जब सवर्ण प्रोटेस्ट करता है तो प्रशासन दांत निपोरते हुए उनके साथ हाहाह��� करते हैं, पर जब दलित न्याय मांगता है तो यही पुलिसवाले उन्हें गाली देते हैं, थप्पड़ मारते हैं।
जाति और सत्ता का फर्क है बाबू। वर्ना अविनाश पांडेय की क्या औकात कि वह दलितों को बहन की गाली दे देता।
मैं ��सीलिए कहता हूँ कि दलित समुदाय के लोग अपने घर में आग लगाकर पड़ोसी के महल में बैठकर खुश होने वाली सोच का दंश झेल रहे हैं। अगर समाज ने आज बसपा को कमजोर न किया होता, तो क्या एक IPS अफसर की इतनी औकात होती कि वह "पूरी रोड गंदी कर दी सालों ने, इनके पिता जी की रोड नहीं है" जैसी गालियां देता? क्या वह आंदोलन में खड़े युवाओं को थप्पड़ मारता और बंदी वाहन में घुसकर समाज के युवाओं पर अपना जातीय रौब दिखाता? चूंकि वह ��ुख्यमंत्री योगी और गृहमंत्री अमित शाह का खास अफसर है, जाति से ब्राह्मण है, इसलिए सरकार उस पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही है।
दलितों को हिंदू कहकर हिंदू एकता का नारा देने वाले लोगों का दोहरा चरित्र देखिए। आज ��े खुलकर गालीबाज SSP अविनाश पांडेय के समर्थन में हैशटैग चला रहे हैं। इससे साफ सिद्ध होता है कि सवर्णों की हिंदू एकता का मतलब सिर्फ सवर्ण हितों को सुनिश्चित करना है। वरना जो द्विज हिंदू कल तक बिहार के कुख्यात अपराधी भरत तिवारी के लिए विलाप कर रहे थे, आज वे अविनाश पांडेय की गालीबाजी और गुंडागर्दी का समर्थन क्यों कर रहे हैं? सवर्ण प्रभुत्व ही इनकी हिंदू एकता का सार है; भाजपा सरकार और उसके अफसर इसी ��ित को बचाने के लिए काम कर रहे हैं।
भाजपा राज में पुलिस अन्याय का रिकॉर्ड तोड़ रही है। मेरठ में दलित समाज की बेटी ललिता गौतम के लिए न्याय की आवाज़ उठाने पर प्रशासन द्वारा पीड़ित परिवार सहित अन्य लोगों पर किया प्रहार और लाठी चार्ज बेहद निंदनीय है।
जब प्रदेश-प्रमुख ही सरेआम एक मृतक की माँ के साथ असंवेदनशील होने का उदाहरण प्रस्तुत करेंगे तो उनकी पुलि�� से कोई उम्मीद करना बेमानी है।
घोर निंदनीय!
15 मई 2026 को मेरठ में दलित छात्रा ललिता गौतम का अपहरण कर निर्मम हत्या से जुड़े बाकी आरोपियों को जेल भेजने की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे परिजनों और समाज के लोगों पर लाठीचार्ज तथा न्याय की ��ांग कर रहे प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया जाना भाजपा सरकार की दलित विरोधी और दमनकारी कार्यशैली को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी, यदि पीड़ित परिवार इस मामले में अन्य लोगों की संलिप्तता का आरोप लगा रहा है, तो उनकी मांगों को दबाने के बजाय पूरे प्रकरण की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कराई जानी चाहिए। यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई दोषी बचने न पाए और कोई निर्दोष फंसने न पाए। जांच मे��� जो भी दोषी पाया जाए, उसके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए तथा पीड़ित परिवार को शीघ्र न्याय दिलाया जाए।
मैं शीघ्र ही मेरठ पहुंचकर अपने इस परिवार से मुलाकात करूंगा।
.@BRSparty under the leadership of @KCRBRSPresident is firmly committed to #Article15 of Indian Constitution.
No person shall be discriminated on the basis of caste, race, sex, and religion. Same applies to scheduled castes as well.
Presidential Order 1950(3) restricts the rights of scheduled castes to practice the faith of their choice vis-à-vis other social categories in India.
