@SauravG27459136@KanhaiyyaKumar गठबंधन होगा जरूर इन सभी की मजबूरी है गठबंधन करने की लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है विपक्ष के गठबंधन की और से प्रधानमंत्री पद का दावेदार होगा कौन आम जनता किस के चेहरे को देख कर वोट डालने जाये
@KCC_Khata@AdvShrutidesai@KanhaiyyaKumar भाई में उन्हें लतखोर तो नहीं कहूंगा पर ये जरूर कहूंगा की बिहार की आम जनता अपने भ���िष्य का फैसला सही से नहीं कर सकती अगर करती होती तो पीडियो से गुरबत में जीने को मजबूर नहीं होती जाती से ऊपर कभी ये लोग उठना ही नहीं चाहते
भाग १
आज़ादी के हीरो सैयद हुसैन और विजयलक्ष्मी पंडित की कहानी: विवेचना
मिस्र की राजधानी काहिरा में एक क़ब्रिस्तान है ‘अल अराफ़ा’ जिसे अंग्रेज़ी में कहा जाता है ‘द सिटी ���फ़ द डेड’।
इस क़ब्रिस्तान में एक अकेला भारतीय दफ़्न है जो अपने ज़माने में एक बहुत बड़ा अध्येता, पत्रकार और देश प्रेमी था और जिसने सालों तक भारत के बाहर रहकर उसकी आज़ादी के लिए बहुत पसीना बहाया था।
इस शख़्स का नाम था सैयद हुसैन जिसका जन्म सन 1888 में ढाका में हुआ था। हुसैन मामूली शख़्स नहीं थे।
एनएस विनोध उनकी जीवनी ‘अ फ़ॉरगॉटेन एमबेसेडर इन काएरो द लाइफ़ एंड टाइम्स ऑफ़ सैयद हुसैन’ में लिखते ��ैं, “सैयद अपने समय के निहायत ही आकर्षक, विद्वान और सुसंस्कृत शख्स थे जिनमें अपने भाषणों से लोगों को मंत्रमुग्ध कर देने की ग़ज़ब की क्षमता थी। वो एक असाधारण लेखक और धर्मनिरपेक्ष देशभक्त थे।”
वे लिखते हैं, “उनकी उपलब्धियों को शायद इसलिए नज़रअंदाज़ कर दिया गया क्योंकि उन्हें देश के एक बहुत बड़े परिवार की नाराज़गी का सबब बनना पड़ा था। वो एक ऐसे इंसान थे जिनके बड़े योगदान और उपलब्धियों के बावजूद उनके देश और इतिहास ने उन्हें वो स्थान नहीं दिया जो उन्हें मिलना चाहिए था।”
मोतीलाल नेहरू ने बनाया ‘इंडिपेंडेंट’ अख़बार का संपादक...
अलीगढ़ विश्वविद्यालय में पढ़ाई के बाद सैयद क़ानून की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड गए थे लेकिन उन्होंने बैरिस्टर बनने के बजाए पत्रकार बनना ज़्यादा पसंद किया।
सैयद 5 फ़ीट 10 इंच लंबे थे और ��च्छे कपड़े पहनने के शौकीन थे। अंग्रेज़ी भाषा पर उनका अधिकार इतना ज़बरदस्त था कि इंग्लैंड की कई महिलाएं उनकी तरफ़ आकर्षित हुए बिना नहीं रह सकीं।
इंग्लैंड में सात साल रहने के बाद सैयद नवंबर 1916 में भारत लौटे थे और एक महीने बाद ही उन्होंने बंबई के बॉम्बे क्रॉनिकल अख़बार में बतौर उप संपादक काम करना शुरू कर दिया था।
अंग्रेज़ सरकार के ख़िलाफ़ लिखे उनके लेखों को पूरे भारत में बहुत दिलचस्पी के सा��� पढ़ा जाता था। उन लेखों पर मोतीलाल नेहरू और महात्मा गांधी की भी नज़र गई थी।
सैयद हुसैन की असली कहानी शुरू होती है जनवरी 1919 में जब मोतीलाल नेहरू ने उनके लेखन से प्रभावित होकर ‘इंडिपेंडेंट’ अख़बार का संपादक बनने के लिए इलाहाबाद आमंत्रित किया।
इस अख़बार का दफ़्तर शुरू में मोतीलाल नेहरू के निवास स्थान आनंद भवन में हुआ करता था। सैयद को 1500 रुपये के वेतन पर रखा गया था जो उस ज़माने में बड़ी तनख़्व��ह हुआ करती थी।
सैयद हुसैन ने विजयलक्ष्मी पंडित से किया गुपचुप विव���ह...
