मुझे आज भी याद है जब एक पूरी तरह से सशस्त्र पुलिस स्टेशन के सामने मौजूद 2 निर्दोष साधुओं को पीट-पीट कर मार डाला गया था।हमला एक झटके में नहीं हुआ कि पुलिस कुछ समझ नहीं पाई।समय लेकर प्रताड़ित कर कर के उनकी हत्या की गई थी।
तब विपक्ष के किसी भी नेता या किसी तथाकथित समाज सुधारक पाखंडियों ने एक सवाल तक नहीं उठाया की
पुलिस वहां क्या कर रही थी?
मूक दर्शक बने क्यों खड़ी रही?
पुलि��� ने हत्यारों पर गोली क्यों नहीं चलाई?
और आज यही लोग अतीक और असरफ अहमद जैसे माफियाओं पर हुई अचानक हादसे पर कभी पुलिस से तो कभी सरकार से जवाब मांग रहे हैं। कभी कानून और गणतंत्र पर सवाल उठा रहे हैं।
हमें याद रखना होगा जब तक न्याय के नाम पर अन्याय परोसा जाएगा, अपराध जन्म लेता रहेगा।
@Krishnapips@MahaOlympic@IPS_Association मा.सर आपले हार्दिक अभिनंदन,सर आपणांस तेव्हा पासुन ओळखतो जेव्हा आपण बुलढाणा येते कार्यरत होते .आम��हि सर्वांना आपल्यावर सार्थ अभिमान आहे.पुनच्छ हार्दिक अभिनंदन मा.सर🌷🌷🌷💐💐