जब मैंने काफ़ी आत्मविश्वास हासिल कर लिया तो मौका हाथ से निकल गया, जब मुझे हार पक्की लगी तो मैं जीत गया, जब मुझे लोगों की सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी वे मुझे छोड़ गए, जब मैंने अपने आँसू पोंछने सीख लिये मुझे रोने के लिए कांधा मिल गया....
ज़िन्दगी अपने सबसे ठहराव के दौर में है, दरख़्त से एक पत्ती भी गिरती है तो झील में लहर सी आ जाती है, बिल्कुल वैसे ही जैसे बरसो किसी ने आवाज़ न दी हो और तुमने मेरा नाम आहिस्ता पुकारा हो।