जब सैयद ‘इंडिपेंडेंट’ के संपादक बनकर इलाहाबाद आए तो शुरू में आनंद भवन मे ही रुके। उन्हीं दिनों मोतीलाल नेहरू की बेटी विजयलक्ष्मी पंडित ने सरोजिनी नायडू की बेटी पद्मजा नायडू को लिखे पत्र में लिखा, “सैयद हमारे साथ ही रह रहे हैं क्योंकि उनको प्रेस के पास कोई ढंग का घर नहीं मिल पाया है।”
आनंद भवन में रहने की वजह से सैयद को नेहरू परिवार से घुलमिल जाने के कई मौके मिले।
तब विजयलक्ष्मी की उम्��� 19 वर्ष थी। वो बहुत सुंदर थीं। घर में लोग उन्हें ‘नान’ कहकर पुकारते थे। हालांकि सैयद उनसे उम्र में 12 वर्ष बड़े थे, लेकिन वो उनकी तरफ़ आकर्षित हुए बिना नहीं रह सके। विजयलक्ष्मी भी उनकी तरफ़ खिंची चली गईं।
उन दिनों इलाहाबाद जैसे शहर में इंग्लैंड में पढ़े लिखे आकर्षक युवा ढूंढने से भी नहीं मिलते थे। उन्हीं दिनों सैयद हुसैन को लंदन में होने वाली ख़िलाफ़त कान्फ़्रेंस के लिए चुन लिया गया।
एक सू���्र के अनुसार दोनों ने सैयद के लंदन जाने से पहले गुपचुप तरीके से मुस्लिम तरीके से विवाह कर लिया।
एनएस विनोद लिखते हैं, “जब मोतीलाल नेहरू को इसके बारे में पता चला तो उन्होंने आसमान सिर पर उठा लिया। वो इस बात पर आगबबूला हो गए कि इस तरह की चीज़ उनके अपने घर में परिवार की निगरानी के बावजूद कैसे हो गई? जवाहरलाल नेहरू भी अपनी बहन से कम नाराज़ नहीं थे।”
विजयलक्ष्मी पंडित ने अपनी आत्मकथा में किया सैयद हुसैन का ज़िक्र...
