किसान छोटा कर्ज़ न चुका पाए तो नाम और पोस्टर लगाकर बदनाम किया जाता है, वहीं ₹100 करोड़ से ऊपर के लोन डिफॉल्टरों के नाम ‘privacy’ के नाम पर छिपाए जा रहे हैं।
बात सिर्फ़ सुभाष चंद्रा के ₹22,000 करोड़ के कर्ज़ को ₹6.5 करोड़ में निपटाने की नहीं है। जिनका हिसाब हमें मिलना चाहिए, वही खबर गायब है।
#LoanWriteOff #HairCut
सुनिए जंतर मंतर की इस बेटी का दर्द !
- ऐसा ऑर्डर देने वाला अधिकारी अगर मुझसे माफी मांग ले तो मुझे भी बहुत खुशी होगी
मुस्कान शर्मा वही प्रोटेस्टर हैं, जिनके साथ एक पुलिसकर्मी ने प्रोटेस्ट के दौरान दुर्व्यवहार किया था और डंडा घुसाने की कोशिश की थी.
“BJP विधायक विनोद सिंह ने मेरे साथ रेप करने की कोशिश की, शराब के नशे में मेरे प्राइवेट पार्ट छुए और कपड़े फाड़ दिए
अब वो मेरी बेटी पर एसिड अटैक करवाने की धमकी दे रहे हैं. पुलिस वाले मेरी लोकेशन निकालकर BJP विधायक को देते हैं”
ये काली करतूत यूपी के सुल्तानपुर से BJP विधायक विनोद सिंह की है
ऐसे ही दरिंदों से भरी पड़ी है BJP
RSS द्वारा देश के केंद्रीय विश्वविद्यालयों पर क़ब्ज़े की कहानी : भाग 2
आजकल शिक्षा जगत पर RSS के बढ़ते प्रभाव और विश्वविद्यालयों के भगवाकरण को लेकर देशभर में गंभीर चर्चा चल रही है। ऐसे समय में मैं आपके लिए कुछ ऐसे सबूत साझा करने की यह श्रृंखला लेकर आया हूँ, जिन्हें हमने पिछले कई वर्षों से लगातार आपके सामने रखा ��ा, ताकि समय रहते आपको आगाह किया जा सके। आज वही सवाल राष्ट्रीय बहस का विषय बन चुके हैं।
यह वीडियो भी कुछ महीने पुराना है, जिसे मैंने अपने सोशल मीडिया संग्रहालय से आपके लिए निकाला है। इस वीडियो को स्वतंत्र पत्रकार @harshdelhise ने बनाया था। आज इसे दोबारा साझा करने का उद्देश्य केवल इतना है कि लोग देखें—जो बातें तब कही जा रही थीं, वे आज किस तरह वास्तविकता के रूप में हमारे सामने खड़ी हैं।
दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों में "युवा कुंभ" जैसे आयोजनों के नाम पर RSS से जुड़े कार्यक्रम खुलेआम आयोजित किए जा रहे थे। कई जगह कॉलेज प्रशासन अलग-अलग नामों से अनुमति देकर इन कार्यक्रमों का हिस्सा बनता दिखाई दिया। ऐसे आयोजनों को लेकर छात्र संगठनों और शिक्षकों के एक वर्ग ने विश्वविद्यालय की संस्थागत नि���्पक्षता पर सवाल उठाए और विरोध भी दर्ज कराया।
विश्वविद्यालय विचार, बहस, शोध और आलोचनात्मक चिंतन के केंद्र होने चाहिए। लेकिन जब सार्वजनिक शैक्षणिक संस्थानों का उपयोग किसी एक वैचारिक एजेंडे के प्रचार के लिए होने लगे, तो यह केवल एक कार्यक्रम का सवाल नहीं रह जाता, बल्कि विश्वविद्यालयों क�� स्वायत्तता और लोकतांत्रिक चरित्र का प्रश्न बन जाता है।
छात्र विरोध में उतर चुके हैं, जनता सवाल पूछ रही है और कैंपस का माहौल बिगाड़ने की यह कोशिश अब सबके सामने है। सरकारी संस्थानों को किसी भी वैचारिक या राजनीतिक प्रभाव का माध्यम बनाने की प्रवृत्ति पर गंभीर बहस और जवाबदेही दोनों आवश्यक हैं।
