एक आदमी "इंकलाब ज़िंदाबाद" बोलता है, उसके ब��द पूरी भीड़ दो बार "ज़िंदाबाद - ज़िंदाबाद" बोलती है; ऐसा पूरे जोश में कुछ देर चलता रहता है। फिर एक नेता (नेता का झुंड) आता है और सबको भा��ण पिलाता है और "इंकलाब ज़िंदाबाद" और दो बार "ज़िंदाबाद - ज़िंदाबाद" बोलनेवाली भीड़ उसका भाषण
कामरेड का मार्क्सवाद शुद्ध विचार नही है,इसमें मैन्यूफैक्चरिंग फॉल्ट है । यह हीगल के द्वन्दवाद,इंग्लैण्ड के पूँजीवाद और फ्रांस के समाजवाद का मिला जुला रायता है जो न ही भारतीय हित में है न भारतीय जन मानस से मैच करता है !!
न्यूज पेपर में छपी ये न्यूज और तस्वीर बहुत कुछ कह रही है...चिल्ला चिल्लाकर...पर क्या करें, जिन्हें सुनना चाहिए उन्होंने हेडफ़ोन लगा रखे हैं,वो भी नॉइस केंसीलेसन वाले
#Sikar@PoliceRajasthan@BalwanPoonia_@ashokgehlot51
वामपंथी एक पुरानी चीनी कहावत को हमेशा याद रखते है -"क्या फर्क पड़ता है कि बिल्ल��� सफेद है या काली, अगर वह चूहे पकड़ती है!"इसी कहावत को चरितार्थ किया जा रहा है - क्या फर्क पड़ता है कि किसी से बदसलूकी करो, मारपीट करो, बस अध्यक्ष बनना चाहिए / पैनल बनना चाहिए !
#भादरामहाविद्यालयचुनाव
आज भादरा में वामपंथियों को लगभग सभी बुरा भला कह रहे है! पर सच्चाई यह है कि एक विचारधारा के रूप में वामपंथियों की आँखें तेज हैं और कान खराब हैं! वामपंथी को सुनाई नहीं देता कि उसे कौन क्या कहता है, पर उसे अपने हित हमेशा साफ दिखाई देते हैं!
I have not received it.
You have delivered to someone else ..... The person who was to be delivered has been not delivered.
DRS Required please provide DRS
@trackonindia