जॉब छोड़ दी तो क्या हुआ मेंटेनेंस तो देना ही पड़ेगा ,
क्योंकि आदमी तो एटीएम मशीन होता है।
There are so many cases , where men are suffering silently . Let's raise voice for men rights .
#JusticeIsDue#AtulSubhash
@ajeetbharti अतुल जैसे लाखों पत्नी पीड़ित पुरुष फ़र्ज़ी मुकदमों के चक्कर मे जेल मे सड़ रहे हैं, और जो बाहर हैं वो अतुल के जैसे ही इस क्रूर व्यवस्था से तंग आकर आत्महत्या कर लेते हैं, लेकिन सुनने वाला कोई नही हैं
क्योंकि अतुल के जैसा हर पुरुष कानून की नजर मे शोषक ,दोषी है
न्याय की आशा छोड़ दो
अतुल सौरभ की आत्महत्या पर
अतुल की आत्महत्या के बाद सोशल मीडिया में जैसे चर्चा हो रही है, हम सब को लगता है कि इससे परिवर्तन हो जाएगा। मुझे ऐसा नहीं लगता।
अतुल सौरभ जैसे दर्जनों केस हर वर्ष होते रहते हैं। अतुल एक सुलझे हुए व्यक्ति थे जिन्होंने वीडियो और पत्र के माध���यम से अपनी पीड़ा और आत्महत्या के निर्णय पर प्रकाश डाला। हर पीड़ित के पास अभिव्यक्ति के साधन नहीं होते। वो बस तंत्र से हार कर मर जाते हैं।
तंत्र से जीतना असंभव है। अतुल की मृत्यु से कुछ नहीं बदलेगा। मैं आश्वस्त हूँ कि वही महिला किसी और से विवाह कर के, अपने बेटे को ग्रूम करते हुए, बाप के बारे में विषैली बातें करते हुए उसे पालेगी। संभवतः कोर्ट उसे अतुल की संपत्ति का पूरा ह��स्सा भी दे देगी।
जहाँ तक जज की बात है, जजों को जज बचा लेते हैं। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से ले कर जिला न्यायालयों के परिसर में धूल फाँकते वकील को भी पता है कि कोर्ट हर स्तर पर घुसखोरी का अड्डा है। तो, इस पर भी कोई चर्चा तक नहीं होगी।
परसों तक यह विषय समाप्त हो जाएगा और हमारे पास नया विषय आ जाएगा। यही सत्य है।
मैं अतुल से सहानुभूति भी रख कर क्या करूँगा? वो तो चले गए। अतुल को मरने से पहले ���क-दो को साथ ले कर जाना चाहिए था। मुझे ‘शूल’ फिल्म का अंतिम दृश्य याद आता है जहाँ मनोज बाजपेयी के पात्र को तंत्र ने विवश कर दिया कि वो विधानसभा में विधायक की कनपटी पर बंदूक रख दे।
समाज ऐसा ही न्याय चाहता है। संभवतः न्याय है भी वही। परंतु, कानून की पुस्तक में वो न्याय नहीं हत्या हो जाएगी। कानून की पुस्तक में अतुल ने आत्महत्या की है, पर समाज जान��ा है कि अतुल की हत्या की गई है।
न्यायपालिका के हाथ कानून से बँधे हो सकते हैं, पर जो पेशकार जज के नीचे बैठ कर पैसा लेता हो, और जो जज स्पष्ट रूप पाँच लाख माँग रही हो, उसे राह चलते कल को कोई गोली मार दे, तो वह अन्याय नहीं होगा। क्योंकि उस जज ने केवल घूस नहीं माँगा, उसने उस व्यक्ति की हत्या में अपना योगदान दिया है।
कई लोग कह रहे हैं कि जज को पैसे दे कर सेटलमेंट कर लेता, जीवन क्यों ले लिया अपना। यह बात आप ���सलिए नहीं समझ सकते क्योंकि कुछ लोग अपने आदर्शों से इस सीमा तक समझौता नहीं कर पाते। पेशकार को सौ रुपए देना भी घूस ही है, पर पेशकार से न्याय की आशा नहीं है।
वहीं, कोई जज हर बात जानते हुए भी आपको विवश करने लगे, तो आप ट्रिगर हो जाते हैं कि ये कब तक चलेगा? भगत सिंह चाहते तो असेंबली से भाग सकते थे बम फेंकने के बाद। वो नहीं भागे क्योंकि उन्हें लगा कि उनकी फाँसी से आंदोलन को ब�� मिलेगा।
अतुल की आत्महत्या भगत सिंह के स्तर की नहीं है, पर सोच वही है कि उसकी मृत्यु से कोई परिवर्तन हो, कोई नोट करे कि यह अपवाद नहीं, उदाहरण है। अतुल को जब लगा कि पूरा सिस्टम, न केवल उसे बल्कि उसके पूरे परिवार को टार्गेट करता रहेगा, उनके दिए पैसे ही उनकी पीड़ा का कारण बनेंगे तो उन्होंने यह कठिन निर्णय लिया।
हम स्वयं को ले कर जितनी चिंता नहीं करते, उससे अधिक अपने माँ-बाप या पत्नी-बच्चे को ले कर चिंतित रहते हैं। यदि वैसी परिस्थिति आती है, तो हम अपने लिए नहीं, उनकी पीड़ा को ध्यान में रख कर कॉम्प्रोमाइज करते हैं।