यह श्रृंखला आगे भी जारी रहेगी। दस्तावेज़ों, वीडियो और तथ्यों के साथ हम उन घटनाओं को सामने लाते रहेंगे, जिन्हें उस समय नज़रअंदाज़ किया गया, लेकिन जिनके परिणाम आज पूरे देश के सामने दिखाई दे रहे हैं।
जंतर-मंतर से उठती आवाज़ को लाठियों से दबाया नहीं जा सकता।
ये युवा हथियार लेकर नहीं आए थे। इनके हाथों में संविधान पर भरोसा था, अपने भविष्य की चिंता थी और व्यवस्था से संवाद की उम्मीद थी। लेकिन उनकी आवाज़ का जवाब अगर पुलिस बल और लाठियों से दिया जाएगा, तो यह केवल कुछ प्रदर्��नकारियों पर नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक असहमति की भावना पर प्रहार माना जाएगा।
कारसेवकों पर गोली चली - भाजपा 35 साल से इस एक घटना को बार-बार दोहराती रही है। लेकिन क्या भाजपा अयोध्या का पूरा इतिहास बताने का साहस करेगी?
क्या वह बताएगी कि 1990 में अदालत का आदेश क्या था और प्रशासन के सामने परिस्थितियाँ क्या थीं? क्या वह 1992 में सुप्रीम कोर्ट को दिए गए आश्वासनों और उसके बाद हुए विध्वंस की कहानी भी उतनी ही जोर से सुनाएगी? क्या वह बताएगी कि सुप्रीम कोर्ट ने उस विध्वंस पर क्या टिप्पणी की थी?
और सबसे दिलचस्प सवाल - 1990 में मुख्यमंत्री कार्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था के केंद्र में ��हे नृपेंद्र मिश्रा आगे चलकर भाजपा के इतने भरोसेमंद कैसे बने कि नरेंद्र मोदी ने उन्हें अपना प्रधान सचिव बनाया और बाद में वही राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष बने?
भाजपा की राजनीति की सबसे बड़ी ताकत शायद यही रही है - इतिहास से अपने काम के पन्ने निकालो, बाकी छिपा दो और आधे सच को बार-बार दोहराकर पूरा सच बना दो।
इस वीडियो में नारा नहीं, पूरी कहानी है। 1990 भी है, 1992 भी। अदालत के आदेश भी हैं और भाजपा स�� वे सवाल भी, जिनके जवाब उसके भाषणों में नहीं मिलते।
वीडियो देखिए और साझा कीजिए - क्योंकि इतिहास आधा नहीं, पूरा बताया जाना चाहिए।
" मुझे नौकरी चाहिए "
यू ट्यूब पर इस गाने को 100M से ज्यादा लोगों ने सुना था, उसके बाद सरकार ने इस गाने पर बैन लगा दिया और यू ट्यूब से डिलीट करवा दिया। अब पुनः इस गाने को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने का प्रयास है।
- ईरान हमें ट्रांसपोर्ट और इंश्योरेंस फ़्री दे रहा था.
- भारतीय रूपयों में दे रहा था.
- 60 रुपए का क्रेडिट दे रहा था.
- 12% का अंतरराष्ट्रीय लागत से रिबेट था.
- 50 से 60 हज़ार करोड़ ईरान के पै��े रुपयों में हमारे बैंक में रखे थे।
और अब हम अमेरिका से कई गुना महंगा ईंधन खरीद रहे हैं कहते हैं गुजराती व्यापारी कभी घाटे का सौदा नहीं करते, लेकिन हमारे ‘डंकापति’ तो उल्टा ही कर रहे हैं।
आख़िर ऐसी कौन-सी मजबूरी है कि देश का खज़ाना घाटे में डाला जा रहा है..?
