"तुम्हीं पे मरता है ये दिल, अदावत क्यों नहीं करता?
कई जन्मों से बंदी है, बग़ावत क्यों नहीं करता?
कभी तुम से थी जो वो ही शिकायत है ज़माने से,
मेरी तारीफ़ करता है, मुहब्बत क्यों नहीं करता..?"
❣️#ValentinesWeek
थोड़ी सी जमीं, थोड़ा आसमां
तिनकों का बस एक आशियां
माँगा है जो तुमसे वो ज्यादा तो नहीं है
देने को तो जान दे दें, वादा तो नहीं है
कोई तेरे वादों पे जीता है कहाँ
मेरे घर के आँगन में छोटा सा झूला हो
सौंधी सौंधी मिट्टी होगी, लेपा हुआ चूल्हा हो
थोड़ी थोड़ी आग होगी, थोड़ा सा धुआँ
थोड़ी सी जमीं, थोड़ा आसमां
तिनकों का बस एक आशियां....
◆ गुलज़ार