बाद में विजयलक्ष्मी पंडित ने अपनी आत्मकथा ‘स्कोप ऑफ़ हैपिनेस’ में स्वीकार किया, “अपनी किशोरावस्था में मैं एक युवक सैयद हुस���न की तरफ़ आकर्षित हो गई थी। उन्हें मेरे पिता ने ‘इंडिपेंडेंट’ अख़बार का संपादक नियुक्त किया था।”
वे लिखती हैं, “उस ज़माने में जहाँ हर जगह हिंदू मुस्लिम एकता की बात हो रही थी और उस परिवार का सदस्य होने के नाते जिसके बहुत सारे मुस्लिम दोस्त थे, मैंने सोचा कि धर्म के बाहर शादी करना बहुत अजूबी बात नहीं होगी। लेकिन शादी के मामलों में अभी भी परंपरा का बोलबाला था। (१/५)
भाग २
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भाग ३
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भाग ४
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भाग ५
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कोलकाता के ब्रिज पर लगे तिरंगे झंडे के बीच अशोक चक्र की जगह चांद तारा लगा है।
यही I.N.D.I.A. गठबंधन क��� #गजवा_ए_हिन्द का एजेंडा है, यदि अभी भी हम लोग आपस में बटते रहे तो ये ही हमारा भविष्य होगा।
वैसे तो भगवान विष्णु के मुख्य १० (दशावतार) एवं कुल २४ अवतार माने गए हैं किन्तु उनका एक ऐसा अवतार भी है जिसके विषय में ब��ुत ही कम लोगों को जानकारी है और वो है नवगुंजर अवतार।
ऐसा इसलिए है क्यूंकि इस अवतार के विषय में महाभारत या किसी भी पुराण में कोई वर्णन नहीं है। केवल उड़ीसा के लोक कथाओं में श्रीहरि के इस विचित्र अवतार का वर्णन मिलता है। वहाँ नवगुंजर को श्रीकृष्ण का अवतार भी माना जाता है।
आइये इस विशिष्ट अवतार के विषय में कुछ जानते हैं।
जैसा कि बताया है कि नवगुंजर अवतार का वर्णन केवल उड़ीसा के महाभारत में मिलता है जिसकी रचना १५वीं शताब्दी में जन्में उड़ीसा के आदि कवि माने जाने वाले श्री सरला दास ने की है। इन्होने महाभारत के अतिरिक्त उड़िया बिलंका रामायण की भी रचना की है।
इनके द्वारा लिखे महाभारत का मूल स्वरुप तो महर्षि व्यास के महाभारत का ही है किन्तु इसमें इन्होने अपनी अपूर्व मौलिकता का परिचय दिया है और कुछ बातें अपनी ओर से भी जोड़ी हैं जिसका कोई वर्णन मूल महाभारत में नहीं है। नवगुंजर अवतार भी उन्ही में से एक है।
इनके द्वारा लिखित महाभारत के अनुसार जब अर्जुन अपने निर्वासन के दौरान मणिभद्र की पहाडियों में तपस्या कर रहे थे तब इन्होने इस अद्���ुत जीव के दर्शन किये। इस जीव का पूरा शरीर ९ भिन्न पशुओं का मिश्रण था और आकर बहुत बड़ा था। जब अर्जुन ने इन्हे देखा तो वे घबरा गए और उन्होंने अपनी रक्षा के लिए गांडीव धारण किया। वे उस विचित्र प्राणी पर आक्रमण करने ही वाले थे कि उन्होंने सोचा कि ऐसा कोई जीव तो इस पृथ्वी का हो ही नहीं सकता।
तब उन्होंने ध्यान से देखा तो उन्हें उस प्राणी के हाथों में कमल का पुष्प दिखाई दिया। ये देख कर वे समझ गए कि ये जीव अवश्य ही श्रीहरि का अवतार है। सत्य से परिचित होते ही श्रीकृष्ण ने उन्हें दर्शन दिए और बताया कि विश्वरूप की ही भांति ये भी इनका एक रूप है।
इस अवतार का "नवगुंजर" नाम ९ प्राणियों के मिश्रण होने के कारण पड़ा है। वे हैं:
