इस देश का बहुजन चुप हो गया था क्योंकि संस्थाओं पर बीजेपी और आरएसएस का कब्जा हो गया है। लोगों को लगने लगा था कि अगर हम अपनी आवाज उठाएँगे तो वे हमें एडमिशन नहीं लेने देंगे, हमारी नौकरी नहीं होने देंगे, हमारी फेलोशिप रोक देंगे, हमारा प्रमोशन नहीं होने देंगे।
लेकिन एक यूजीसी रेगुलेशन ने सबकी आँखें फिर से खोल दीं कि अ���र हम इतने समय तक चुप रहे तो इस देश की मीडिया को इन्होंने अपनी बपौती समझ लिया, विश्वविद्यालयों को अपनी बपौती समझ लिया, न्यायालयों को अपनी बपौती समझ लिया।
जबकि कायदे से 90 प्रतिशत लोग मीडिया में, न्यायालयों में, विश्वविद्यालयों में, आईआईटी, एम्स और तमाम नौकरियों में ओबीसी/एससी/एसटी और अल्पसंख्यक वर्ग के होने चाहिए।
बहुत ईमानदारी से बताइए क्या 90 प्रतिशत प्रतिनिधित्व है?
शर्म करो मी��िया वालों🤮
जब UGC का विरोध हो रहा था तो सब न्यूज चैनलों ने इसका प्रसारण भर भर कर किया.
आज बहुजन समाज के बच्चे UGC के समर्थन में सड़क पर उतर गये हैं, लेकिन इसको दिखाने वाला कोई नहीं है.
भद्राचार्य और आनं�� स्वरूप के बिरादरी के ब्राह्मणों के पाप देखे...
कुशीनगर पुलिस की गिरफ्त में यह जो लोग दिखाई दे रहे हैं यह संस्कृत विद्यालय के शिक्षक हैं। जिन्होंने स्कूल के बच्चे के साथ रेप किया और बाद में मार डाला ताकि भेद न खुले।
कुछ तो शर्म करो पण्डो!
@kalisenachief