भाजपा कुशासन में आम जनता तो छोड़िए, उत्तर प्रदेश विधानसभा तक में विधायकों की भी अभिव्यक्ति पर आपत��ति करना निंदनीय है लेकिन उससे अधिक निंदनीय ये है कि सदन के बाहर जो सत्ताधारी महिलाओं का अपमान करते हैं, वो सदन तक में महिला विधायकों से शालीन व्यवहार नहीं करते हैं।
जनता तो बस इतना पूछ रही है कि अगर माननीय मुख्यमंत्री जी की बनाई SIT ने “दूध का दूध पानी का पानी” कर दिया था तो क्या नई SIT पानी का भी पानी करेगी। भाजपा सरकार है या वॉटर फ़िल्टर?
भगवान को नचाने का अहंकार रखनेवालों को भगवान ने ही नचा दिया। अपने को भगवान से ऊपर समझनेवालों को भगवान ने चलती गाड़ी से नीचे उतार दिया है और साथ ही उनके घमंड का बुख़ार भी।
ये युवाओं की एकता और उनके अभिभावकों के आक्रोश का संयुक्त परिणाम है क्योंकि:
- ‘वोट चोरी’
- ‘पेपर चोरी’
- ‘चढ़ावा-चंदा-दान चोरी’
- ’नौकरी चोरी’
- ’आरक्षण चोरी’
- ‘कमीशनख़ोरी’
- ’पीडीए पर अत्याचार’
- ’घोर भ्रष्टाचार’
- ‘महंगाई की मार’
- ’मिलावट के सरकारीकरण’
- ‘माताओं-बेटियों तक का अपमान’
- ’देश के जेन ज़ी पर हर तरह से प्रहार’
भाजपा ने इन सभी तरीक़ों से जनता के विश्वास और आस्था तक को ठगा है।
अब तो भाजपावाले भी अपने ही ‘किसी’ का इस्तीफ़ा माँगेंगे क्योंकि जो ��पनी ही विधानसभा हार गये उनके भरोसे नाव कैसे पार होगी। दरअसल ये हार उनकी है जिन्होंने उनको चुना था या कहें संगठन पर अपनी मर्ज़ी की तरह थोपा था। अब तो कोई ये भी नहीं कह सकता है कि ‘भाजपा में इस्तीफ़े नहीं होते हैं।’
सबसे ज़्यादा खुश तो उप्र में ‘वो’ हैं, जिनको ‘पीडीए’ समाज का होने की वजह से राष्ट्रीय स्तर का पद न देकर जानबूझकर राज्य स्तर का पद दिया गया था। आज तो वो भी मुस्कुराकर पूछ रहे हैं : ‘5 बड���ा या 7’। वैसे जनता ये भी कह रही है कि जब राष्ट्रीय अध्यक्ष विधानसभा नहीं जिता पाये तो राज्य-अध्यक्ष तो विधानसभा लड़वा भी नहीं पाएंगे।
ये डबल इंजन की डबल हार है।
भाजपा की हार मतलब बदलाव की शुरुआत! भाजपा की सबसे सुरक्षित और परंपरागत सीटें भी अब उनकी हार नहीं बचा पाएंगी। अब भाजपा का संकट हार से बढ़कर इस बात का होगा कि उनका टिकट ले��ेवाला ‘ड्रोन और दूरबीन’ से भी ढूंढे नहीं मिलेगा।
सभी विजयी उम्मीदवारों को जीत की बधाई और नई उम्मीदों पर खरे उतरने के लिए सजग-सचेत और संविधान के प्रति वचनबद्ध रहने की अपेक्षा।
(कोष्ठक में विशेष : लड्डू तो भाजपा के अंदर भी बँट रहे हैं…)
जब भट्टा ही भ्रष्ट है तो ईंटा तो ख़राब होगा ही।
भाजपाई कमीशनख़ोरी ही हर भ्रष्टाचार की जड़ है।
’कैमरे के सामने दिखावा, पीठ पीछे बँटवारा’ ही भ्रष्टाचारी भाजपाइयों की सफ़ेददपोश चाल है।
हिंसा हार के डर से जन्म लेती है।
भाजपा हताश है इसीलिए देश के बच्चों के बाद अब सांसद तक पर प्राणघातक हमले करवा र��ी है। उनकी प्रेस कांफ्रेंस में एक हमलावर के चाकू लेकर पहुँचने की घटना बेहद गंभीर मामला है और माननीय सांसद की सुरक्षा में लगे सरकारी मह��मे की भारी चूक भी। जाँच हो।
जनप्रिय सांसद श्री पप्पू यादव जी की लोकप्रियता, भाजपा पचा नहीं पा रही है क्योंकि भाजपा अपने कुकृत्यों की वजह से हर तरह से बदनाम हो चुकी है।
माननीय लोकसभा अध्यक्ष जी संज्ञान लें!