सर: मुर्गे का
गर्दन: मयूर का
कूबड़: ऋषभ का
कमर: शेर की
पिछला बांया पैर: बाघ का
पिछला दायां पैर: अश्व का
अगला बांया पैर: गज का
अगला दायां पैर: मनुष्य का
पूँछ: सर्प की
अपने इस अवतार को धारण करने का कारण श्रीकृष्ण का अर्जुन को ये समझ��ना था कि इतनी विविधताओं से भरे जीवों को मिला कर भी एक सम्पूर्ण मनुष्य की रचना हो सकती है। नवगुंजर को नौ अलग अलग दिशाओं से देखने पर मनुष्य को अलग अलग जीव दृष्टिगोचर होते थे किन्तु वास्तव में वो प्राणी एक ही था।
इसका अर्थ ये है कि किसी मनुष्य को देखने का दृष्टिकोण अलग अलग मनुष्यों का भिन्न हो सकता है, किन्तु वास्तव में वो मनुष्य वही होता है जो वो है। इसे साधारण भाषा में समझें तो इस अवतार के द्वारा श्रीकृष्ण न�� अर्जुन को "एकम सत विप्रा बहुधा वदन्ति" का सूत्र दिया, अर्थात "सत्य एक ही होता है जिसे ज्ञानी मनुष्य अलग-अलग नामों से बुलाते हैं।"
भगवान के इस नवगुंजर अवतार का महत्त्व अद्वैत साहित्य में बहुत है। इस अद्भुत अवतार की कलाकृति पुरी जगन्नाथ मंदिर में स्थापित है। इसके अतिरिक्त जगन्नाथ मंदिर के नीलचक्र पर ८ नवगुंजरों की आकृति उकेरी गयी है जिसे देखने दूर दूर से लोग वहाँ आते हैं। इसके अतिरिक्त उड़���सा में खेले जाने वाले एक प्राचीन खेल "गंजपा" में भी नवगुंजर एवं अर्जुन एक पात्र के रूप में उपस्थित होते हैं। ये श्रीकृष्ण क��� विषरूप का ही एक रूप माना जाता है।
जय श्रीकृष्ण।
#साभार
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गांजा का चमत्कार...
1914 का वर्ष है प्रथम विश्व युद्ध के वर्ष और अमेरिकी डॉलर के लिए "भांग" की खेती करने वाले किसान इसे ध्यान में रखें और पढ़ते रहें। औद्योगिक भांग सिर्फ एक कृषि संयंत्र नहीं है यह तेल और डॉलर के खिलाफ मारk है गांजा कैसे प्रतिबंधित किया गया था?
1. भांग का एक टुकड़ा खेत 25 एकड़ जंगल के बराबर ऑक्सीजन पैदा करता है।
2. फिर से, एक एकड़ गांजा 4 एकड़ पेड़ों के बराबर कागज़ का उत्पादन कर सकता है।
3. जहां भांग को 8 बार कागज में बदला जा सकता है, वहीं लकड़ी को 3 बार कागज में बदला जा सकता है।
4. गांजा 4 महीने में उगता है, पेड़ 20-50 साल में।
5. कैनबिस विकिरण का एक वास्तविक पकड़ने वाला है।
6. भांग को दुनिया में कहीं भी उगाया जा सकता है और इसके लिए बहुत कम पानी की जरूरत होती है। इसके अलावा, चूंकि इसे कीड़ों से बचाया जा सकता है, इसलिए इसे कीटनाशकों की आवश्यकता नहीं होती है।
7. यदि भांग का कपड़ा व्यापक हो जाता है, तो कीटनाशक उद्योग पूरी तरह से गायब हो सकता है।
8. पहली जींस भांग से बनी थी; यहां तक कि "कानवास" शब्द भी भांग उत्पादों को दिया गया नाम है।
गांजा रस्सियों, डोरियों, बैगों, जूतों, टोपियों के निर्माण के लिए भी एक आदर्श पौधा है।
9. भांग, एड्स और कैंसर के उपचार में कीमोथेरेपी और विकिरण के प्रभाव को कम करना; यह गठिया, हृदय, मिर्गी, दमा, पेट, अनिद्रा, मनोविज्ञान और रीढ़ की बीमारियों जैसे कम से कम 250 रोगों में प्रयोग किया जाता है���
