सच कहूं तो,
बिना जाति देखे देश में मिलने वाले समस्त कल्याणकारी योजनाओं पर पहला अधिकार इनका होना चाहिए, लाखों रुपए प्रतिमाह शराब एवं शबाब पर उड़ाने वालों का नहीं।
मर्दों की जिंदगी भी कितनी कठिन होती है💔
ये लड़का घर से दूर मजदूरी करने आया था। काम करते-करते जब उसे भूख लगी तो वह बैठकर खाना खाने लगा। तभी जब मालिक को अपनी तरफ आ��े देखा तो डरकर अपना खाना छुपा लिया।
मालिक ने जब खाना दिखाने को कहा, तो सामने सिर्फ प्याज और सुखी रोटी थी।
मर्द की जिंदगी भी अजीब होती है… पेट की भूख भी छुपानी पड़ती है और मजबूरी भी।
नेपाल मैं बाढ़ मैं बहकर आ रहा एक बच्चा देखिए यह
कुत्ता क्या करेगा भगवान उन सभी को बुद्धी दे जो इन
बेज़ुबान जानवरों के साथ गलत व्यवहार करते है चाहे वो
कोई भी हो...
4 महीने पहले अडानी जी द्वारा बनाए गए 36 हज़ार करोड़ के गंगा एक्स्प्रेस वे पर नेहरू जी ने हथौड़ा मारकर गड्ढा कर दिया,
पिछले 12 सालों से नेहरू जी सरकार को काम नहीं करने दे रहे
तमिलनाडु में कुछ ऐसा नजारा देखने को मिला,जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र को हिलाकर रख दिया। किसी को भनक तक नहीं थी,कोई VIP सायरन नहीं, कोई पहले से तय काफिला नहीं और अचानक मुख्यमंत्री थलापति विजय सीधे एक स्थानीय पुलिस थाने के SHO के सामने खड़े हो गए!
जैसे ही SHO साहब और थाने के बाकी स्टाफ ने सामने अपने मुख्यमंत्री को खड़े देखा, सब दंग रह गए। थाने का रजिस्टर चेक हुआ, आम जनता की शिकायतों की स्थिति देखी गई और साफ संदेश दिया गया की जनता की सेवा में कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी।
बिना पूर्व सूचना निरीक्षण जब सिस्टम ��ो यह पता ही न हो कि सीएम कब, कहां और किस दफ्तर में औचक निरीक्षण के लिए पहुंच जाएंगे, तो लापरवाही अपने आप जड़ से खत्म हो जाती है।
एक सच्चे नेता की यही पहचान होती है कि वह जनता का सेवक बनकर रहे, न कि सिर्फ AC कमरों का हुक्मरान। जब नेतृत्व खुद मैदान में डट जाता है, तो जनता का भरोसा लोकतंत्र पर और ज्यादा गहरा हो जाता है।
हर राज्य को ऐसे ही साहसी, सक्रिय और जमीनी नेतृत्व की जरूरत है ताकि सरकारी तंत्र जनता के लिए काम करे,न कि जनता सिस्टम के चक्कर काटे।
ये हैं शोषक दशोदरी पांडे, जो अपने आलीशान महल के बाहर खड़ी होकर रो रही है क्योंकि उसमें पानी भर गया है और दीवारें ढह गई हैं!
ऐसे लोगों को अत्याचारी बताकर iphone चलाने वाले और mercedes में बैठने वाले "शोषित वंचित" लोग आरक्षण लेते हैं!
नेपाल से दिल दहला देने वाली तस्वीरें
एक छोटा बच्चा अपनी छोटी बहन का ख्याल रख रहा है और अपने माता-पिता को ढूंढ रहा है ।
उनके चेहरों पर दर्द और खरोंचें देखिए।
ये हैं राजेंद्र दादाबी जी...
ये जिस इमारत की तरफ इशारा कर रहे हैं, वह नेपाल की भयावह बाढ़ में ध्वस्त हुई एक स्कूल की इमारत है।
जब आपदा आई, इस स्कूल में कुल 1643 बच्चे मौजूद थे।
हेडमास्टर राजेंद्र जी के पास आपदा से कुछ ही मिनट पहले ऊपरी इलाके में रह रहे उनके एक मित्र का फोन आया और उन्हें बाढ़ की सूचना मिली।
राजेंद्र जी ने बेहद त्वरित निर्णय लिया और कार्रवाई की... एक सेकंड बर्बाद किए बिना उन्होंने स्कूल के हर बच्चे को बेहद सूझबूझ से बाहर निकाला और उन्हें ऊँचे स्थान पर ले गए। बड़े बच्चों व अन्य शिक्षकों ने छोटे बच्चों को गोद में उठाकर ऊंचाई पर पहुँचाया।
एक-एक बच्चे व साथी को स्कूल से निकालकर राजेंद्र जी खुद वहाँ से हटे।
राजेंद्र जी ने सिर्फ 1643 बच्चों का जीवन ही नहीं बचाया... बल्कि वो नेपाल के भविष्य की एक पीढ़ी को बचाने वाले हीरो हैं।
सैल्यूट राजेंद्र दादाबी जी!
"डीएम अंकल मेरे घर की रोड बनवा दीजिए, पानी भर जाता है"
◆ बाराबंकी : छोटी बच्ची ने की DM से रोड बनवाने की अपील
◆ वीडियो सोशल मीडिया पर हुआ वायरल
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500 सालों बाद ऐसा नेता मिला है इस कोहिनूर को खो मत देना दोस्तों
अभी तो 2047 तक देखना चांद , मंगल,गुरू,हर ग्रह पर प्लाट मिलेंगे
महामानव को झूकने मत देना
*नमो-नमो*