“जीतेगा संविधान, जीतेगा हिन्दुस्तान”
अए खाक नशीनों उठ बैठो,
अब वक़्त कहां आन पहुंचा है,
जब तख्त गिराए जाएंगे और ताज उछाले जाएंगे|
चलते भी चलो, बढ़ते भी चलो,
बाजू भी बहुत है, सर भी बहुत।
बढ़ते ही चलो, बढ़ते ही चलो... की अब डेरे लाल किले पे डाले जाएंगे|
वन्दे मातरम!
जो भरा नहीं है भावों से,
बहती जिसमें रसधार नहीं,
वो हृदय नहीं है पत्थर है,
जिसमे स्वदेश का प्यार नहीं।
वन्दे कहो... कहो मातरम... बात है अपनी आन की,
बात है अपनी शान की,
जय भारत, जय भारती,
जय बोलो हिंदुस्तान की!