देश के पत्रकारों को सारे बदलाव की उम्मीद अभिजीत दीपके से ही है क्या? जैसे सवाल पूछ रहे हो जैसे उसके लिये उतावले हुए जा रहे हो वैसे ही कभी किसी ज़िम्मेदार आदमी के ख़िलाफ़ भी तो बोलकर देख लो न...
यहाँ कमज़ोर या चुप रहने वाला कोई भी आदमी हमेशा TRP का ज़रिया होता है इनके लिये।
हाथरस में एक पीड़िता के ख़िलाफ़ रातों दिन लड़ने वाले लुच्चे लफंगे हैं जो सवर्ण जाति के हैं,
वो सब आज एक दूसरी एलीट क्लास की दलित के समर्थन में खड़े हो रहे हैं वो भी केवल दूसरे दलित के खुन्नस में।
ये केवल अवसरवादी ��ोग हैं और कुछ नहीं।
आप 22 साल से पत्रकार हैं। हमें भी 50 साल होने को आए। भाषण मत दीजिए। लोकतंत्र सहमा हुआ है तो अपना जिम्मा निभाइए, सरोकार दिखाइए। पत्रकारों पर हिंसा शर्मनाक है। मगर पत्रकार झूठ बोलते हैं तो उनकी कद्र खत्म हो ��ाएगी। टीवी पर लोग अब भरोसा नहीं करते हैं। क्या आपको इसकी जरा फिक्र नहीं?
मन बहुत खिन्न है, चैनल के कर्मचारियों के साथ हो रही मार-पीट देखकर ठीक से नींद भी नहीं आ रही।
CJP वालों को तुरंत ये हिंसा का चक्र रोकना चाहिए। सबको साथ लेकर टाइम्स नाउ और अन्य चैनलों के दफ्तरों में जाना चाहिए और माफी मांगनी चाहिए।
हिंसा से कुछ हल नहीं होता
🙏🏼
जिसे अंधभक्त गूंगा कहते थे, उसने सबसे ज्यादा प्रेस कॉन्फ्रेंस की है। जो ज्ञान का भंडार है, पॉलटिकल साइंस में MA किया है, वो इस तस्वीर में बड़ी मुश्किल से मिला है।
मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित बरगी डैम में पर्यटन विभाग का एक क्रूज अचानक आई तेज आंधी के चलते डूब गया। अब तक 9 शव मिल चुके हैं।
हादसे में मरिना मैसी और उनके चार साल के बेटे त्रिशान की भी मौत हो गई। बचाव में लगी टीम को आज सुबह दोनों के शव मिले। मां ने अपनी ही लाइफ जैकेट के भीतर अपने कलेजे के टुकड़े को समेट लिया था। उसने बच्चे को अपने सीने से इतनी मजबूती से चिपकाया था कि काल का क्रूर झोंका भी उन्हें अलग नहीं कर सका।
रेस्क्यू टीम ने जब उन्हें बाहर निकाला, तो दोनों के शव एक-दूसरे को बाहों में जकड़े हुए थे। यह परिवार दिल्ली से घूमने आया था। पिता प्रदीप मैसी और बेटी सिया किसी तरह अपनी जान बचाने में कामयाब रहे।