10,000 प्राइमरी मे शिक्षक भर्त��� देना @myogiadityanath जी बेरोजगारो के साथ अन्याय है
@SureshKKhanna जी damage Control करिए चुनावी साल है
@thisissanjubjp जी बेरोजगारो की एक बड़ी भर्ती की मांग है
20लाख बेरोजगार युवाओ के पास 2करोड़ #VOTEBANK है ग���रामीण क्षेत्र में काम से कम 30000 की कमी जरूर है क्योंकि जब नगर क्षेत्र में इतने की कमी है तो जब ग्रामीण क्षेत्र का भी अधियाचन इसी में साथ जोड़ दिया जाए जिससे भर्ती कम से कम 40000 या ₹50000 पदों पर तो जरूर रहा है सिपाही भर्ती के बराबर तो जरूर हो क्योंकि वह भारती तो हर 2 साल में हो रही है @UPGovt @ChiefSecyUP @spgoyal @sanjayjavin
परीक्षा 29 ,30 जनवरी 2026 प्रस्तावित है, मतलब 3400 दोनों पेपर की फीस करने की तैयारी चल रही ��ै।
कुल मिलाकर तैयारी के साथ पैसे की व्यवस्था करने में भी लग जाओ।🙌
इतने सालों में परीक्षा नहीं कराई गई जिसकी भरपाई छात्रों से ही की जाए��ी।🙂
#टीईटी💔
ये आवेदन शुल्क इतना कम क्यों है 17000 तो कम से कम होना ही चाहिए 💯
बेरोजगारों के पास इतना पैसा है भर भर कर आखिर करेंगे क्या उसका?
बेचारे नेता इतने गरीब थे कि इनकी सैलरी बढ़ानी पड़ी 💯
8 साल से शिक्षक भर्ती दी नहीं अब यही मौका है राजस्व कमाने का
@spgoyal@idrsarvanbaghel
शिक्षामित्र का वेतन वर्ष 2017 में 10 हज़ार, शिक्षामित्र का वेतन वर्ष 2025 में 10 हज़ार, इनके लिए तो महंगाई भत्ता का ₹1 भी नहीं बढ़ाया गया।
जो युवा घर से बाहर रहकर टेट की तैयारी कर रहे हैं उनके लिए यह शुल्क पूरे माह के खर्चे के बराबर है, अगर विश्वास ना हो तो प्रयागराज की गलियों में घूम कर देख लीजिए, आज भी वहां ऐसे बच्चे हैं जो कम भूख लगने पर टिफिन के लिए मना कर देते हैं, एक वक्त के खाने का खर्चा ही बचेगा। यह शुल्क बहुत ज्यादा है
आज देश के युवा राष्टीय बेरोजगार दिवस के रूप में मना रहे हैं ,
अगर आप बेरोजगारों है और पकौडा नही तलना चाह रहे हैं तो आप Rt करके
#राष्ट्रीय_बेरोजगार_दिवस का समर्थन कर सकते हैं 🙏🏻 https://t.co/nEGjv6lAc9
उत्तर प्रदेश का बेसिक विभाग,बेस लेस विभाग बन चुका है।
एक चीज को बंद करके दूसरे को खोल देना विकास नहीं होता श्रीमान।
योगी जी समेत आपने बेसिक शिक्षा विभाग के लिए कुछ नया नहीं किया न ही कोशिश की।
एक विद्यालय जबरिया बंद करके ,दूसरे विद्यालय को खोलना व्यापार हो सकता है विकास नहीं।