श्री पप्पू यादव जी सदैव यूँ ही सक्रिय रहें।
@pappuyadavjapl
अयोध्या से आया ये समाचार बेहद दुखद है कि अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान ठेले पर पानी बेचने वाले बिहार निवासी दीपक कुमार की मौत हो गई। उनकी पत्नी का आरोप है कि प्रवर्तन दलवालों ने डंडा लेकर दौड़ाया था जिसके बाद गिरकर उनके पति की मौत हो गई। पुलिस कह रही है कि उन्हें घटना की सूचना नहीं दी गई, अगर दी गई होती तो मृतक का पोस्टमार्टम कराया जाता।
भाजपा राज में शासन-प्रशासन बेहद संवेदनहीन और अमानवीय हो गया है।
दोषियों के विरुध्द कार्रवाई हो!
ये पीडीए के ख़िलाफ़ वर्चस्ववादियों की दुर्भावना का घोर निंदनीय प्रदर्शन है। अभी प्रभुत्ववादी भाजपाई और उनके संगी-साथी अयोध्या में लोकसभा चुनाव हारे थे अब विधानसभा चुनाव में अयोध्या मंडल की हर सीट हारेंगे और उप्र की हर एक आरक्षित सीट भी।
भाजपा 2027 के चुनाव में अपना खाता खोलने के लिए तरस जाएगी।
प्रिय कलाकारों-रचनाकारों
भारतीय जनता पार्टी ने जिस प्रकार एक मजबूर और बेबस कलाकार की प्रतिभा का दुरुपयोग अपना राजनीतिक स्वार्थ साधने के लिए किया वो बेहद निंदनीय है। सबको मालूम है कि कुछ दिनों पहले, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के लखनऊ आगमन पर, उनके रथ के आगे एक कलाकार को हनुमान जी के रूप में नृत्य करवाया गया था। जिससे संपूर्ण विश्व के बजरंगबली जी के उपासकों में आज तक गहरा आक्रोश है।
इसमें किसी ग़रीब कलाकार का कोई दोष नहीं है क्योंकि भाजपा सरकार में कलाकारों के लिए कोई स्थान नहीं है, इसीलिए वो अपने परिवार को चलाने के लिए वि���श हैं। नकारात्मक भाजपाई सदैव सृजनात्मकता के विरोधी रहे हैं क्योंकि सृजनात्मकता रूढ़ि��ों और रूढ़िवादिता के विरुध्द ही अपना नया रास्ता निकालती है, जो भाजपा की पुरातनपंथी-दक़ियानूसी सोच को तनिक भी रास नहीं आता है क्योंकि उनके अंदर रचनात्मकता की अभिव्यक्ति से ‘सत्ता विरोधी लहर’ के और भी बलवती होने का डर समाया रहता है। इसीलिए चाहे साहित्यकार हो, ईमानदार पत्रकार हो या कोई भी कलाकार, ये भाजपाई और उनके संगी-साथी चाहते ही नहीं हैं कि वो मुखर हो या उनकी कलात्मक अभिव्यक्ति को किसी भी ��रह का कोई मंच मिले। अगर भाजपाई कलाकारों को कभी मौका देते भी हैं तो अपने सम्मान के लिए, न कि कलाकारों के सम्मान के लिए।
आज हम सबने मिलकर आर्थिक तंगी झेल रहे कलाकार की सहायता की और आगे भी करेंगे जिससे वो अपने परिवार में चल रही बीमारी और बदहाली का सामना कर सके।
‘कलात्मकता’ मानवता का परिष्कार करती है। कला सहिष्णुता, सद्भाव, सौहार्द, समानता बढ़ाती है, इसीलिए जो लोग बंटवारे की नकारात्मक राजनीति ���रते हैं वो क��ाकारों के विरोधी होते हैं।
आज हम हर कलाकार से वादा करते हैं कि जिस प्रकार हमने अपनी सरकार के दौरान कलाकारों को हर तरह से मान-सम्मान और आर्थिक सहयोग किया था, नई सरकार के आने पर भी रचनात्मकता की उस स्वस्थ परंपरा को और भी आगे बढ़ाएँगे और उप्र से संबद्ध विशेष प्रतिभावानों के सामाजिक योगदान को ‘यश भारती सम्मान’ व 1 लाख रूपये प्रतिमाह देकर उनका आजीवन अभिनन्दन करेंगे।
सकारात्मकता ही सृजनात्मकत�� का सम्मान करती है।
आपका
अखिलेश
चार दिन की सरकार बची है, इसीलिए उप्र विधानसभा में सत्र भी चार दिन का ही हो रहा है।
1. पहला दिन उप्र भाजपा सरकार श्रद्धांजलि देने में निकाल देगी।
2. दूसरा दिन अयोध्या के प्रभु राम जी के मंदिर में हुई सुनियोजित चोरी के महापाप की ज़िम्मेदारी, अपने ऊपर से हटाकर केंद्र सरकार पर डालकर, अपना पल्ला झाड़ने में निकाल देगी।
3. तीसरा दिन प्रयागराज जैसे पूरे प्रदेश में हुए छात्र आंदोलन से बचने में निकाल देगी।
4. चौथा दिन दुखी माँ के सरेआम अपमान पर मुंह छिपाकर जल्दी से सत्र ख़त्म करने की घोषणा करने में निकाल देगी।
सच तो ये है कि अब भाजपा को भी मालूम है कि वो फिर कभी सरकार में वापस नहीं आएंगे, इसीलिए विधानसभा को महत्व नहीं दे रहे हैं बस सत्र आयोजित करने की औपचारिकता निभा रहे हैं।
भाजपा की चला-चली की बेला का मानसून सत्र भी चला-चली टाइप का सत्र है।
अब भाजपा जाएगी, फिर कभी न आएगी!
