छात्र आन्दोलन के समय यह शूरवीर अपनी जान न्यौछावर करने दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार के साथ खडा़ था,,,कल दो चार लट्ठ पडे़ तो सारी वीरता धरी रह गयी और दिल्ली पुलिस तथा सरकार गलत हो गयी,,,,हमने पहले ही कहा था तुम्हारे बस की बात नहीं आन्दोलन करना
जब संतोष वर्मा ने खुले मंच से "ब्राह्मण बेटियों से सम्बन्ध बनाने दो" की मांग की थी, तो यही भीम आर्मी चीफ बोल रहे थे-
"हर घर से संतोष वर्मा निकलेगा"
मतलब खुद दूसरे की बहन बेटियों पर अश्लील टिप्पणी करने वाले का समर्थन करो, और फिर कोई जवाब दे तो SC/ST एक्ट में फंसा दो??
यही चल रहा है देश में!!
🔥 आरक्षण के समर्थन में तीन नेताओं की दो टूक बात!
चिराग पासवान, अखिलेश यादव और रामदास अठावले—तीनों ने आरक्षण को लेकर अपना स्पष्ट रुख सामने रखा।
आरक्षण था, आरक्षण है और आरक्षण रहेगा! ✊
झूठ एक़दम झूठ। इस चंगेज़ ख़ान के गधे जैसी शकल वाले इंसान को लगता है ये कुछ भी रैंक कर चला जाएगा?
डॉ अम्बेडकर को छात्रवृत्ति देकर विदेश भेजने वाले बड़ौदा के महाराज गायकवाड़ मराठा है, कोई राजपूत राजा नहीं थे। और उससे पहले उनको छात्रवृत्ति देने वाले कोल्हापुर के छत्रपति शाहू जी महाराज थे। वो भी कुनबी मराठा थे, दोनों में से कोई राजपूत ब्राह्मण नहीं थे। हर जगह झूठ फैलाकर नौटंकी करना इनका धंधा बन गया 👇👇
अजीत भारती नाम का यह जातिवादी प्राणी अगर एससी एसटी एक्ट के तहत सलाखों के पीछे नहीं गया तो हमें यह मान लेना चाहिए कि यह कानून बीजेपी ने खत्म कर दिया है।
कल एक साथी की बात सुनकर मैं सोचने पर मजबूर हो गया।
जो लोग कहते हैं कि गरीब सवर्ण को आरक्षण मिलना चाहिए,
वो लोग अपनी करोड़ों/हजारों करोड़ों की संपत्ति में से 1-2 करोड़ गरीब सवर्ण को क्यों नहीं दे देते?
ऐसा तो नहीं है कि वो अपने समाज के लिए इतना करने से गरीब हो जाएंगे।
जिस तरह आरक्षण हटाओ के नाम पर पंडत राजपूत और बनिए इक्कठा हुए है
तो अगर
गुज्जर ,यादव ,सैनी , नाई, पाल, धोबी, जोगी, जुलाहा, हरिजन, वाल्मीकि, बढ़ी, मीणा, पासी, राजभर, भील, बंजारा, कुर्मी अन्य सभी समाज जो आरक्षण का लाभ लेते है वो इक्कठा हो गए आरक्षण बचाने के खिलाफ तो फिर??
क्या रोकी जा सकती थी जोधपुर की घटना?
जोधपुर में CJP के स्कूल ठीक करो आंदोलन के दौरान सामने आए वीडियो में एक व्यक्ति के साथ धक्का-मुक्की होती दिखाई दे रही है। मौके पर कम से कम 3 से 4 पुलिसकर्मी मौजूद नजर आ रहे हैं।
सवाल बस इतना है—क्या पुलिस की मौजूदगी में इस स्थिति को बिगड़ने से रोका जा सकता था? ये वीडियो इस सवाल का जवाब तलाशने की जरूरत जरूर पैदा करता है।
जंतर मंतर पर जो GEN Z प्रोटेस्ट हुआ था उसमें पूरे 1 महीने देश में भिन्न भिन्न प्रकार की प्रतिभाओं को देखा था।
अगर उससे भी ज्यादा मनोरंजन चाहिए है तो एक बार यूपी में ओबीसी दलित मिलकर सत्ता बदल दे।
फिर जितने ये भाजपाई जोकर घूम घूमकर दलितों को गाली देते हैं इनको ऐसा नचाया जाएगा कि नाचने लायक नहीं रहेंगे।
इनको सिर्फ सपाई सुधार सकते हैं वरना इनकी गाली खाते रहोगे।🫡
अरे मादोरवा यह बस्ती जिले का नचकूदा है दिन रात रीलबाजी करता है एक बार इसको पेले थे फिर समझा देंगे।
यह साला जाति से जाटव ही है लेकिन ब्राह्मणों के भरे में बयान दे रहा है क्योंकि कुछ समय पहले इसके साथ दिल्ली में ब्राह्मणों ने मार पीट की थी इसके खून तक निकले थे।