हमारी भाषा का लगभग 50% हिस्सा संस्कृत से आया है। हमारे बहुत से नाम संस्कृत के हैं।
मैंने अपना DNA टेस्ट करवाया और मुझे पता चला कि मुझमें भारतीय DNA है���
जब भी मैं कोई संगीत सुनता हूँ, खासकर भारतीय संगीत, तो मेरा शरीर अपने-आप थिरकने लगता है।
हमारी सभ्यता और संस्कृति पर भारतीय सभ्यता का गहरा प्रभाव है।
: प्रबोवो सुबिआंतो, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति
जम्मू कश्मीर से अमरनाथ यात्रा के लिए जा रही हिंदुओं की टोली को सुरक्षा देती भारतीय सेना |
मतलब जिस देश में जंतर मंतर पर खड़े हो कर दो गोले हिंदू भाईचारा का जाप करते नहीं थकते | 😡
उसी देश के कश्मीर में अमरनाथ यात्रा के लिए जाने वाले हिंदुओं को सुरक्षित रखने के लिए सेना को लगना पड़ता है |
रामलला, राम मंदिर और राम भक्त पर समाजवादी पार्टी की सोच देखिए!
"मुलायम सिंह के चलते जिन्होंने बाबरी मस्जिद को छूने की कोशिश की, वे गुंबद पर चढ़ तो गए, लेकिन उतर नहीं सके - ये रिकॉर्ड है।
इस बात का समाजवादी पार्टी के नेताओं को न कभी अफसोस था, न रहा है और न रहेगा। चाहे उनको मौलाना मुलायम सिंह कहें। हिंदू हमें वोट दें या न दें, हमें फ़र्क़ नहीं पड़ता।"
: रामगोपाल यादव, सांसद, सपा
क्या श्यामा प्रसाद मुखर्जी से नेहरू डरते थे?
श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मौत की जांच से नेहरू को डर क्यों लगने लगा था?
पूरा वीडियो : https://t.co/l8Gr8DyU5d
जो कहा, सो किया! ✅
जब आंकड़े खुद सच बयान कर रहे हों, तब आंखें मूंदना देश के भविष्य से खिलवाड़ है। 2011 की जनगणना के अनुसार:
* असम में मुस्लिम समुदाय की दशकीय वृद्धि दर 29.6% रही
* पश्चिम बंगाल के कई जिलों में यह वृद्धि 40% से ऊपर पहुंची
* सीमाव���्ती इलाकों में आंकड़ा 70% तक दर्ज हुआ
* झारखंड में जनजातीय आबादी में गिरावट का बड़ा कारण अवैध घुसपैठ माना गया
यह सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि भारत की जमीन, संस्कृति और पहचान से जुड़ा गंभीर सवाल है।
इसी चुनौती को देखते हुए 15 अगस्त 2025 को लाल किले से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने ‘डेमोग्राफिक मि��न’ की घोषणा की थी।
और आज, 26 मई 2026 को ‘High Level Committee For Demographic Change’ के गठन के साथ मोदी सरकार ने फिर साबित किया — वो सिर्फ वादे नहीं करती, उन्हें जमीन पर उतारती भी है। 🇮🇳
गजब का टैलेंट!🤯
सुबह ईरान गुनहगार, तो दोपहर होते-होते मोदी जी जिम्मेदार!
सुबह का भूला अगर शाम को राजनीति में आ जाए, तो भी उसे भूला ही कहते हैं! 🤷♂️😂
अगर परिसीमन में देरी होती है या इसे नहीं किया जाता तो क्या होगा?
यदि कुछ नहीं किया गया, तो अगले जनगणना के बाद अनुच्छेद 81, 82 और 330A स्वतः लागू हो जाएंगे, जिससे मौजूदा 543 सीटों का पुनर्वितरण केवल जनसंख्या के आधार पर किया जाएगा।
केरल का उदाहरण लें, आज 20 सीटें हैं, लेकिन यदि 2027 की अनुमानित जनसंख्या के आधार पर पुनर्वितरण हुआ, तो यह घटकर 14 रह सकती हैं।
मोदी सरकार का प्रस्ताव इस��े बिल्कुल विपरीत है, यह मौजूदा प्रतिनिधित्व की रक्षा करते हुए सीटों में वृद्धि सुनिश्चित करता है।
यह स्पष्ट रूप से नुकसान नहीं, बल्कि लाभ का मामला है।
लोकसभा में मेरी टिप्पणियाँ देखें।
‘एक देश-एक विधान’ लागू किए बिना ‘विकसित भारत’ और ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ बनाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है
इसलिए जाति, भाषा, क्षेत्र, मजहब और लिंग के आधार समाज को बांटने वाला कानून ���माप्त होना चाहिए और ‘एक देश-एक विधान’ लागू होना चाहिए
@PMOIndia @narendramodi
सूफी कोई म्यूजिक नहीं, फिलोसॉफी है।
सूफी-फूफी सन 2000 के बाद आया।
आप किसी भी गाने में अल्लाह-मौला जोड़कर उसे सूफी नहीं बना सकते।
: सोनू निगम, प्रसिद्ध गायक
राहुल की दादी के कारनामे देखिए कि किस तरह संवैधानिक संस्थाओं की ऐसी-तैसी कर रखी थी।
एक वकील साहब थे, जो उनके लिए मुकदमे लड़ते थे। उन्हें दो बार राज्यसभा भेजा गया। राज्य सभा से उन्हें असम हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बना दिया गया।
वे हाईकोर्ट से रिटायर हो गए, उसके बाद उन्हें सुप्रीम कोर्ट में जज बना दिया गया। यह हिंदुस्तान का एकमात्र ऐसा मामला है, जिसमें रिटायर होने के बाद किसी को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया गया।
उनसे कांग्रेसी नेता जगन्नाथ मिश्र के पक्ष में फैसला दिलवाया गया। फैसला देने के अगले ही दिन उन्होंने सुप्रीम कोर्ट जज के पद से इस्तीफा दे दिया। उसके बाद उन्हें फिर ��ाज्यसभा भेज दिया गया।
यह शायद दुनिया के इतिहास का इकलौता मामला है। अब बताइए, @RahulGandhi की दादी को “प्लास्टिक लेडी” कहा जाए या “आयरन लेडी”?
