घृणा और क्रोध का प्रचार बहुत आसानी से किया जा सकता है, उसके परिणामों को नियन्त्रित करना बहुत कठिन है। प्रेम और अहिंसा से ही जीवन निरन्तर चल सकता है, विनाश को रोका जा सकता है।
कई बार आप असहमत इसलिए हो जाते हैं क्योंकि आप पढ़ते नहीं आप जानते ही नहीं कि प्रसंग व सन्दर्भ क्या है? कई दिनों के निरन्तर अभ्यास से बुद्धि विकसित होती है अतः नाराज होने या असहमत होने के बजाय पढ़ना शुरु करें धीरे धीरे कुहासा छँटेगा तो समझ में आने लगेगा बाकि तो कुछ नहीं किया जा सकत