दिल्ली पुलिस के SHO का खुलासा–
“हम लोग इनको (नशे के कारोबारी और अपराधियों को ) पकड़ते हैं तो CM से ऑर्डर आता है और इन्हें छोड़ना पड़ जाता है, हमारे हाथ कटे हुए हैं।”
देखें वीडियो👇
सुल्तानपुर में पूर्व मंत्री राणा अजीत प्रताप सिंह ने सैकड़ों गुं*डों के साथ सुरेश यादव के घर में घुसकर हमला किया
सुरेश यादव के परिवार के 6 सदस्य गंभीर रूप से घायल है जिन्हें लखनऊ रेफर किया गया है, पूरा गांव दहशत में है। आतंक की प्रयोगशाला बना दिया है उत्तर प्रदेश को अजय सिंह बिष्ट ने।
बाबा की जाति के लोग बेलगाम हैं।
जो जाँच सरकार की मंशा के खिलाफ़ आदेश देते हैं उनका ट्रांसफर कर दिया जाता है! कौन करता है ये ट्रांसफर? यह तो न्यायपालिका और सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट का अधिकार है। क्या यह मान लिया जाए कि आज हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट सरकार की कठपुतली बन गया है?
2024 के लोकसभा चुनावी झटके के बाद मोदी जी को तीन “समस्याएँ” दिखीं — देश, काल और पात्र
देश (स्थान): जहाँ समर्थन कम है, वहाँ इलाज डीलिमिटेशन — संसद में आवाज़ कम
काल (कैलेंडर): बार-बार की परीक्षा से बचने को वन नेशन–वन इलेक्शन — पाँच साल में एक बार, सब मैनेज
पात्र (लोग): जो असहज हैं, उनका इलाज SIR — नाम काटो, खेल आसान
लोकतंत्र रहेगा, चुनाव होंगे,
और बीजेपी की जीतने की गारंटी भी ह��गी!
वीडियो: https://t.co/fF0RWPPpSz
देश की राजधानी में मौजूद सबसे बड़े प्रतिष्ठित केंद्रीय विश्वविद्यालय @UnivofDelhi पर इतने गंभीर आरोप लगाती इस छात्रा का एक वीडियो वायरल है. डीयू और प्रशासन तत्काल जाँच करे कि क्या मा���ला है. अगर ये लड़की सही बोल रही है, तो आरोपी प्रोफ़ेसर को तत्काल कठोर सजा मिले.
बाक़ी #प्रोफ़ेसर_की_डायरी में मैंने उन तमाम आने वाली ऐसी मुश्किलों को बता दिया था कि अभी देश के ये विश्वविद्यालय बर्बादी के मुहाने पर खड़े हैं. आगे और बर्बाद होंगे. मगर इतनी जल्दी और ऐसी क़िस्म की बर्बाद���याँ होंगी, सोचा न था. ये देखकर शर्मिंदगी है हमें कि एक समय ये हमारा कैंपस था.
शिक्षा की तबाही के इतने रूप हैं कि कैम्पसों के बाहर के लोग हैरान रह जाएँगे. हर क़िस्म के भ्रष्टाचार, अमानवीयता और धांधली के अड्डे बन चुके हैं ये कैंपस. सत्ता जानबूझकर ऐसा कर रही. सोचने समझने वाली जगहें जब बर्बाद या ग़ुलाम हो जाएँगी, तभी तो पाखंडी अंधभक्त भीड़ पैदा होगी.
मैं कामना करता हूँ कि ये वीडियो झूठी हो. हम इसकी ��ुष्टि नहीं करते, मगर अकादमिक संस्थान पर ऐसी वीडियो सामने आए तो इस पर बात ज़रूर करनी चाहिए ताकि जाँच तो हो. इसकी सच्चाई तो प्रशासन बताएगा. मगर यदि यह सही है, तो शर्मनाक है. भयावह है.
कल बिहार के साथियों से भेंट करने के बहाने का एक बेहद अहम और ज़रूरी आयोजन हो रहा है. बिहार और आस आस-पास के साथी ज़रूर आएँ. यह बिहार के लिए बड़ा आयोजन है. इसके गहरे निहितार्थ हैं. कल पटना के एएन सिन्हा इंस्टीट्यूट में दोपहर एक बजे मुलाक़ात होगी.