दरअसल हम अभ्यस्त हो गए हैं अध्यापक का जो ट्रिपिकल प्रारूप 60,70, के दशक में गढ़ा गया वह यह था कि अध्यापक समाज का सबसे निरीह प्राणी है जो टूटी साइकिल स्कूल में पढ़ाने आ रहा हो, जिसके पास फटा हुआ छाता हो, जो अपनी सैलरी से सिर्फ दो लोगों का जीवन निर्वाह कर सकता हो, जिससे बच्चा पैदे होने पर वो अपने बच्चों की परवरिश खुद न कर पाये और उनकी परवरिश के लिए उनको ननिहाल भेजें।, बच्चों की परवरिश ननिहाल में हो, उसको अध्यापक कहा जाता था, ठीक है क्या हुआ जो एक अध्यापक इन सब दुसवारियों से निकल कर आधुनिक हुआ है उसने अपना घर बना लिया। उसके कपड़े पहनने का अंदाज बदल गया, अब वो कभी कभी जींस टी शर्ट भी पहन लेता है बुलेट से भी चलता है उसने कार भी ले ली है, आंखों में काला चश्मा भी लगाता है, ये सब बातें हमें फंस नहीं रही हैं क्योंकि हमें आदत है उसके संसत्तावन का अध्यापक देखने की हमें जलन है। हमें चि��़ है उसने अपने आपको इतना कैसे बदल लिया, कितनी सैलरी आ गई, लेकिन आपने एक बार भी उसकी मेहनत की तरफ देखने का प्रयास नहीं किया, यदि आप देखते तो आपकी रूह काँप जाती इसका मतलब ये नहीं कि सन् 57 वाले नजरिए से ही हम अध्यापक को देखें, ओ भी एक इंसान है और मानव रूप में अवतरित होकर के इस जीवन के संसाधनों का उपयोग उपभोग करना सबका अधिकार है तो एक अध्यापक का भी ये ही अधिकार है उसको समाज से आप अलग क्यों करते हैं, केवल अ���्यापक पे तोहमत लगाना ये उचित बात नहीं, आज पूरा समाज संक्रमण के दौर से गुजरा रहा है परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है, अध्यापक ने भी अपनी आर्थिक उन्नति की है लेकिन अध्यापक की आंखों में काला चश्मा, जींस, टीशर्ट गाड़ियों से चलना कुछ लोगों को रास नहीं आ रहा है, जिनको रास नहीं आ रहा है वही कहते हैं कि अध्यापक स्कूल नहीं जाता, पढ़ाता नहीं, कुछ करता नहीं, जबकि हकीकत ये है कभी आपने देखा है कि प्राइमरी स्कूल में पढ़ने वाले ��िसी बच्चे के लिए ट्यूटर लगे हों नहीं न, जो ट्यूटर पढ़ाता है उसकी भी पढ़ाई प्लस अपनी भी पढ़ाई हमारा शिक्षक अकेले ही इस अपने सरकारी स्कूल में करा देता है, लेकिन यदि आपने प्राइवेट स्कूल में आपने बच्चे का नामांकन कराया है, वो चाहे कितना भी नामचीन शहर का सबसे महंगा स्कूल हो, कितने बड़े शहर का हो, लेकिन यदि बच्चे के लिए आपने 1, 2 ट्विटर नहीं रखे तो फिर उसका बेड़ा राम ही पार करेंगे, उसका क्या होगा, कोई नही�� जानता, इसलिए मेरा आप सभी से अनुरोध है कि इन सरकारी स्कूल के शिक्षकों की महत्ता को पहचानिए वो अच्छे से जीवन जीना चाह रहे हैं उनको जीवन जीने दीजिए, उनके लिए और बेहतर संसाधन हम सभी को देना है, ताकि समाज को एक सुशिक्षित मानव संसाधन हमारे अध्यापक दे सके, जय हिंद जय भारत, जय शिक्षक, राकेश सिंह जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अलीगढ़ 7/8/25
ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था क्या ऐसे ही बनेगी… लोन न चुकापाने पर ग़रीब की पत्नी को तो बैंकवाले बंधक बना रहे हैं लेकिन सत्ता के करीबी जो लोग बैंकों का खरबों लेकर, भाजपाइयों द्वारा विदेश भगा दिये गये उनका क्या?
यही है भाजपा की नारी वंदना का कड़वा सच।