This is highly discriminatory and patently unconstitutional.
This is what we are going to submit to Hon’ble Justice KG Balakrishnan in New Delhi today.
Jai Bhim.
Jai Telangana
BJP सरकार का दावा था- UP Police Constable Exam देने वालों युवाओं के लिए स्पेशल ट्रेनों की व्यवस्था की गई है।
मगर उस दावे की असल हकीकत भी देख लीजिए 👇🏼
युवा भ���री भीड़ में ट्रेन की खिड़की से डिब्बों में घुसने को मजबूर हैं।
BJP सरकार के दावे बस हवा-हवाई होते हैं, क्योंकि धरातल पर सबकुछ फुस्स होता है।
सरकार इतनी कायर और कमजोर है कि PM मोदी भारतीय नाविकों की हत्या पर एक शब्द नहीं बोल पा रहे हैं।
उधर सरकार के विदेशी प्रवक्ता अमेरिका एवं ट्रंप का नाम लेने से भी कांप रहे हैं। सारे कैबिनेट मंत्री ग��ंगे बने हुए हैं।
क्या 56 इंच की छाती सिर्फ गुब्बारा फुलाने के लिए है?
बसपा केवल सत्ता बदलने के लिए संघर्ष नहीं ���रती, वह सदियों से पड़े रूढ़िवादी समाज की जड़े खोदने के लिए संघर्ष करती है।
बसपा समाज को बदलने का संकल्प है, एक ऐसा संकल्प जो समाज में समानता,सामान और सामाजिक न्याय लाता हो।
#बहन_जी_का_संदेश
हम सभी के लिए अत्यंत चिंता का विषय है कि एनडीए की दिवालिया राजनीति और दिवालिए नेतृत्व के कारण प्रदेश की बिगड़ चुकी वित्तीय स्थिति, घटता राजस्व, बढ़ता राजकोषीय घाटा, अत्यधिक कर्ज, भारी ब्याज अदायगी तथा खोखली व अदूरदर्शी नीतियों के कारण हमारा बिहार कंगाल होने के कगार पर है। खज़ाना खाली होने के कारण प्रदेश में अराजकत वित्तीय हालात है।
नौसिखिए मुख्यमंत्री के नेतृत्व में सरकार का बजटीय प्रबंधन इतना बुरा, वित्तीय स्थिति इतनी बदतर और परिस्थितियां इतनी भयावह है कि वित्तीय वर्ष 𝟐𝟎𝟐𝟔-𝟐𝟕 के मात्र तीन महीने ही बीते है और सामान्य मासिक पेंशन दिए जाने वाले जैसे रूटीन भुगतान और कार्यों के लिए भी आकस्मिक निधि (𝐂𝐨𝐧𝐭𝐢𝐧𝐠𝐞𝐧𝐜𝐲 𝐅𝐮𝐧𝐝) से 𝟑𝟔𝟔𝟐 करोड़ ��ुपए की निकासी करनी पड़ रही है।
सरकार को वित्तीय संकट की सच्चाई स्वीकार कर, आम जनता को गुमराह करने के बदले राज्यवासियों को स्पष्टता से बताना चाहिए कि आखिर ऐसी नौबत क्यों आई कि रूटीन भुगतान के लिए नियमित बजटीय व्यवस्था की बजाय आकस्मिकता निधि का सहारा लेना पड़ रहा है ?
मेरे तथ्यात्मक, वास्तविक, तर्कपूर्ण सवालों का जवाब देने की बजाय एनडीए सरकार भ्रामक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बचकाने कार्य कर ���ही है।
सरकार में बैठे लोगों को आकस्मिकता निधि के संबंध में सर्वप्रथम संविधान के अनुच्छेद 𝟐𝟔𝟕(𝟏) एवं (𝟐) में अंकित प्रावधानों का अवलोकन करना उचित होगा। संविधान के अनुसार, “According to article 267(1) Parliament may by law establish a contingency fund, which shall be placed at the disposal of the President, for the purposes of meeting unforeseen expenditure.
