@right9Oangle रामधारी सिंह 'दिनकर' प्रसिद्ध कृति 'परशुराम की प्रतीक्षा' में एक जगह लिखते हैं...
"साहसी, शूर-रस के उस मतवाले को,
टेरो, टेरो आज़ाद हिन्दवाले को।
खोजो, टीपू सुलतान कहाँ सोये हैं?
अशफ़ाक़ और उसमान कहाँ सोये हैं?"
😕😥
@AchAnkurArya आयुष की घरवापसी साम��न्य नहीं है। मुझे लगता है वो अभी भी इस्लाम के गहरे प्रभाव में है। अगर भविष्य में किसी और उठापटक से बचना है तो उसे हिन्दू धर्म की उदारता और इस्लाम की कट्टरता से प्रभावशाली रूप से अवगत करवाना होगा।
किसी के बाप का पैसा है या खैरात में आया है कि खान सर जैसे छपरी रीलबाजों को सरकारी पैसों से सुरक्षा दी जाये ,
कल को तुम भी मुँह उठा के चली आओगी कि मैं भी एस्ट्रोटॉक और ट्राया का प्रचार करती हूँ मुझे भी Y श्रेणी सुरक्षा चाहिए
@priya_jharkhand प्रिंस कुशवाहा के पिता का बयान सराहनीय है। लेकिन सारे एनकाउंटर को एक तराजू से नहीं तौल सकते। भरत तिवारी किसी गलत चीज के लिए नही लड़ रहा था, बस वो गलत तरीके से लड़ रहा था। वो हमारी जाति का नहीं था इसलिए उसकी मृतात्मा को गालियां दें इससे हमारे चरित्र की नीचता ही उजागर होगी।
Recently, Journalist Arfa Khanum Sherwani targeted a little girl and called her radical just because she gifted a toy bulldozer to UP CM Yogi Adityanath.
But not a single word against the School that made children perform with dummy swords to the song "Sar Tan Se Juda".
Maybe because:
1) She doesn't consider it radicalization, as it is normal to her.
2) All these 10-20 kids are Arfa's children.
@ShashiTharoor जनसंख्या पर के आधार पर सीटें नहीं बढ़ेगी, एकसमान प्रतिशत बढ़ोतरी भी स्वीकार नहीं! फिर विपक्षी दल कोई ऐसा फॉर्मूला सुझाये जो उत्तर और दक्षिण दोनों के साथ न्याय करे।
ध्यान रहे यही विपक्ष
जातिगत आरक्षण पर जिसकी जितनी संख्या भारी उसकी उतनी हिस्सेदारी की डफली पीटते हुए थकती नहीं है।
@zoo_bear हर साल हजारो-लाखो जानवरों और मनुष्यों का जान लेने के बाद भी इस्लाम को शांतिवादी मजहब बताया जा सकता है तो आरएसएस को सांस्कृतिक संगठन बताने में क्या बुराई है?!
They are calling Ayush Malik an icon and hero because he left his family and converted his religion.
Our fearless hero and icon is KK Muhammad, who served as a Regional Director of ASI. His own community boycotted him and threatened him, yet he stood firm in stating that Temple ruins existed beneath the Babri Masjid.
We are not the same.
@zoo_bear@JPNadda@amitmalviya आईएसआईएस के टॉयलेट क्लीनर को गांधी से बहुत प्रेम है। ये अलग बात है कि इन पैदाइश यौन विकृत हराम के पिल्लों के लिए कुछ नहीं बोल पाया।
फैक्ट भी चेक नहीं किया कि ये एआई है या स्क्रिप्टेड है या पूराना है या शाखा में ट्रेनिंग लिए हुए बच्चे हैं।
https://t.co/Y1DskLVu0z
कल शामली मुजफ्फरनगर के लोगो से आयुष मलिक/अली के धर्मांतरण के विषय में बातचीत हुई और पता लगा कि अधिकांश जाट घरों में "हुक्का, चौद्धर, जाट्टा दा छोरा वाला स्वैग, सिंगल चाइल्ड पॉलिसी, सरकारी नौकरी और बाब्बा की दया तै..." ही चल रहा है और वो इसी से बाहर नहीं निकल पा रहे।
आज सभी बच्चों में धर्म-अधर्म, शत्रुबोध-मित्रबोध का कोई ज्ञान नहीं है। मां-बाप और बच्चे सब आधुनिकता की अंधी दौड के चलते पैसे के पीछे भाग रहे हैं।
हर हिन्दू का यही हाल है। इनके खेत में भी कोई चढ जाए तो ये लठ मारकर सर फोड देते हैं। यहाँ इनकी जिंदगी भर की फसल और इकलौती नसल कोई मुल्ला उडा ले जा रहा है तो साले भिखारियों की तरह गिडगिडा रहे हैं कि कोई मेरी बेटी वापस ला दे, कोई मेरा बेटा वापस ला दे।
क्यों ला दे बे? तू चने छील रहा था क्या जब वो कन्वर्ट हो रहा था? अब फोडो ना मुल्लाओं का सर जिसने तुम्हारी नसल और फसल दोनों चुरा ली। है हिम्मत?
मैने उनसे पूछा कि अगर उनके लडके को किसी ओबीसी लडकी से ही (नोन जाट पर यादव, गुर्जर आदि) से प्यार हो जाता तो शादी करवा देते? सबने मना कर दिया। कारण? जातिवाद और जाति वर्चस्व।
हिन्दुओं को आदत है अपना काम दूसरो को देने की। खाना आया बना देगी। स्कूल कॉलेज ही सब सिखाएंगे। बाब्बे ��र कथावाचक ही धर्म सिखाएंगे। फिल्में जीना सिखाएंगी। प्यार करना गाने सिखाएंगे। बस जातिवाद हम खुद सिखाएंगे। हां वो बात अलग है कि कन्वर्ट तो आखिर में मुसलमान ही करके ले जाएगा।
हिन्दू मंटेलिटी यही है कि अपना हिन्दू भाई खेत की मेड से भी ना गुजरे, बाकी मुसलमान चाहे नसल फसल दोनों उजाड दे। असल में गुलामी की मानसिकता अभी बहुत गहर में जमी जो बैठी है हिन्दुओं के मन में।
ऐसे बेगैरत मां बाप की कुटाई हो��ी चाहिए। पुरानी कहावत है "चोर को नहीं चोर की मां को पकडो।" अर्थात् परवरिश कैसी थी यह जानना और उसे दंडित करना बहुत जरूरी है। जिस दिन मां बाप की खाल उतरनी शुरू हो जाएगी उसी दिन सब सुधर जाएंगे। सालो को सारे काम आउटसोर्स करने की आदत पड चुकी है।
@abhinaymaths "मैं किसी व्यक्ति विशेष के पक्ष या विपक्ष में नहीं हूँ। मेरा मानना है कि किसी व्यक्ति के वर्षों के योगदान को एक दिन के आरोपों से और किसी ��रोप को अंतिम सत्य मानकर नहीं आँकन��� चाहिए। न अंध-समर्थन सही है, न अंध-विरोध।"
बोल कौन रहा है😂🤣🤣