अगर बैठने के लिए कुर्सी और टैंट लग जाता त��� इतनी भीड़ थी कि चार रामलीला मैदान भर जाते । गांधी म्यूजियम से लेकर रामलीला मैदान भीड से पटा हुआ था। गोदी मीडिया ने दिखाया नहीं।
#boycott_godimedia
Ops बहाल करो
एक और बड़ी समस्या को सम्मानित पत्र दैनिक हिंदुस्तान द्वारा अपनी पड़ताल में पाया गया जिससे शिक्षक मानसिक रूप से परेशान है। बहुत बहुत आभार दैनिक हिंदुस्तान 💐🙏🏻
हमारे यशस्वीमुख्यमंत्री जी ने एक अधिकारी के ऊपर हाथ क्या रख दिया।वोअधिकारी पूर्वाग्रहोंसेग्रस्त होकर विभाग को चलारहा है।लेकिन हमारे मुख्यमंत्रीजी को यह नहीं पता कि 5लाख शिक्षकों में यह अधिकारी पार्टी और सरकार का वोटबैंक खराब कर रहा है।अतार्किक ,अव्यावहारिक आदेश प्रतिदिननिकलता है
OPS में का बा:
ops में बुढ़ापा सुरक्षित बा
ops में निश्चित वेतन बा
ops में DA जुड़त बा
ops में सरकारी नौकरी का फल बा
NPS ���ें का बा:
nps में टेंशन बा
nps में अनिश्चित वेतन बा
nps में ना DA जुड़त बा
nps में बुढापा असुरक्षित बा
#VoteforOPS
#OPS
@vijaykbandhu
@dksingore
जुलाई में विद्यालय खुलते ही मनसपुर गांव के सरकारी विद्यालय के टीचर उत्सुकता से विद्यालय पहुंचे। ग्रीष्मावकाश के बाद विद्यालय खुल चुका था। उन्होंने पूर्व में ही आकर साफ सफाई करा दी थी, अभिलेख व्यवस्थित करके शांत मुद्रा में बैठकर चेहरे पर हल्की मुस्कान लिए वो बच्चों की प्रतीक्षा करने लगे।
तय समय पर प्रार्थना सम्पन्न हुआ तो बच्चों की उपस्थिति देखकर उन्हें बड़ा अचरज हुआ कि बच्चों की संख्या तो नियमित से भी कम है।
उन्होंने सोचा कि शायद कुछ बच्चे कल से आएं या कहीं गए होंगे।
वे मुस्कुराए और छात्र छात्रा उपस्थिति लेकर कक्षा में प्रस्थान किये। उपस्थिति लेते समय उन्हें कक्षा के अन्य बच्चों से पता चला कि कुछ बच्चे जिसमे *करन* भी है, वो प्राइवेट विद्यालय में जा रहे हैं, उनका नामांकन वहां हो गया है।
टीचर ने यह सुनकर उपस्थिति लेना बंद कर दिया और एकदम से ही शांत हो गए, उन्हें याद आने लगा कि किस तरह *करन* को वो आये दिन घर से बुलाकर लाते, कॉपी देते, पेन देते, कई बार बाल में कंघी करने और नहाने के लिए डांटा भी था, कई बार उसे उसकी फ़टी हुई जेब सिलाने के लिए कहते, और उसके घरवालों से भी उसके विषय मे बात करते।
कैसे उन्होंने *करन* को समझना सिखाया, कारण खोजना सिखाया, वर्णमाला, हिंदी अंग्रेजी पढ़ना, सिखाया, गणित का बुनियादी ज्ञान कराया।
*करन* अब कक्षा 2 में ��ला गया था, वो एक मेधावी छात्र था, अब वो प्राइवेट विद्यालय में कक्षा 1 का छात्र है।
लेकिन *करन* के पिता *झबरू* अत्यंत ही समझदार व्यक्ति थे। जब तक वो सरकारी विद्यालय में आता रहा, उसकी कोई खबर नहीं ली, कलम नहीं, कॉपी नहीं, धुला ड्रेस नहीं, बैग नहीं, 1200 मिला तो विवाह में न्यौता पूरा किया, नहाया या नहीं, कोई मतलब न था।
अब वो *करन* के प्रति जागरूक हो गए थे, कारण किसी ने *करन* के बुद्धि की प्रशंसा कर दी थी।
खैर, ���गले दिन टीचर फिर विद्यालय पहुंचे, कुछ समय बाद *समझदार झबरू* जी का विद्यालय में प्रवेश हुआ, पहले उन्होंने *करन* की तरक्की के बारे में टीचर से बताया।
अचानक *झबरू* ने बात घुमाई और अपनी छोटी बेटी *सोनी* को आगे कर दिया।
*"माट साब एकर नाम लिख लीं"-* झबरू ने कहा।
टीचर शांत हो कर सुनते रहे, उनके अंदर जिस प्रकार के भाव थे, वो बस एक शिक्षक एक गुरु ही समझ सकता है।
कुछ देर शांत ��हने के बाद उन्होंने *सोनी* को अपने पास बुलाकर उसका नाम पूछा और उसे विद्यालय दिखाने के लिए चल पड़े।
*झबरू* उन्हें जाते हुए देखता रहा और मुस्कुराता रहा लेकिन किस पर वो बस वही जाने....
*एक शिक्षक का एक आम दिन*
बेसिक विद्यालयों की वास्तविक स्थिति। बेसिक से लेकर उच्चशिक्षा तक तुलनात्मक अध्ययन करनेपर बेसिक विद्यालयों का समय 6 घण्टे सबसे ज्यादा है जबकि बच्चे सबसे छोटे हैं। मनोवै��्ञानिकों के अनुसार इनके लिए समय 5 घण्टे से ज्यादा नहीं होना चाहिए @myogiadityanath @myogioffice @thisissanjubjp
#अन्याय_दिवस
आज के दिन up के #शिक्षामित्रों की न्यायिक हत्या की गई थी जीवन के 20 बरस बेसिक शिक्षा पर कुर्बान कर दिया लेकिन आज भी बेबसी और लाचारी का जीवन जीने को मजबूर हैं #शिक्षामित्र परम आदरणीय हिन्दू ह्रदय सम्राट जनमानस के दिलों पर राज करने वाले @myogiadityanath जी न्याय करें
शिक्षक समीक्षा केंद्र भी बनना चाहिए जहाँ शिक्षक अपनी समस्याओं को दर्ज करा सके और विभाग के बाबुओं के कार्यों की भी Real time monitoring हो सके। कि बाबू कर क्या रहे हैं।