#GodMorningMonday
31/August/2026
सतभक्ति_करना_ज़रूरी_है
गुरु गोविंद कर जानिये रहे शब्द समाय, मिले तो दंडवत बंदगी नही पल पल ध्यान लगाये! सतगुरु पूरण परमात्मा ही होते हैं सतगुरु रूप में परमात्मा से पहले पूज्य होते हैं!
#जीवन_रक्षक_पूर्ण_परमात्मा
Kabir is God
♦️ पवित्र वेदों में आयु वृद्धि का प्रमाण
ऋग्वेद मण्डल 10 सूक्त 161 मंत्र 2 के अनुसार, यदि साधक की आयु समाप्त भी हो चुकी हो, तो पूर्ण परमात्मा कबीर देव उसकी आयु को बढ़ा सकते हैं और अकाल मृत्यु से बचाते हैं।
Kabir is god
#Godmorningmonday
#GodMorningSunday
सत्यार्थ प्रकाश' समुल्लास 11, पृष्ठ 289 पर! यहाँ दयानंद जी लिखते हैं कि मूर्तिपूजा के कारण रामचंद्र, श्रीकृष्ण, नारायण (विष्णु) और शिव का उपहास होता है और पुजारी उनके नाम पर भीख माँगकर उन्हें ‘भिखारी’ बनाते हैं।
Factful Debates YouTube Channel
#वाहरे_समाज_नाशक_महर्षिदयानंद
दयानंद सरस्वती ने पहला वार देवाधिदेव महादेव और हिन्दू देवी-देवताओं पर किया है
महर्षि दयानंद सरस्वती का जीवन चरित्र, पृष्ठ संख्या 125 पर लिखा है—‘तुम जिस लिंग की पूजा करते हो, यदि वह पृथक होकर यहाँ आ गया, तो कैलाश पर बैठा शिव हिजड़ा रह गया!’
!
#GodNightMonday
"पूर्ण संत की पहचान"
पूर्ण गुरु तीन प्रकार के मंत्रों (नाम) को तीन बार में उपदेश करेगा जिसका वर्णन कबीर सागर ग्रंथ पृष्ठ नंबर 265 बोध सागर में मिलता है व गीता जी के अध्याय नंबर 17 श्लोक 23 व सामवेद संख्या नंबर 822 में मिलता है।
🙇 🙇
जगतगुरु संत रामपाल जी महाराज
#GodNightMonday
कबीरजी कहते हैं कि जो झुककर नमस्ते विनम्रता धारण करता है, वह दूसरों के लिए नहीं, वरन् अपने लिए ही शुभ और महान कर्म करता है, जिस प्रकार तराजू में कोई वस्तु रखकर तौलने से, वह जिस ओर झुक जाएगी, वही भाग भारी कहलाएगा!
#वाहरे_समाज_नाशक_महर्षिदयानंद
'सत्यार्थ प्रकाश' समुल्लास 11, पृष्ठ 289 पर! यहाँ दयानंद जी लिखते हैं कि मूर्तिपूजा के कारण रामचंद्र, श्रीकृष्ण, नारायण (विष्णु) और शिव का उपहास होता है और पुजारी उनके नाम पर भीख माँगकर उन्हें ‘भिखारी’ बनाते हैं।
"जब तक सच्चे गुरु (सतगुरू) की प्राप्ति नहीं होती है तब तक गुरु बदलते रहना चाहिए।
जब तक गुरु मिले ना सांचा। तब तक करो गुरु दस पांचा ।।
- संत रामपाल जी महाराज
#SatlokAshramMundka#SantRampajiQuotes#KabirIsGod
#वाहरे_समाज_नाशक_महर्षिदयानंद
सत्यार्थ प्रकाश, समुल्लास 7, पृष्ठ 149 पर दयानंद जी परमात्मा को 'निराकार' कहते हैं और अगले ही पृष्ठ 150 पर लिखते हैं कि स्तुति से परमात्मा का 'साक्षात्कार' होता है। विचार कीजिए, साक्षात्कार तो साकार का ही संभव है!
Visit Satlok ashram you tube chanal