@GovindDotasra राजस्थान का शिक्षा विभाग ट्रांसफर पोस्टिंग का बाज़ार बन चुका है। 4,224 उप-प्राचार्यों को यथास्थान पदस्थापन देकर दोहरी पोस्टिंग का मज़ाक क्यों बनाया गया? 417 शिक्षक बिना पोस्टिंग के रिटायर हो गए—इसका जिम्मेदार कौन है? बीजेपी सरकार शिक्षक विरोधी नीतियों पर चुप क्यों है?
राजस्थान का शिक्षा विभाग भ्रष्टाचार और अकर्मण्यता का अड्डा बन चुका है। विभागीय मंत्री की प्राथमिकता में बच्चों की पढ़ाई नहीं, केवल ट्रांसफर पोस्टिंग से कमाई है।
RSS की छत्रछाया में शिक्षा विभाग मनचाहे ट्रांसफर बेचने, रिक्त पद छिपाने और राजनीतिक बदले से कार्रवाई करने के खेल में व्यस्त है।
26 मई को 4,224 उप-प्राचार्यों की डीपीसी हुई और 28 मई को सबको यथास्थान पदस्थापन कर दिया गया। यानी जहां पहले ���े प्रिंसिपल मौजूद, वहीं प्रमोशन पाने वालों को प्रिंसिपल की पोस्टिंग दे दी। मतलब दोहरा पदस्थापन… पूरी व्यवस्था मज़ाक बनकर रह गई है। प्रमोशन के बाद जिन शिक्षकों को 6 महीनें से पोस्टिंग का इंतज़ार हैं, उनमें से 417 इंतज़ार करते-करते बिना पोस्टिंग के रिटायर हो चुके हैं।
3 बार Counselling स्थगित हो चुकी है, और अब चौथी बार संशोधित कार्यक्रम जारी किया गया है। पोस्टिंग रोककर प्रिंसिपल के 5,651 मनचाहे ट्रांसफ�� बेचे गए हैं, अब फिर करीब 200 ट्रांसफर करने के लिए काउंसलिंग का संशोधित कार्यक्रम जारी किया गया है, यानी मंत्री के लिए बच्चों का भविष्य जाए भाड़ में जाए, सिर्फ ट्रांसफर से कमाई आए।
हैरानी की बात है कि शिक्षक संघ लगातार विरोध कर रहे हैं, मुख्यमंत्री तक गुहार लगा चुके हैं। लेकिन मुखिया जी.. विभागीय मंत्री की इस मनमानी को रोक नहीं पा रहे हैं।
माननीय शिक्षा मंत्री @madandilawar जी शिक्षा विभाग द्वारा तीन बार प्र��चार्य काउंसलिंग कार्यक्रम स्थगित कर संशोधित जारी करना छात्रहित में कतई उचित नहीं।
विभाग खुद के निर्णय ओर आदेश को बार बार संशोधित कर रहा है।
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