गोदी मीडिया यह वीडियो नहीं दिखाएगा क्योंकि इसमें सरकार की कमियां उजागर होती हैं!
PR पर करोड़ों खर्च, काम ज़ीरो!
बड़े-बड़े नारे, काम बहुत कम!
कियारा अग्रवाल का धन्यवाद। स्प्रिंगडेल्स स्कूल ने देश को जगाया है।
दिल्ली : 15 अगस्त से CJP का राष्ट्रव्यापी अभियान
➡️अभिजीत दिपके ने अभियान का किया ऐलान
➡️ग्रामीण सरकारी स्कूलों का सोशल ऑडिट होगा
➡️बिजली, पेयजल और शौचालय की होगी जांच
➡️मिड-डे मील व्यवस्था का भी होगा जायजा-CJP
➡️अभिभावकों और ग्रामीणों से वीडियो बनाने की अपील
➡️स्कूलों की कमियों को सामने लाने की पहल
➡️सरपंचों से स्कूलों की व्यवस्था सुधारने की अपील
➡️सुधार की तस्वीरें सोशल मीडिया पर होंगी साझा
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प्रयागराज के डॉक्टर नरेन्द्र सिंह ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया में शेयर किया, प्राइवेट बिना नम्बर प्लेट की गाड़ी से 6-7 लोग आए और प्रोटेस्ट में शामिल होने वाले छात्रों को घरों से खींचकर मारते पीटते गाड़ी में भरकर ले गए।
प्रोटेस्ट समाप्त ह���ने के बाद छात्रों की मुश्किलें बढ़ गई हैं, वह अपने घरों में भी सुरक���षित नहीं हैं।
यूपी की फैक्ट्रियों में गेहूं के साथ पत्थर की पिसाई: फैक्ट्री का ऑपरेटर बोला- 'मालिक ज्यादा मुनाफे के लिए आटे में सफेद पत्थर का चूरा मिलाते हैं', आटा देशभर में ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर बिक रहा; रिपोर्टर ने मजदूर बनकर आटे की फैक्ट्री में 25 दिन गुजारे, जानें कैसे एक्सपोज हुआ यह खेल
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NEET पेपर लीक केस
फास्ट ट्रैक कोर्ट में पहले दिन ही सुनवाई टल गई, क्योंकि CBI के वकील नहीं आए थे. अब अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी.
ये है फास्ट ट्रैक कोर्ट का हाल, जिसे मोदी सरकार अपनी जीत बता रही है.
जब मैंने रेंबल (जिसने अब अपना नाम बदल कर वेनाड फ़ूड इंडस्ट्रीज़ कर लिया है) के वित्तीय दस्तावेज़ खंगाले, तो एक चौंकाने वाला पैटर्न सामने आया. रेंबल का सीधा जुड़ाव सियान एग्रो इंडस्ट्रीज़ एंड इंफ्रास्ट्रक्चर से था, जो केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के व्यावसायिक साम्राज्य की प्रमुख कंपनी है. गडकरी, जिन्हें बीजेपी में आरएसएस का बेहद क़रीबी माना जाता है, नागपुर से सांसद हैं. सियान एग्रो के मैनेजिंग डायरेक्टर उनके बेटे निखिल गडकरी हैं.
रेंबल के अधिकांश शेयरधारक और निदेशक गडकरी परिवार की कंपनियों से जुड़े हैं. इतना ही नहीं, बीफ़ के व्यापार से जुड़े कई पुराने शेयरधारकों ने सियान एग्रो में निवेश किया है. जिस सहकारी बैंक से रेंबल को बड़ा कर्ज़ मिला है, उसकी अध्यक्षा मंत्री गडकरी की पत्नी कंचन गडकरी हैं. रेंबल के प्रबंध निदेशक महेश कुमार बालकृष्ण पिल्लई पहले ‘सियान कैपिटल’ के निदेशक थे, जिसका पंजीकृत पता वही है जो सियान एग्रो का है. किसी नई कंपनी को करोड़ों की व्यापारिक उधारी (ट्रेड पे एबल्स) की सुविधा मिलना व्याप��रिक जगत में असाधारण है.
यह संबंध केवल वित्त तक सीमित नहीं था. रेंबल और मिथर (मार्केटिंग फर्म) के कामकाज की शैली पूरी तरह सियान एग्रो जैसी थी. मिथर की वेबसाइट पर गडकरी की अन्य कंपनियों के विवरण थे और उनके ब्रोशर पर सियान एग्रो का लोगो प्रमुखता से अंकित था. गूगल मैप्स पर 'रेंबल एग्रो' की तस्वीर में भी ‘सियान’ का लोगो स्पष्ट दिखता है.
यही अस्पष्टता उनके उत्पादों के साथ भी है. उनके कुछ विज्ञापनों में इसे भैंस का मांस (बफ़ या कैरबीफ़) बताया जाता है, जबकि मिथर की वेबसाइट पर कई उत्पादों पर 'बीफ़' (जो आमतौर पर गाय या बैल के लिए प्रयुक्त होता है) अंकित है. गडकरी के 27 कंपनियों के साम्राज्य की पड़ताल में यह विरोधाभास बार-बार उभरकर सामने आया.
गडकरी के व्यापारिक साम्राज्य से जुड़ी बीफ कंपनी पर कौशल श्रॉफ की पूरी रिपोर्ट: https://t.co/p60QAfoDIl
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सवाल यह है: यह कौन सा मॉडल है—इंजीनियरिंग का कमाल या 'कमीशनखोरी' की मिसाल?