The most terrible part about starting a podcast is that one has to defend the indefensible and scrape the bottom of the barrel for guests.
This is also why nobody trusts legal platforms - it’s a cozy little circle jerk - designed for lawyers and judges, not the people.
फिल्म "हनुमान अंश" के दो गाने-
मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान
जब जिद पे आ गई पार्वती
ना तो गायक जावेद अली है, ना संगीतकार ए आर रहमान है ना गीतकार जावेद अख्तर ..गानों में कोई भयंकर आर्केस्ट्रा ��हीं है,धूम धड़ाका नहीं है, साधारण से गाने हैं जो दिल को छू रहे हैं, सुपरहिट हो रहे हैं।
Jauhar is not glorified enough.
Sati Pratha is not condemned enough.
We rightly teach about the latter as an ill that we got rid of. There is no risk of anybody imitating Jauhar. Yet, we seldom spoke about it because it did not suit the objective for whatever partisan reason
मुल्ले शवों के साथ भी रेप करते थे। पाकिस्तान में आज भी वही हो रहा है। इसलिए हिन्दू स्त्रियाँ जौहर करती थीं। किसी दो कौड़ी की मुल्ला प्रेमी, करियर में फुँक चुकी लौंडी के लिए यह समझना कठिन हो सकता है क्योंकि उसके लिए उसकी ‘पुसी फॉर अ रेंट’ ही जीवन का सत्य है।
ऐसी लौंडियाँ सेक्स को स्वतंत्रता मानती हैं, जितनों के साथ सेक्स, उतनी अधिक स्वतंत्र। हर स्त्री ऐसा नहीं मानती। उनके लिए अरब के बाजारों में सेक्स स्लेव बनना उतना अडवेंचरस और फुलफुलिंग नहीं दिखा होगा, जितना आइडेंटिटी क्राइसिस से जूझती, भैया कह कर सैंया बनाने वाली के लिए दिखता हो।
तुम नंगी हो कर एम्सटर्डम के बाजारों के शीशे में नाचों, तुम्हारी मुटल्ली देह भी किसी को पसंद आ जाएगी। हाँ, किसी योनि-केन्द्रित लौंडिया का नारीवाद यह तय नहीं करेगा कि दूसरी स्त्रियाँ रंडी बन कर ही घूमें क्योंकि तुम्हें रंडीपना बहुत पसंद है।
यह पोस्ट मैंने बहुत माइल्ड लिखा है। हिन्दू नारियों पर ऐसे आक्षेप का उत्तर मैं और भी अच्छी शब्दावली के साथ दे सकता हूँ।
एक IAS का खूब PR हो रहा है कि इस्तीफा दे दिया पर ये नहीं बताया जा कि रात के अंधेरे में राहुल गांधी से मिलने के बाद इस्तीफ़ा दिया है ताकि यूपी चुनाव में पप्पू का एजेंडा फैलाया जा सके।
सदैव राजा रहने की इच्छा थी इसलिए संयुक्त सचिव का पद रास नहीं आया क्यूँकि DM के बाद सीधा कमिश्नर बनना था। आत्ममुग्धता और pr की ललक इतनी अधिक कि मोद��� सरकार की हर घर जल योजना को अपना प्रयास बताकर उद्घाटन कर दिया जात��� था और स्थानीय सांसद को नहीं बुलाया जाता था।
क्या कारण था कि जिन जिलों में रही वहाँ के किसी जनप्रतिनिधि से नहीं बनी और हर जगह राजा की तरह व्यवहार किया? अब सारे जनप्रतिनिधि तो ख़राब नहीं हो सकते जिन्हें जनता ने 2-3 बार चुना हो।
इनके पति प्राइवेट नौकरी करते थे, इनके राजा बनने के बाद दलाली के धंधे में आ गए और करोड़ों रुपये इकट्ठा किए, जिसमें कुछ हिस्सा इनका पीआर करने वालों को जाता रहा, इसलिए उत्त�� प्रदेश के सैकड़ों IAS में से केवल एक नाम काम करता हुआ सुनाई देता था!
आखिरी बार वह कौन सा क्रिकेटर था जिसको आपने हिंदी में Instagram पोस्ट या किसी तस्वीर को साझा करते देखा था?जैसे जय जवान जय किसान एक संस्कृति है हिंदुस्तान की। उसी तरीके से उत्तर प्रदेश में पला बड़ा एक लड़का जो आज भारतीय टीम के लिए खेल रहा है। हि���दी भी उसकी जड़ है।
@dhruvjurel21 🫡
Names of four unknown students on Hunger strike in Jharkhand:
Savita Mahato
Ummeh Habiba
Rupesh Pal
Rahul Krantikari
One From JLKM party: Devendranath Mahato