शिक्षक से
भर सको तो थोड़ी बहुत रौशनी भर देना
थोड़ी बहुत कविता
थोड़ा सा प्रेम थोड़ा संगीत
कुछ सपने और थोड़ी सी बेचैनी भर देना
बहुत भरोसे के साथ
वो तुम्हारे पास आया है
देखो कीलें मत भर देना
साँकल कुन्दे जंजीरें
और हथियार भी नहीं
भर सको तो थोड़ा लोहा भर देना
उसके भीतर ।
मणि मोहन
हम
उनकी क़ब्रों से
होकर गुज़रे
मृत लोग थे वहाँ,
विजेता या पराजित
क्या फ़र्क पड़ता है।
उस अन्धकार में
वे देख नहीं
सकते थे
किसे हासिल हुई
जीत।
◆ लैंग्स्टन ह्यूज़ /अनुवाद: @ManiMohanMehta1
बस जाने ही वाला था
नींद के आग़ोश मे
कि अचानक
जेहन मे चमकती है
कविता की एक पंक्ति
रोशनी से भर जाता है जेहन
रोशनी मे नहा जाती है नीद
और सपने तरबतर हो जाते हैं
रोशनी से
लफ़्ज़ों का दरिया
बहाए लिए जाता है मुझे
किसी सुबह की चट्टान पर
पटकने को बेताब
~मणि मोहन✍️
कवि,अनुवादक
#जन्मदिन
"The amendments go a long way toward making it easier for India to reach its updated Nationally Determined Contributions. However, more details regarding the precise market structure and incentives are required," write Nancy Saroha and Akshat Mehta.
https://t.co/VwSEmqC3z0
#दीपोत्सव
मिट्टी के दीये
देखो ! मोल-भाव मत करना
उस गरीब स���
जो रोशनी से चमचमाते
अंधकार में बैठकर
मिट्टी के दीये बेच रहा है
देखो ! मोल-भाव मत करना
कि मिट्टी से ज़्यादा अनमोल
कुछ भी नहीं
इस संसार में ।
#मणिमोहन
@ManiMohanMehta1
#दीपपर्व_की_शुभकामनायें..
(Pic:Social media)
सभी मित्रों को दीप पर्व की शुभकामनायें..
मिट्टी के दीये
देखो ! मोल-भाव मत करना
उस गरीब से
जो रोशनी से चमचमाते
अंधकार में बैठकर
मिट्टी के दीये बेच रहा है
देखो ! मोल-भाव मत करना
कि मिट्टी से ज़्यादा अनमोल
कुछ भी नहीं
इस संसार में ।
#मणिमोहन