Similarly, in article 267(2) it is provisioned that the legislature of a state may by law established a contingency fund which shall be placed at the disposal of the governor to enable advances for the purpose of meeting unforeseen expenditure.
संवैधानिक प्रावधानों के अवलोकन से यह स्पष्ट होता है कि “𝐓𝐡𝐞 𝐞𝐱𝐩𝐞𝐧𝐝𝐢𝐭𝐮𝐫𝐞 𝐦𝐮𝐬𝐭 𝐛𝐞 𝐨𝐟 𝐚𝐧 𝐮𝐧𝐟𝐨𝐫𝐞𝐬𝐞𝐞𝐧 𝐧𝐚𝐭𝐮𝐫𝐞 𝐨𝐫 𝐨𝐟 𝐞𝐦𝐞𝐫𝐠𝐞𝐧𝐭 𝐜𝐡𝐚𝐫𝐚𝐜𝐭𝐞𝐫” अर्थात् नार्मल और रूटीन मामलों में इस फंड का इस्तेमाल नहीं किया जाना है। राज्य में अचानक आए किसी संकट से निपटने के लिए राज्यपाल इस निधि से अग्रिम राशि की मंजूरी दे सकते हैं
ऐसी स्थिति में सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन जो दशकों से नियमित तरीके से हर महीने लाभुक के खाते में जाती रही है, अब बिना व्यवस्था परिवर्तन ऐसी क्या विचित्र वित्तीय परिस्थिति उत्पन्न हो गई कि सामान्य मासिक पेंशन दिए जाने के लिए भी आकस्मिक निधि का इस्तेमाल किया गया। अगर ��रकार को सामान्य और नियमित खर्च के लिए भी आकस्मिक निधि का उपयोग करना पड़ रहा है तो फिर विकास कार्यों और अन्य परियोजनाओं के लिए धनराशि कहाँ से आएगी?
क्या पेंशन कोई आकस्मिक खर्च है? पेंशनधारक और हमारे सम्मानित बुजुर्ग और माता-बहने आपदा नहीं हो सकते जिनके लिए आपको आपदा राशि से भुगतान करना पड़े? सरकार इस पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की जगह मामले को दिग्भ्रमित करने का प्रयास कर रही है।
बिहार सरका��� द्वारा इसे बजटीय प्रबंधन मात्र बताकर इसके सैद्धांतिक पक्ष और मूल कारण बताने से बचने का प्रयास किया गया है। सरकार की आर्थिक स्थिति दयनीय है इसलिए पब्लिक डोमेन में सरकार इसे स्वीकार करने से डर रही है।
बिहार के वित्तीय हालात को लेकर जो संकेत मिल रहे हैं वो चिंताजनक है। वित्तीय वर्ष 𝟐𝟔-𝟐𝟕 बजट में बताया गया है कि वर्ष 𝟐𝟓-𝟐𝟔 में बिहार का राजकोषीय घाटा (𝐅𝐢𝐬𝐜𝐚𝐥 𝐃𝐞𝐟𝐢𝐜𝐢𝐭) 𝟏𝟏.𝟖% के चिंताजनक स्तर पर पहुँच चुका है। इस संबंध में यह स्पष्ट करना जरूरी है की 𝐅𝐑𝐁𝐌 𝐀𝐜𝐭 (राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम) के तहत राजकोषीय घाटा 𝟑% से अधिक नहीं होना चाहिए परंतु बिहार सरकार का राजकोषीय घाटा लक्ष्य के तीन से पाँच गुना तक अधिक हो रहा है।
बिहार में वित्तीय प्रबंधन को लेकर सवाल पहले से ही उठ रहे हैं, लेकिन अब एक ऐसा प्रावधान सामने आया है जो केवल वित्तीय अनुशासन ही नहीं बल्कि प्रशासनिक विवेक पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
कुछ माह पूर्व 𝐍𝐃𝐀 सरकार ��क संशोधन लेकर आयी है , जिसके तहत प्रावधान किया गया कि बिहार आकस्मिकता निधि का आकार किसी भी वित्त वर्ष में उस वर्ष के बजटीय व्यय के 𝟏𝟎% तक बढ़ाया जा सकता है।
@Mayawati IIT अभिषेक मिश्रा , जितेंद्र तिवारी ......जो महिलाओं के साथ गंभीर अत्याचार किया है उस पिचाश राक्षसों के बारे में ट्वीट करना चाहिए।जो सदियों से देश को वर्ण व्यवस्था से बर्बाद कर दिया है और कर रहा हैं।
