बीज नकली
कीटनाशक नकली
खाद नकली
ये हर साल होता है. हजारों किसानों से साल भर की मेहनत बर्बाद हो जाती है लेकिन ऐसी बीज, खाद, कीटनाशक कंपनियों पर कार्रवाई के नाम पर महज ख़ानापूरी कर के सरकार छुट्टी पा लेती है.
@Surajbisht25 and I have reported several stories from the Bastar region since January last year.
This is a special one to me as it looks at the storytellers like Ranu Tiwari, Manku Netam, and Ankur Tiwari and how they facilitated the surrender of hundreds of Maoist cadres.
https://t.co/OkXdGbfApI via @theprintindia
गर्भवती महिला को कई किलोमीटर,दलदल वाली सड़क पर चलना पड़ा, तब जा कर कहीं एंबुलेंस मिली. मामला पखांजूर के पंडरीपानी का है.
स्वास्थ्य सुविधाएं पहले से ही बदहाल हैं,ऊपर से ख़राब सड़कों ने सरकारी दावे की पोल खोल दी है.कई सालों से सड़कें उन्हीं इलाकों में बन रही हैं, जहां खनन होने हैं.
बस्तर के अबूझमाड़ के गारपा इलाके में आदिवासियों की अराध्य देवी डोकरी दाई का घर था.
आदिवासियों के विरोध के बाद भी सड़क बनाने के नाम पर ठेकेदार द्वारा आदिवासियों के इस अराध्यस्थल को ध्वस्त कर दिया गया.
बस्तर संभाग के ,नारायणपुर, दंतेवाड़ा ,��ुकमा, बीजापुर ,कोंडागांव जिलों के बंद स्कूलों को खोलने की प्रशासन के खोखले दावे, बच्चों का भविष्य संकट में।
शिक्षा से वंचित बच्चों का भविष्य अंधकारमय। प्रशासन की नाकामी से नाराज ग्रामीण।
कांग्रेसी मुख्यमंत्री @bhupeshbaghel की सरकार ने आंगनबाड़ी केंद्रों के अधूरे निर्माण और घोटाले पर ध्यान नहीं दिया. अब @BJP4CGState के @vishnudsai से आदिवासियों की उम्मीदें हैं. आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गॉंव में नहीं जाती, बच्चे कुपोषित है...
���त्तीसगढ़ के भानुप्रतापपुर उपचुनाव में सर्व आदिवासी समाज के प्रत्याशी को AC चुनाव चिन्ह मिला था,जिसे आदिवासी इलाक़ों में बता पाना भी मुश्किल था.
फिर भी प्रत्याशी को 16% से ��धिक वोट मिले.
ताज़ा चुनाव में सर्व आदिवासी समाज 90 में से 50 सीटों पर लड़ेगा.
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छत्तीसगढ़ में जर्जर स्कूल भवन में शराब बनाई जा रही हो और स्कूल इंदिरा आवास में चल रहा हो, पाँच कक्षाओं लिए एक शिक्षिका हो, स्कूल तक जाने के लिए रास्ता नहीं हो….
ऐसे स्कूलों की संख्या हज़ारों में है.
दो-चार सौ चमचमाती बिल्डिंगों के विज्ञापन से बाहर, धरातल पर स्कूलों की तस्वीर.
हसदेव के विनाश की तस्वीरें कभी भुलाई नही जा सकती..
जिन आदिवासियों के जंगल-जंगल जमीन की रक्षा की बात भारत जोड़ो यात्रा में को गई,उन्हें इस धरती का मालिक बताया गया । दुखद रूप से छत्तीसगढ़ में उन्ही आदिवासियों को उनके जंगल जमीन से बेशर्मी से उजाड़ा जा रहा है।
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