पालतुओं की बिलबिलाहट बड़ा सुकून देती है 😀😀
लगता है चोट सही जगह लगी है।
फिलहाल आप सभी चूड़ा गुड़ का आनंद लें।
झारखंड के छात्रों की आवाज़ ��ठनी रुकनी नहीं चाहिए
इनको इनके एजेंडे पर सफल मत होने दीजिएगा 🙏🏻
#tapwithamanchopra
"UGC तो हम लागू नहीं होने देंगे! और हुआ तो पूरे देश में आंदोलन होगा!
सवर्ण जितना शांत है, उतना उग्र भी है। और अगर उग्रता की बात आई तो यहाँ से लेकर दिल्ली तक हिला देंगे"
-कहना है एक छात्र का
अब धीरे धीरे सवर्ण भी जग रहे हैं!
पप्पू यादव कह रहा है कि पूरी दुनिया एक दिन इस्लाम क़बूल लेगी नहीं तो इसका नाम बदल देन�� , मैं तो मरते दम तक नहीं कबूलने वाली ना ही कोई कट्टर सनातनी क़बूलेगा , इस सनातन विरोधी कांग्रेसी पप्पू यादव के लिए दो शब्द जरूर लिखे
CJP आंदोलन से एक बात तो साफ हो गया कि हमारे देश के GENZ का एक बड़ा वर्ग संस्कार हीन और निर्लज्ज है अब इस लड़की को ही देख लो इसके माँ बाप की छाती गर्व से फूल उठी होगी कि वाह बेटी गाली कितने अच्छे से दे लेती है । ऐसे संस्कार विहीन शिक्षा का क्या फ़ायदा? https://t.co/wZE4MnKzvf
पहली बार टेलीविज़न डिबेट में किसी
को आरक��षण पे इतना मुखर होके
बोलते देखा हु
चारों तरफ असंतोष है
सरकारों को 70 साल में ये समझ नहीं आया कि गरीबी जाती देख के नहीं आती
ये 5000 साल से पानी नहीं पीने दिया
हांडी मटकी बांध दिया
ये सारा नैरटिव भी झूठा है
इस देश में जाति नहीं, मेरिट को प्राथमिकता मिलनी चाहिए!!
और लोगों की जाति को नहीं बल्कि उनकी मेहनत को पहचान मिलनी चाहिए!!
तभी देश सही मायनों में विश्वगुरू बनेगा!!
#EndReservation
सख्त कानून, फास्ट-ट्रैक कोर्ट और दोषियों को कठोर सज़ा की दिशा में कदम… उद्देश्य एक ही है—मेहनत का सम्मान और प्रतिभा को न्याय।
क्योंकि देश का भविष्य, देश के युवाओं से बनता है। 🇮🇳
UGC जैसा कानून नहीं आता तो अभी तक सवर्ण इस आंदोलन के सारे नैरेटिव को हवा में उड़ा दिया होता क्योंकि CAA और किसान बिल से बड़ा प्रोटेस्ट नहीं है ये ..
सवर्ण समाज ग्राउंड और सोशल मीडिया पे फ्री में प्रचार करता था
लेकिन UGC ने सवर्णों की आंख खोल दी है ..
ये हमला सिर्फ इसलिए
क्यूंकि ये लड़का भगवा कुर्ता पहनकर
CJP के प्रोटेस्ट में शामिल हो गया, जबकि वो
ये भूल गया था कि ये स्टूडेंट प्रोटेस्ट नहीं बल्कि
देश विरोधी.. सनातन विरोधी.. छक्कों और जिहादियों का प्रोटेस्��� है जहाँ भगवा नॉट अलाउड
भीड़ जुटाने के लिए चेहरे तो बहुत आए...
स्वरा भास्कर आईं।
संजय सिंह आए।
आतिशी आईं।
केजरुद्दीन आये,
प्रकाश राज आए
वो सनातन विरोधी कॉमेडियन कुणाल कामरा भी आया।
कम्युनिस्ट दलों के नेता भी सक्रिय हैं।
समाजवादी ��ार्टी की सांसद रूपम सरोज भी पहुँचीं।
लेकिन एक सवाल फिर भी खड़ा है—
जनता कहाँ है?
छात्र कहाँ हैं?
आम लोग कहाँ हैं?
धरना देना लोकतांत्रिक अधिकार है।
भूख हड़ताल करना भी अधिकार है।
प्रदर्शन करना भी अधिकार है।
लेकिन जब जनसमर्थन नहीं दिखता, तब केवल बड़े चेहरों की मौजूदगी आंदोलन को जनआंदोलन नहीं बना देती।
आज का Gen Z अपनी प्राथमिकताएँ खुद तय कर रहा है।
कोई अमरनाथ यात्रा पर है,
कोई कांवड़ ��ात्रा की तैयारी में है,
कोई प्रतियोगी परीक्षाओं की पढ़ाई में जुटा है,
तो कोई अपने करियर और भविष्य को संवारने में लगा है।
जनता अब केवल नारों से नहीं, बल्कि मुद्दों और परिणामों से प्रभावित होती है।
क्योंकि आखिर... ये पब्लिक है, सब जानती है।