल्पसंख्यक आयोग में अल्पसंख्यक कमेटी के रूप में रजिस्टर्ड है .. इस कमेटी में देश विदेश के लाखो चेलिया मुस्लिम मेम्बर है और सब अपना अपना योगदान देते है फिर ये हाइवे पर कोई अच्छा जगह देखकर उसे काफी ऊँची कीमत देकर खरीद लेते है फिर उस होटल का एक खरीदी बिक्री का एकाउंट बनाते है.. और उस होटल को किसी चेलिया मुस्लिम को चलाने के लिए सौप देते है
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पुरे विश्व के चेलिया मुस्लिम सिर्फ मुहर्रम में अपने गाँव में इकठ्ठे होते है फिर हर एक होटल के लाभ हानि का हिसाब करते है इसलिए मुहर्रम के दौरान करीब २० दिनों तक गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान के हाइवे पर के 90% होटल्स बंद रहते है
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ये बसों के ड्राइवर को बेहद महंगे गिफ्ट देते है ताकि ड्राइवर इनके ही होटल पर बस रोके
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अहमदाबाद के सरखेज में इनका बहुत बड़ा सेंट्रलाइज���ड परचेज डिपो ह�� खुद का आलू प्याज आदि रखने के लिए कोल्ड स्टोरेज है ये सीजन पर सीधे किसानो से बेहद सस्ते दाम पर आलू प्याज अदरक आदि खरीद लेते है
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"इकोनोमिक्स टाइम्स अहमदाबाद" में छपे एक रिपोर्ट में इस चेलिया होटल्स की कुल पूंजी इस समय करीब 3000 करोड़ रूपये पहुंच चुकी है और इनकी कुल परिसम्पत्तियों की कीमत इस समय 10,000 करोड़ रूपये होगी
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हिन्दुओ के जेब से पैसा निकालकर उसे मुसलमानों में बांटने का ये चेलिया ग्रुप्स ऑ���़ होटल्स बेहद खतरनाक मोडल है
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दुःख इस बात का है की अभी तक हिन्दू चेलिया मुस्लिमो के इस गंदे खेल को नही समझ सके और इनके होटलों में खाना खाकर इन्हें आर्थिक रूप से मजबूत करते है... फिर ये पैसा आतंकियों को जाता है इससे बड़ा खतरनाक ये है की ये किसी हिन्दू के होटल को चलने ही नही देते
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#अनंतनाग से बेहद दुखद खबर आ रही है। 💔
जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियान में #IndianArmy के दो अधिकारियों ,कर्नल मनप्रीत सिंह, मेजर आशीष ढोंचक और एक पुलिस अधिकारी, डीएसपी हुमायूं भट्ट के शहीद होने ह्रदय विदारक खबर है।
दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना करता हूं, अनंतनाग के हमारे नायकों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना।
ॐ शांति
#Anantnag
#JammuKashmir
उमर अब्दुल्ला ने कहा तुम राम मंदिर नही बना सकते
- मोदी जी ने बनवा दिया
अब्दुला ने कहा तुम धारा 370 नही हटा सकते
- मोदी जी ने हटा दी
अब अब्दुल्ला कह रहे है कि देश का नाम बदल नही सकते
- मोदी जी वो भी बदल देंगे
अब तो उमर अब्दुला बस ये कह दे कि भारत को हिन्दू राष्ट्र नही बना सकते तो मजा आ जाये
जो समझ गए वो समझ गए 😁😁😁
@JaikyYadav16 हमारे यहाँ भी कहवात है पिछवाड़ धोने को पानी नहीं बात स्विमिंग पूल की
तुम्हारी समझ से परे है ये
70 साल देश में कुछ बनाये होते तो आज ये पैसा ना लगता साला लोगो के हगने के पैसे भी खा गये तुम