आज रविवार है आप सभी को पता है इस दिन @NFUofficial1 के तमाम साथियों को आपस में जोड़ने का कार्यक्रम होता है
आप सभी ईमानदारी से एक दूसरे से जुड़ते हुवे ट्वीट को रिट्वीट कर दे।
@Mukesh_9024#नेशनल_फ्रीडम_यूनियन
जैसा कि आप सभी को पता है रविवार के दिन @NFUofficial1 का एक दूसरे से जुड़ने का प्रोग्राम रहता है इसके लिए इस Tweet को रिट्वीट करें और रिट्वीट करने वाले एक-दूसरे को follow करें।❣️
#नेशनल_फ्रीडम_यूनियन
जैसा कि आप सभी को पता है रविवार के दिन @NFUofficial1 का एक दूसरे से जुड़ने का प्रोग्राम रहता है इसके लिए इस Tweet को रिट्वीट करें और रिट्वीट करने वाले एक-दूसरे को follow करें।❣️
#नेशनल_फ्रीडम_यूनियन
यदि आप यह मानते हैं कि प्रतियोगी परीक्षाओं में केवल मेहनत ही सफलता का निर्धारण करती है, तो मुझे लगता है कि यह पूरी सच्चाई नहीं है।
राजस्थान में विशेष रूप से कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा आयोजित कई परीक्षाओं में अक्सर 10 12 तक प्रश्न बाद में डिलीट कर दिए जाते हैं। यह केवल एक तकनीकी त्रुटि नहीं, बल्कि हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है। सवाल यह है कि यदि वे प्रश्न गलत थे, तो उन्हें प्रश्नपत्र में शामिल ही क्यों किया गया? और यदि शामिल किए गए, तो प्रारंभ में उन्हें सही मानकर परीक्षा का हिस्सा क्यों बनाया गया?
जब अभ्यर्थी आपत्तियाँ दर्ज कराते हैं, तब उन प्रश्नों को हटा दिया जाता है। लेकिन इस प्रक्रिया का सबसे बड़ा नुकसान उन विद्यार्थियों को होता है जिन्होंने उन प्रश्नों के सही उत्तर दिए थे। एक गलत प्रश्न-निर्माण की कीमत वे बच्चे चुकाते हैं, जिन्होंने पूरी ईमानदारी और मेहनत से तैयारी की थी।
कई बार यही डिलीट हुए प्रश्न किसी अभ्यर्थी को चयन सूची से बाहर कर देते हैं। यह केवल अंक खोने की बात नहीं होती, बल्कि उसके आत्मविश्वास, उसके सपनों और उसके वर्षों की मेहनत पर भी गहरा प्रभाव डालती है। जो अभ्यर्थी इस पीड़ा से गुज़रा है, वही समझ सकता है कि अंतिम चयन से कुछ अंकों से बाहर हो जाना कितना दर्द देता है।
आख़िर आयोग की गलती ईमानदार बच्चा क्यों भुगते
डॉ धीर सिंह धाभाई
#rsmmb #thirdgradeteacher #result