अतुल की आत्महत्या उसके परिजनों के लिए कॉम्प्रोमाइज है। उसे लगा कि वह यदि इस समीकरण से हट जाता है, तो बाकी हर व्यक्ति चैन से रह लेंगे। पुत्र का चेहरा भी उसे याद नहीं था, वह छोटा है, बड़ा हो कर उसे कदाचित् पिता का पक्ष समझ में आ जाए, ऐसा अतुल ने सोचा।
पुलिस, न्यायपालिका आदि जितनी भ्रष्ट हो सकती है, हो जाएगी। इनके लिए अतुल उन सैकड़ों नामों में से एक नाम है, जिसे ये हर सप्ताह वसूली का वॉलेट समझते हैं। उन तक ये वीडियो पहुँचा भी होगा तो ‘चू#% साला’ बोल कर समोसे खा लेंगे।
यही सत्य है। यही दुर्भाग्य है।
#AtulSubhash #JusticeIsDue
आपका नाम रीता कौशिक है , आप जौनपुर में प्रिंसिपल फैमिली कोर्ट जज हैं , अतुल प्रकाश नाम के व्यक्ति ने अपनी पत्नी और आपके ऊपर शोषण का और पैसे मांगने का दबाव वाला आरोप लगाने के बाद आत्महत्या कर ली, और अब सोशल मीडिया में लोग आपके ऊपर तरह तरह के आरोप लगा रहे हैं , क्या रानी अब जज बनकर घूंस भी नहीं मांग सकती ? क्या रानी अपने घर का तिमंजिला बनवाने के लिए , बच्चों को विदेश पढ़ाने के लिए और नौलख�� हार बनवाने के लिए सरकारी तनख्वाह पर निर्भर रहे ? जब नौकरी को संविधान की सुरक्षा मिली हो तब गांधी जी और अम्बेडकर जी की फोटो के नीचे बैठ कर दस पांच लाख कमाने से देश की GDP थोड़ी गिर जाएगी , लोगों को न्याय मिले चाहे पंखे से लटक कर मर जाएं, रानी को इन सब से कोई फर्क नहीं पड़ता , आज रानी साहिबा ने अपने कारनामों से पूरे देश को विचलित कर दिया और खुद अपने कोर्ट रूम में बैठकर अदरक वाली चाय पी रही होंगी , रानी कभ�� विचलित नहीं होती , ये कर सको तो समझो रानी हो ।
#AtulSubhash
#JusticeForAtulSubhash
बेंगलुरू में इंजीनियर अतुल सुभाष ने आत्महत्या कर ली
◆ मौत से पहले उसने एक घंटे का एक वीडियो बनाया
◆ पत्नी के आरोपों और कोर्ट तारीख से तंग आकर आकर अतुल ने दे दी जान
◆ मरने से पहले अतुल ने 40 पन्नों का सुइसाइड नोट ���ी लिखा है
◆ 2019 में अतुल सुभाष की शादी निकिता से हुई थी
◆ कुछ दिनों बाद निकिता अचानक बेंगलुरु से वापस जौनपुर लौट आई
◆ निकिता ने अतुल और उसके फैमिली के खिलाफ दहेज उत्पीड़न और घरेलू हिंसा का केस किया
◆ अतुल ने पत्नी निकिता और उसके रिश्तेदारों को मौत के लिए जिम्मेदार बताया है
◆ वीडियो में अतुल ने बताया कि 2 साल में केस की लगीं 120 तारीखें
#AtulSubhash | Atul Subhash | #banglore
एक बात बता देता हूं मानना या न मानना !
यदि अच्छा कमा रहे हो तो शादी मत करना क्योंकि तुम्हें एक ATM समझकर लोग आयेंगे और तुम्हारी ज़िंदगी तबाह कर जाएंगे,
"कुछ महिलाओं" ने डाइवोर्स और उसके बाद मेंटिनेंस और एलिमनी को बिजनेस बना लिया है और क्या पता आपकी पत्नी भी वही "कुछ महिलाओं" में से एक हो?
आप एक बार अतुल सुभाष के सारे दस्तावेज़ पढ़लो जो उन्होंने अपने पीछे छोड़े हैं, आप यक़ीनन रो दोगे,
इस दूसरी तस्वीर में जो लिखा है वह पढ़िए कितना भयानक रहा होगा अतुल सुभाष के लिए यह सब😢
@JaikyYadav16 पुरुषों की मानसिक और भावनात्मक हालत पर भी ध्यान देना जरूरी है। अतुल सुभाष की त्रासदी यह दिखाती है कि कानून का गलत उपयोग कितनी बर्बादी ला सकता है।
यहां हर दूसरा आदमी फेमिनिस्ट बना बैठा है, अरे महान लोगो एक बार पुरुष की हालत पर भी ध्यान दे लो,
यूपी के अतुल सुभाष बेंगलुरु में काम करते थे, उन्होंने अपनी जान दे दी और एक 24 पेज का डैथ नोट छोड़कर गए,
इनकी पत्नी और उसके परिवार वालों में इन्हें बुरी तरह से परेशान किया, इनके ऊपर कई केस किए,
इस सबसे तंग आकर अतुल सुभाष को अपनी जान ही देनी पड़ी।
अतुल सुभाष अपनी वाइफ से अलग होने के बाद उसे हर महीने 40 हज़ार रुपए मेंटिनेंस देते थे मगर वह उनसे और भी ज़्यादा पैसे मांग रही थी और
यह सब तब था जब वह ख़ुद भी कमा रही थी। अतुल सुभाष ने जो भी वीडियो और दस्तावेज़ छोड़े हैं उन्हें देखकर आपके होश उड़ जाएंगे।