10. भांग के बीज का प्रोटीन मूल्य बहुत अधिक होता है और इसमें दो फैटी एसिड प्रकृति में और कहीं नहीं पाए जाते हैं।
11. सोयाबीन की तुलना में गांजा का उत्पादन और भी सस्ता है।
12. जिन जानवरों को भांग खिलाया जाता है उन्हें हार्मोनल सप्लीमेंट की जरूरत नहीं होती है।
13. सभी प्लास्टिक उत्पादों को भांग से बनाया जा सकता है, और भांग प्लास्टिक प्रकृति में वापस आना बहुत आसान है।
14. अगर कार की बॉ��ी गांजा की बनी हो तो यह स्टील से 10 गुना ज्यादा मजबूत होगी।
15. इसका उपयोग इमारतों के इन्सुलेशन के लिए भी किया जा सकता है; यह टिकाऊ, सस्ता और लचीला है।
16. गांजा साबुन और सौंदर्य प्रसाधन पानी को प्रदूषित नहीं करते हैं; इसलिए यह पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल है।
अमेरिका में 18वीं शताब्दी में इसका उत्पादन अनिवार्य था और गैर-उत्पादक किसानों को बंद कर दिया गया था। लेकिन अब स्थिति इसके उलट है. कहां से? -डब्ल्यू। आर. हर्स्ट 1900 के दशक में अमेरिका में समाचार पत्रों, पत्रिकाओं और मीडिया के मालिक थे। उनके पास जंगल थे और कागज़ का उत्पादन करते थे। अगर कागज भांग से बना होता, तो उसे लाखों का नुकसान हो सकता था। रॉकफेलर विश्व के सबसे धनी व्यक्ति थे। एक तेल कंपनी थी। बेशक, जैव ईंधन, भांग का तेल, उसका सबसे बड़ा दुश्मन था। मेलन ड्यूपॉन्ट में एक प्रमुख शेयरधारक था और उसके पास पेट्रोलियम उत्पादों से प्लास्टिक के उत्पादन के लिए एक पेटेंट था। और भांग उद्योग अपने बाजार को खतरे में डाल रहा था। बाद में मेलॉन अमेरिकी राष्ट्रपति हूवर के कोषागार के सचिव बने। हमने जिन बड़े नामों के बारे में बात की, उन्होंने उनकी बैठकों में तय किया कि भांग दुश्मN है। और उन्होंने उसका सफाया कर दिया। मीडिया के माध्यम से, उन्होंने मारिजुआना शब्द के साथ-साथ लोगों के दिमाग में एक Zहरीली दवा के रूप में मारिजुआना का इंजेक्शन लगाया है। भांग की दवाओं को बाजार से वापस ले लिया गया है और उनकी जगह आज इस्तेमाल होने वाली रासायनिक दवाओं ने ले ली है।
कागज उत्पादन के लिए जंगलों को काटा जा रहा है।
कीटनाशक और कैंसर का Nशा बढ़ रहा है। और फिर हमने अपनी दुनिया को प्लास्टिक कचरे, खतरनाक कचरे से भर दिया साभार...🙏
हरियाणा सरकार ने तय किया है कि न���्हड़ शिव मंदिर को जड़ से उखाड़ कर किसी वैसे जगह शिफ्ट कर दिया जाएगा जहाँ समुदाय विशेष नहीं है।
इससे लाभ यह होगा कि हिन्दू अपनी यात्रा भी कर लेंगे और बीफ माफिया की बंदूकों में जंग लग जाएगी, और गोलियों में सीलन पड़ जाएगी।
मेवात में 144 लगाया गया है। हिन्दुओं के संगठनों को खट्टर साहब को सावन के पावन अवसर पर हरे रंग की चूड़ियाँ, चाँद-तारा बिंदी और हरी लिप्सटिक भेजना चाहिए क्योंकि उनकी छत्रछाया में हरियाणा का हिन्दू आज भी अपने घर और गाँव-मुहल्ले के देवालयों में पूजा-अर्चना कर सकता है।
@kumar_anshul123 @HanumanBhakt007 @SAMRAT_SAKUNI@NavinKu14 @TitularAlmighty @emersion@KalnemiW@jarsandha1 उस लोक में भी तुम ताड़का के समीप कभी नही जा पाते अगर गलती से चले भी जाते तो ताड़का तुम्हारा रोस्ट या क़बाब बना कर परिवार के साथ खा जाती