@alokrajRSSB जब तक बोर्ड और आरपीएससी के लोग अपना ज़मीर बेचना बंद नहीं करेंगे तब तक माँ बाप को दोष देना बेकार है।
बाड़ ही खेत को खा रही है और दोष औरों पर डाल रही है।
जरा सोचो NEET में 10 दिन के बाद reexam की वजह से अब तक दर्जनों आत्महत्या हो चुकी हैं।
लेकिन #si_भर्ती_2021 में तो 6 साल बाद reexam हो रही है, 11 साल बाद फिर से कोई भर्ती निकलेगी और 15 साल बाद फिर नौकरी मिलेगी।
15 साल बाद आज के कॉरपोरेट जगत में एक प्रोफेशनल रिटायरमेंट ले लेता है
जरा सोचो NEET में 10 दिन के बाद reexam की वजह से अब तक दर्जनों आत्महत्या हो चुकी हैं।
लेकिन #si_भर्ती_2021 में तो 6 साल बाद reexam हो रही है, 11 साल बाद फिर से कोई भर्ती निकलेगी और 15 साल बाद फिर नौकरी मिलेगी।
15 साल बाद आज के कॉरपोरेट जगत में एक प्रोफेशनल रिटायरमेंट ले लेता हैं, आर्मी, नेवी और एयर फोर्स में आजकल के युवा औसत 15 साल की ही नौकरी कर रहे है।
15 साल में एक सामान्य प्राइवेट कर्मचारी की सैलरी में 25 से 30 गुणा पैकेज बढ़ जाता हैं।
लेकिन अफसोस घोर अन्याय के खिलाफ़ ये युवा जाए तो कहा जाएं क्योंकि न्यायपालिका ने इनके साथ अन्याय किया।
कार्यपालिका अर्थात सरकार और विपक्ष के नेताओं ने इनसे मुँह फेर लिया।
व्यवस्थापिका अर्थात ब्यूरोक्रेसी के कुछ अफसर तो स्वयं पेपर माफिया के साथ मिलकर इन होनहारों की इज्जत लूटने में तुले थे।
कुछ मीडिया वाले पेपर माफिया और कोचिंग माफिया सिंडिकेट की जी हुजूरी में पलक पांवड़े बिछाए हुए थे और जो निष्पक्ष पत्रकार हैं उनकी रिच नहीं हैं क्योंकि उनके पास स्वाभिमान तो है लेकिन मार्केटिंग का बजट नहीं हैं।
इसलिए 800 अफसरों का कत्लेआम लोकतंत्र के चारों स्तंभों ने मिलकर किया हैं, ये ठीक वैसा ही मंजर था, जिससे 13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग़ की मिट्टी लाल हो गई थी। लेकिन उस घटना के खिलाफ़ जनता में एक आक्रोश और क्रांति की ज्वाला पैदा की जिसने अंग्रेजी हुकुमत की चूले हिला दी थी।
लेकिन अफसोस यहां पर स्वार्थी जनता ने अपने ही पांव पर कुल्हाड़ी मार कर अपने बच्चों के भविष्य को लगभग ख़त्म सा कर दिया था। क्योंकि उन्होंने आक्रोश की बजाय चुप्पी को प्राथमिकता दी, और अलग अलग वर्गों में बट गए, कि��ी ने कहा कि इसमें तो 150 जाट थे, किसी के लिए 90 राजपूत थे। किसी के लिए 70 मीणा थे तो किसी के लिए 350 से अधिक महिलाएं थी।
मास्टरों ने कहा पुलिस वालों का मामला हम क्यों बोले, बैंक वालो ने कहां पुलिस तो होती हो ऐसी हैं।
पड़ोसी, नाते रिश्तेदारों ने कहा कि रडक निकल गई।
लेकिन असली रडक तो हमारे समाज की संवेदना और सुचिता की निकली थी।
मेरा इन सब से एक सवाल हैं 800 बहादुरों में से एक भी पीछे नहीं रहेगा, समाज में कु��� ना कुछ तो करेगा लेकिन याद रखना ये अन्याय आपके साथ भी होगा क्योंकि जंगल में आग लगाने में आपका भी योगदान है।
#neetupdate
#congress
S I भर्ती 2021 जो कि अक्टूबर 2023 में नियुक्ति हो गई।
मई 2026 में रद्द हो गई।
क्या सब ठीक हुआ
क्या उसमें एक भी निर्दोष नहीं था
जब ���ोषी साक्ष्य के अभाव में निरंतर छूटते जा रहे हैं तब क्या हमने दोषियों के हिस्से की सजा निर्दोषों को दे दी है #ईमानदार_थानेदारों_की_हत्या
@ashok_Jodhpurii@BhajanlalBjp#si_भर्ती_2021 मेहनत करने वाला आज सड़क पर रो रहा है और जिम्मेदार मौन हैं। युवाओं के भविष्य के साथ यह खिलवाड़ बंद होना चाहिए। इन आंसुओं की कीमत सरकार को समझनी होगी।
#si_भर्ती_2021 के अभ्यर्थियों का कसूर क्या था? सिर्फ ये कि इन्होंने मेहनत की और व्यवस्था पर भरोसा किया? आज राजस्थान सरकार और न्यायालय के रुख ने इन्हें मानसिक रूप से मार दिया है। ये ���ीतियां दमनकारी हैं और लोकतंत्र में युवाओं के साथ ये व्यवहार बर्दाश्त के बाहर है। अब और कितना सहें?
@iamharmeetK हमारा साथ दीजिए, हम भाग नहीं रहे! आदरणीय @iamharmeetK जी, हम हर जांच के लिए तैयार हैं। अगर हम गलत हैं, तो हमें जो सजा देनी है दीजिए, पर बिना कसूर हमें मत मारिए। यह हजारों बेटियों के स्वाभिमान और जीवन का सवाल है। न्याय की कसौटी पर हमें परखिए तो सही!
#SI_2021#JusticeForDaughters
एक औरत के लिए खुद के पैरों पर खड़ा होना पहाड़ चढ़ने जैसा है। वर्दी पहनी ताकि समाज को सुरक्षा दे सकें, पर आज खुद की रोजी-रोटी और सम्मान के लिए दर-दर भटक रहे हैं। किसी ने सच्चाई नहीं देखी। क्या मेहनत की यही सजा होती है? ⚖️ @priyankagandhi@GovindDotasra@SachinPilot#SI2021