@narendramodi Hon'ble PM,the ongoing alteration of Birla Hostel, BHU is damaging its heritage, scenic beauty, and open architectural character. Why only Birla Hostel and not others? We urge your intervention to preserve this historic legacy for future generations
#SaveBirlaHostel
रमेश बिश्नोई , जोधपुर ( राजस्थान) से बड़ा मोटीवेटर कौन हो सकता है...!!
भाई तुम्हारे हौसलों की उड़ान काबिल ए तारीफ है 🙌❤️
#Rajasthan#Ideal#शुभ_प्रभात_वंदन
सत्यपाल मलिक जी की जीवनसाथी डॉ. इक़बाल कौर उन्हें याद करते हुए कितने प्रेम से लिखती हैं:
डियर सत्यपाल,
मैं अभी-अभी विद्युत शवदाहगृह से ल���टी हूँ। कोई न्यौता नहीं भेजा गया, कोई घोषणा नहीं की गई, फिर भी लोग आ गए—कुछ मन से, कुछ मौन से, कुछ श्रद्धा में भीगकर। यह खबर आमंत्रणों से नहीं, हृदय से हृदय पहुँची थी।
तुम केवल नेता नहीं थे, तुम दिशा थे—स्थिर, शांत, सच्चे। लोगों के लिए तुम जनप्रतिनिधि नहीं, परिवार के सदस्य थे। तुमने नाम याद रखे, अनुपस्थिति पहचानी, छोटे सपनों में भी साथ दिया। फसल में, बीमारी में, आंदोलन में—तुम हर मोड़ पर उनके साथ खड़े रहे।
आज मैं स्तब्ध थी, जैसे सब कुछ धुँधला हो गया हो। कोई शब्द नहीं निकल पाया—भारी, भंगुर, असहाय।
मुझे अब भी याद है, तुम्हें पहली बार कॉलेज के फाटक पर देखा था। तुमने शांत स्वर में कहा, “आज हड़ताल है, वापस जाओ।” मैं नहीं मानी। क्या जानती थी कि यही लड़का एक दिन मेरे जीवन का केंद्र बनेगा।
हमारे बीच कोई दावे नहीं थे—केवल सम्मान था, आत्मीयता थी। एक-दूसरे की जगह भी दी, और हर तूफ़ान में साथ भी खड़े रहे। तुमसे ही मैंने समाजवाद सीखा—नारे में नहीं, व्यवहार में। तुम्हारा समाजवाद तुम्हारे चलने में, खाने में, सबसे आख़िरी पंक्ति में खड़े होने में था—निर्भीक और निष्कलंक।
राज्यपाल बने तो भी वही व्यंग्यात्मक मुस्कान लिए कहा, “मैं तो वही हूँ, साहब लोग चारों ओर हो गए हैं।”
कविता, क़िस्से, गाँव की कहानियाँ, मज़दूरों की पीड़ा, सैनिकों का सम्मान, किसानों की पीड़ा—तुम सबके साथ थे, सबके अपने। ईडी के छापे भी आए तो तुमने उन्हें भी आदर दिया—डर से नहीं, लोकतंत्र में आस्था से।
आज तुम्हारा बेटा तुम्हारी भांति मौन और दृढ़ खड़ा है। बहू तुम्हारी परंपरा को अपनी गरिमा से समृद्ध कर रही है। और मैं—मैं उस रिक्तता से जूझ रही हूँ जो तुम्हारे जाने से बची है—सुबह की नीरवता में, दिन के ठहराव में, शाम की प्रतीक्षा में।
हम सब अपने-अपने ढंग से तुम्हें गौरवान्वित करेंगे, उसी प्रेम के साथ—जो अनंत है, अपार है, और अब मौन में पलता है।
तुम्हारी,
इक़बाल
(सौजन्य से, रमाशंकर जी)
Fighter. Olympian. Champion. A poem dedicated to one of our all time greatest. The one and only Vinesh Phogat. @Phogat_Vinesh
“ख़ूब लड़ी मर्दानी”
लेखन: @ajaxsingh
जालोर जिले के डाबली में समाजसेवी स्व.श्री हीरारामजी जाखड़ के मूर्ति अनावरण समारोह में शामिल होकर पुष्पांजलि अर्पित की।
सामाजिक सुधार के लिए स्व.हीराराम जी द्वारा किये गये प्रयास अपने आप में एक ��िसाल है जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायी है।