ચાલ ને ,
એક બીજા ને ગમતા રહીએ...
કંઈક તું કહે , કંઈક હું કહું
એક બીજા ને ગમતા રહીએ...
અણગમો ચર્ચીએ જીદ છોડી ને ,
ગમતી બાબત ને ઉજવીએ ,
એકબીજા ને ગમતા રહીએ...
ખામીઓ ને ખમીર થી સ્વીકારીએ ,
ખૂબીઓ ને હૃદય થી લગાવીએ
એકબીજા ને ગમતા રહીએ...
🩷
#વિચારોનું_વાવેતર
जिंक को यूँ ही सेक्स मिनरल नहीं कहा जाता।
जिंक शरीर के उन महत्वपूर्ण खनिजों में से एक है जो टेस्टोस्टेरोन के निर्माण, शुक्राणुओं की गुणवत्ता, प्रतिरक्षा प्रणाली, कोशिकाओं की मरम्मत और बालों के स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
हर बार वीर्य स्खलन के साथ शरीर से थोड़ी मात्रा में जिंक भी निकलता है। सामान्य परिस्थितियों में यह कोई समस्या नहीं है, लेकिन यदि आहार में पहले से ही जिंक की कमी हो, तो समय के साथ ऊर्जा, रिकवरी, यौन-स्वास्थ्य और बालों की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है।
एक वयस्क पुरुष को प्रतिदिन लगभग 11 mg जिंक की आवश्यकता होती है, जबकि महिलाओं को लगभग 8 mg की। शरीर में कुल 2-3 ग्राम जिंक होता है, लेकिन यह 300 से अधिक एंजाइमों और हजारों जैव-रासायनिक प्रक्रियाओं में भाग लेता है। शरीर में मौजूद कुल जिंक का लगभग 60% मांसपेशियों और 30% हड्डियों में संग्रहित रहता है।
भारत में जिंक की कमी एक वास्तविक और काफी बड़ी समस्या मानी जाती है। लगभग 30% भारतीयों में जिंक की कमी है।
जिंक की कमी के लक्षणों में थकान, कमजोर प्रतिरक्षा, बालों का अधिक झड़ना, घावों का धीरे भरना और प्रजनन-स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएँ शामिल हो सकती हैं।
प्राकृतिक शाकाहारी जिंक स्रोत:
- कद्दू के बीज
- तिल
- चना और काला चना
- मूंग, मसूर व अन्य दालें
- राजमा
- मूंगफली
- काजू और बादाम
- ओट्स
- बाजरा, ज्वार और साबुत गेहूँ
दालों और चनों को भिगोकर या अंकुरित करके खाने से जिंक का अवशोषण बेहतर होता है।
ध्यान रहे, केवल जिंक ही सब कुछ नहीं है। मजबूत शरीर, स्वस्थ बाल और बेहतर यौन-स्वास्थ्य के लिए संतुलित आहार, पर्याप्त प्रोटीन, अच्छी नींद, नियमित व्यायाम और तनाव नियंत्रण भी उतने ही आवश्यक हैं।
शरीर की ताकत, बालों की मजबूती और जीवन की ऊर्जा इन सबकी नींव अक्सर साधारण दिखने वाले पोषक तत्वों पर टिकी होती है, और जिंक उनमें से एक है।
माँ कामाख्या और कामेश्वर का पवित्र मिलन तांत्रिक परंपरा में दिव्य प्रेम, सृष्टि और ब्रह्मांडीय संतुलन की सबसे गहन अभिव्यक्तियों में से एक माना जाता है। माँ कामाख्या, जो आदिशक्ति और सृजन-शक्ति (उर्वरता) की प्रतीक हैं, नीलाचल पर्वत पर स्थित शक्तिपीठ में विराजमान हैं। वहीं कामेश्वर, भगवान शिव का एक रूप, शुद्ध चेतना और दिव्य पुरुष ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करते हैं।
इन दोनों का मिलन काम (इच्छा) और मोक्ष (उत्कर्ष) के अद्भुत संतुलन को दर्शाता है, यह बताता है कि सृष्टि का उद्भव शक्ति और शिव के सामंजस्यपूर्ण संयोग से ही होता है। उनका संबंध केवल सांसारिक प्रेम का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह उस गहन आध्यात्मिक सत्य को प्रकट करता है कि समस्त अस्तित्व ऊर्जा (शक्ति) और चेतना (शिव) के इस दिव्य खेल से उत्पन्न हुआ है।
भक्तों के लिए, माँ कामाख्या और कामेश्वर की उपासना भौतिक और आध्यात्मिक दोनों प्रकार की सिद्धि का मार्ग बनती है। यह साधना उन्हें एकत्व, आत्म-परिवर्तन और अपने भीतर स्थित दिव्यता के साक्षात्कार की ओर अग्रसर करती है।
Om Aim Hreem Kleem Chamundayai Viche
Phonetic:
Om Aeem Hreem Kleem Cha-mun-daa-yai Vee-chay
Meaning:
A call to the Divine Mother in her protective form, asking for clarity, strength, and removal of what feels overwhelming.
This mantra is a bit more active in its tone, but it can still be used in a calm, steady way. Repeating it slowly tends to work better than rushing through it.
Ma is here, there, everywhere, and within.
The Divine Vision of the Mother Goddess of creation reveals a boundless presence that holds and governs every aspect of life, from birth and nourishment to transformation and dissolution, embodying the all-encompassing शक्ति of Adi Shakti. In this sacred realization, the Goddess is not limited to a single form but expresses herself through countless manifestations—whether as Maa Durga who protects, Maa Lakshmi who sustains abundance, or Maa Kali who transforms and liberates. She is the essence behind every experience, joy and sorrow alike, guiding the soul through the cycles of existence with unseen wisdom and compassion. This vision teaches that nothing in life is separate from the Divine Mother—every moment, challenge, and blessing is held within her cosmic embrace—reminding devotees that surrendering to her grace leads to harmony, understanding, and the realization of unity with all creation.
वह्निवासिनी देवी – श्रीविद्या की पंचमी नित्या 🔱
वह्निवासिनी षोडश नित्याओं में पाँचवाँ स्वरूप हैं और ये भी त्रिपुरसुंदरी की दिव्य अग्नि शक्ति का प्रतिनिधित्व करती हैं।
जैसा कि नाम से स्पष्ट है—ये देवी अग्नि (वह्नि) में निवास करने वाली शक्ति हैं।🧵
In English we say: You are my choice.
But in poetry we say: "even if i get the opportunities to shine with the stars, i would still choose to sit under the rain with you."