@Aamitabh2
They are preparing missionaries for their faith; we are only preparing doctors and engineers who know nothing of their roots.
Don’t wait until it’s too late to remember the warnings of Veer Savarkar and Swami Shraddhanand. Teach your children to be proud Sanatanis first! 🙏
फेसबुक पर एक शिक्षिका हैं, उन्होंने पोस्ट किया है:
पता नहीं हर जिले में ऐसा है या केवल अमेठी में छह महीने से यह हो रहा है कि तीन तीन महीने तक एमडीएम का कन्वर्जन कास्ट नहीं आता है...
130 बच्चों में प्रत���दिन 122/125 बच्चे तक उपस्थित रहते हैं,परीक्षा में तो शत प्रतिशत उपस्थिति रहती है..उन्हें गुणवत्ता पूर्ण भोजन कराने का खर्च कितना है अंदाज़ा लगाइए ..फल,सब्जियां,दाल,तेल,मसाले की कीमत तो जाने दें नमक की कीमत भी ग्रांट पास करने वालों को पता नहीं होगी...
साथ ही भोजन बनाने में एक महीने में लगभग चार गैस सिलेंडर का खर्च होता है और सिलेंडर तथा दूध का एक रुपया सरकार नहीं देती है..( सिलेंडर मुफ़्त न दें तो उसपर सब्सिडी ही दे देते,लेकिन नहीं जी मास्टर उसे अपनी जेब से दें या एमडीएम में एडजस्ट करें,अब जिनके यहां अधिक ना��ांकन और कम उपस्थिति है वह तो एडजस्ट कर भी लें पर जिनके यहां नामांकन और उपस्थिति लगभग प्रतिदिन समान हो वह क्या करें?)
लोकल होने के कारण हमें बनिया से लेकर सब्जी,फल वाले सामान उधार दे देते हैं पर आख़िर कितने महीने वह उधार दें और अगर मास्टर अपने पास से लगाए तो कितना लगाए और कब तक लगाए क्योंकि महीने में पां�� दस हज़ार नहीं बीसों हज़ार रुपए भोजन में खर्च होते हैं..
मास्टर चोर हैं,निकम्मे हैं,भ्रष्टाचारी हैं मान लिया किंतु बड़े साहब लोग आप लोग एक महीने ही बिना ग्रांट के गुणवत्ता पूर्ण भोजन बनवा कर बच्चों को खिला दें ताकि हम लोग आपसे सीख सकें कि बिना पैसों के कैसे नियमों का पालन होता है..
बाक़ी रसोइयां लोगों की इतनी कड़ी मेहनत,काम के घंटों के हिसाब से महीने में मात्र दो हज़ार रुपए मानदेय है और वह भी ���र महीने रेगुलर न आकर तीन चार महीनों में मिलता है उसकी तो कोई सुधि ही नहीं लेने वाला है(काश इन्हें मनरेगा से जोड़ देते तो भी कुछ बेहतर होता)
स्कूल में अपने बच्चों का मुँह देखकर हर समस्या भूल जाने वाले मास्टर किससे गुहार लगाएं, कहां जाएं?
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@CMOfficeUP से आग्रह है कि इसका संज्ञान लें और निदान करें। साथ ही, यह भी देखें कि क्या ��ह समस्या व्यापक है?
आपमें से किसी की भी कोई पहुँच हो शिक्षा विभाग तक तो इसे आगे बढ़ाएँ।
स्काउट के नाम पे अब तो,
फ़ौज खड़ी कर डाली है..
उन पर क्या विश्वास करें हम,
जिनकी नीयत ही काली है...
दाढ़ी टोपी पहन के वो तो,
फौजी बन कर घूम रहे हैं..
हरे रंग का झंडा सारे,,
अपने होठों से चूम रहे हैं.
वही जमीयत यहाँ खड़ी है,,
जिस पर हलाल का दाग लगा है..
जहरीला फन हमने पहचाना,
जिनके मुंह में झाग लगा है..
पूरा लश्कर खड़ा कर दिया,
यहाँ जिहादी मदनी ने..
फर्क दि���ाया हमने हरदम,
उसकी कथनी व करनी में.
बस मैं खुल कर आगे आया हूँ,
संकट में फिर देश हमारा..
धर्म की खातिर सर्वस्व समर्पित,
इतना है संदेश हमारा..
हम लोगों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में एक स्वयंसेवक के रूप में काम किया है...
यहां कोई OPEC देश पैसा नहीं देते, यहां कोई इंटरनेशनल चर्च पैसा नहीं देता,
यहां समाज के सहयोग से संगठन खड़ा हो रहा है...
1096 दिवस, 20,000 किलोमीटर, 1.7 करोड़ श्रद्धालुओं का संकल्प कि वो जातिगत भेदभाव त्याग कर, एक हिन्दुत्व की छाया में राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देंगे!
@swamidipankar को नमन कि उन्होंने अपनी ‘भिक्षा यात्रा’ से समाज में एकत्व की क्रांति लाने का कार्य किया है!