विशेष चेतावनी: बहरू���िये भाजपाई बहेलियों से दूर रहें !
सत्ताधारियों के साथ सिर्फ़ अंधेरे में रहने वाले भूमिगत, अनरजिस्टर्ड संगी-साथी ही नहीं हैं, बल्कि इस बहु-भुजाओं वाले _‘ऑक्टोपस गिरोह’_ के और भी कई हाथ हैं, जो चमचमाती लाइट में बैठकर और अपने ‘कुविचार-वंशियों’को आसपास बैठाकर ‘खुली साज़िश’ करते हैं, लोगों को किसी और बहाने से बुलाकर फँसाते हैं और दिनदहाड़े घेरकर शिकार करने की ��ोशिश करते हैं। ये ‘बहरूपिये बहेलिये’ हैं, जिनका भंडाफोड़ अब सरेआम हो गया है।
मूल रूप से ये वो ‘सुरंगजीवी गिरोह’ है जो अकेले को देखकर भीड़ बनाकर घेरकर शिकार करता है, लेकिन भीड़ को देखकर अलग-अलग होकर अंडरग्राउंड हो जाता है।
अपने आस-पास के घरों में गहराई से तलाशें! ये बिना KYC वाले लोग कहीं आपके आस-पड़ोस के किसी घर में प्रवास-वास न कर रहे हों। इनकी पहचान ये है कि ये थोड़े संदिग्ध टाइप का व्यवहार क��ते हैं। मन के मैले ये लोग साफ़-सुथरे, साधारण कपड़ों में रहते हैं। निकलते अकेले हैं लेकिन किसी ख़ुफ़िया जगह पर एक-दूसरे से अंजान बनकर अख़बार के पीछे मुँह छिपाकर फुसफुसाते हैं। बच्चों को अपना शिकार बनाते हैं, बड़ों पर झूठे इल्ज़ाम लगाते हैं, चरित्रहीनों को माला पहनाते हैं, अपने पुरुषवादी तंग नज़रिये के कारण नारी का अपमान करते-करवाते हैं, बहन-��ेटियों और दुखी माँ तक को सरेआम धमकाते हैं, नारी की आज़ादी पर नैतिकता के नाम पर पाबंदियाँ लगाते हैं। धन-लोलुपता, बदज़ुबानी, दग़ाबाज़ी, धोखे और षड्यंत्र के साथ-साथ बेशर्मी और बेरहमी इन स्वार्थियों की सबसे बड़ी पहचान है, जिसके लिए ये इंसान क्या, भगवान तक को ठग लेते हैं।
अपने तन-मन का रखें विशेष ध्यान : ख़तरे से रहें सावधान!
#CC_to_CC
#जो_भाजपा_का_साथी_वो_रामघाती_महापापी
अब भाजपा सरकार से त्रस्त जनता ने भाजपाइयों को पहचानना ही बंद कर दिया है।
अब तो भाजपाइयों और उनके संगी-साथियों की एक ही ‘बदनाम-पहचान’ बची है : CC
जनता भाजपाइयों को देखकर कह रही है :
“CC-CC!”
जो भाजपा का साथी, वो रामघाती-महापापी!
#CC_to_CC
अब अगर वो जुमलेवाले ‘15 लाख’ भी भाजपा दे दे तो भी जनता ‘चढ़ावा-चंदा-दान’ चोरी के महापाप, दुखी माँ के अपमान, पीडीए पर अत्याचार, बेतहाशा महँगाई, बेरोज़गारी और भ्रष्टाचार, छात्रों-युवाओं पर अत्याचार, शिक्षा-परीक्षा व्यवस्था व किसानी-मज़दूरी, व्यापार-कारोबार के ध्वस्त होने, शासन-प्रशासन की ज़्यादतियों जैसे और भी अन्य कारणों से भाजपा को हमेशा के लिए बाहर करने के लिए तैयार बैठी है।
अब भाजपा जाएगी, फिर कभी नहीं आएगी!
जो भाजपा का साथी, वो रामघाती-महापापी!
वनस्पति के संबंध में कुछ लोगों को प्रायोगिक अनुभव आधारित प्रामाणिक ज्ञान होता है क्योंकि जिस चीज़ को जो लोग इस्तेमाल करते हैं, उसके संबंध में उनकी नॉलेज बहुत गहरी होती है।