उत्तर प्रदेश जैसे विशाल आबादी वाले राज्य में भीषण गर्मी के इस मौसम में बिजली की कम अपूर्ति व कटौती आदि की आम शिकायतों व उसको लेकर विशेषकर ग़रीब, मध्यम वर्ग, किसान, छोटे व्यापारियों व अन्य करोड़ों मेहनतकश लोगों का जीवन अति-कष्टदायी बना हुआ है तथा इसको लेकर लोग विभिन्न रूपों में अपना आक्रोश भी प्रकट कर रहे हैं, जिसकी चर्चा मीडिया में भी काफी व निरन्तर रहती है।
अतः सरकार से अपील है कि वह बिजली आपूर्ति सम्बंधी लोगों के कष्ट व परेशानियों को ध्यान में रखते हुये ज़रूरी उपाय तत्काल सुनिश्चित करे। इसके साथ ही, नये पावर प्लाण्ट आदि के माध्यम से भी आगे के लिये बिजली आपूर्ति की स्थिति को सुधारने का प्रयास करे तो यह व्यापक जनहित में उचित होगा।
संविधान निर्माता बाबासाहेब डॉ भीमराव अंबेडकर जी ने हर एक भारतीय को संविधान के रूप में एक सुरक्षाकवच दिया जो स्वतंत्रता, समानता, न्याय और बंधुत्व की गारंटी है। बाबासाहेब के अथक प्रयासों से वंचित वर्गों के सवाल हमारे स्वतंत्रता आंदोलन और संविधान का अभिन्न हिस्सा बने। सबको समान अवसर, समान अधिकार और सबका कल्याण ही बाबासाहेब की विचारधारा का मूल है। संविधान के मूल्यों व बाबासाहेब के विचारों की रक्षा का संकल्प ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि है।
बाबासाहेब की जयंती पर उन्हें सादर नमन।
"अंबेडकर आंबेडकर मत करो.. इतना नाम भगवान का लोगे तो स्वर्ग मिल जाएगा"
अमित शाह जी आज नागपुर में बाबा साहेब के लाखों दीवाने आपसे कुछ कहना चाह रहे थे
जब बाबा साहेब ने हमे संविधान दिया हमने अपना स्वर्ग यही पा लिया।
அரசியலமைப்புச் சட்டத்தின் மூலம் சமத்துவம், சம உரிமை, சமூக நீதி, ஜனநாயகம் ஆகியவற்றை நிலைநிறுத்தியவர். வலுவான அடித்தளம் அமைத்து, எளியவர்களுக்கும் அதிகாரம் கிடைக்கப் பாடுபட்டவர். நம் கொள்கைத் தலைவர் அண்ணல் அம்பேத்கர் அவர்களின் பிறந்தநாள் இன்று. அவரது பிறந்தநாளை முன்னிட்டு, சென்னையில் உள்ள அலுவலகத்தில் அவரது திருவுருவப் படத்திற்கு மாலை அணிவித்து மரியாதை செலுத்தினேன்.
நம் கொள்கைத் தலைவரின் பிறந்தநாளில், சமத்துவ சமுதாயம் அமைக்கும் லட்சியப் பாதையில் பயணிப்போம். மக்கள் விரும்பும் மக்களாட்சியை அமைக்க உறுதியேற்போம்.
On the birth anniversary of Babasaheb Dr B. R. Ambedkar, we bow with deep reverence to the visionary who gave India its moral and Constitutional soul.
Babasaheb was not just the architect of the Constitution of India, but a relentless warrior for Liberty, Equality, Fraternity and Justice, values that define the very idea of India.
Today, when the Constitution faces a conspiratorial attack, his words and warnings echo with renewed urgency. This is a moment that calls for courage and conviction.
We must not merely remember him, we must rise to defend every principle he enshrined, to protect every right he secured, and to uphold every value he lived and fought for.