बहुत बुरी लग गई, जब बात ख़ुद पर आई
पर जब औरों पर कही, तो न हुई कार्रवाई
काश उनके साथ भी ऐसा ही होता जो विपक्ष ���र आपत्तिजनक टिप्पणी करते हैं और सरासर झूठे आरोप लगाते हैं।
पक्षपात अन्याय का ही एक रूप है।
वनस्पति मारे मति!
अपने मन के रंग का चश्मा लगाकर नहीं आए होते तो शायद अपने चिराग़ तले का काला अंधेरा देख पाते। लोग पूछ रहे हैं इतनी बार जाते क्यों थे क्या इनको भी लगता है कि ये स्पष्टीकरण ‘उल्लेखनीय’ नहीं है। बात न भटकाएं, मुद्दे पर रहें। हिसाब तो देना ही पड़ेगा, यहाँ का भी और अपने वहाँ का भी। बात निकली है तो दूर तलक जाएगी… अभी तो इसमें दीये, तेल, बाती के हिसाब-किताब की बात भी आएगी।
महापापी भाजपा से पल्ला छुड़ाने के लिए भाजपाई जन प्रतिनिधि तरह-तरह के तरीक़े अपना रहे हैं। वो समझ गये हैं कि भाजपा की डूबती नाव से जितनी जल्दी उतर लो उतना ही अच्छा है।
समाचार: आगरा में भाजपा पार्षद ने नाले की दुर्गति के विरोध में अपनी सरकार के ही ख़ि��ाफ़ मोर्चा खोला और विरोध स्वरूप अपने जन्मदिन का केक नाले में काटा।
जनता अब भाजपाइयों का भाषण सुनने के मूड में नहीं है।
अंहकार विवेक हर लेता है।
जो दूर से ये धारणा बनाये बैठे थे कि ‘कोई’ ईमानदार है; भ्रष्ट नहीं है; जन-सेवा में निस्वार्थ भाव से लगा है; भौतिक-लालच से परे है, अब तथाकथित माननीय का ‘म्यूट कर दिया गया वो वीडियो’ देखकर, उनका भी सारा भ्रम टूटकर चकनाचूर हो गया है। जो व्यक्ति सैकड़ों कैमरों ��े सामने किसी माँ की गोद उजड़ जाने के सबसे बड़े दुख के क्षण में भी एक दुखी परिव���र को सांत्वना देने की जगह धमकी भरे लहजे में, अपने कठोर हाव-भाव के साथ बोल रहा हो, वो कितना हृदयहीन, संवेदना शून्य, निष्ठुर और निर्मम होगा, अब ये बात सबके सामने खुल गई है। इसे ही क्रूर-व्यवहार कहते हैं, ये बेहद अमानवीय है।
अब इनके झूठे नायकत्व का सारा मायाजाल तार-तार हो गया है। सबसे ज़्यादा ठेस इनके सबसे बड़े उन प्रशंसकों और समर्थकों को लगी है जो इनकी ‘मिथ्या दिव्यता’ के गुणगान करते नहीं थकते थ��। वो अब अपने घर की महिलाओं को ही मुँह दिखाने लायक नहीं बचे, अन्य महिलाओं का सामना करने की तो बात ही बहुत दूर है। वो जब ये सोचकर देख रहे हैं कि कहीं ऐसी दुखद घटना उनके परिवार के साथ घटती और उनके घर की किसी ‘माँ’ के साथ ऐसा दुर्व्यवहार होता तो क्या होता, ये विचार करके ही वो काँप जा रहे हैं और सोच रहे हैं कि ��ो किस पाताली कूप में कूदकर अपनी शर्मिंदगी छिपाएं।
याद रखा जाए इनकी कटु-वचन वाणी का ये पहला उदाहरण नहीं है। पत्रकार से लेकर अधिकारी तक पहले भी सरेआम इनका शिकार हो चुके हैं।
जिसके लोक व्यवहार में खोट होता है, वो अकेले में कैसा व्यवहार करता होगा, जनता ये समझ गई है। अब क्या तथाकथित माननीय ये कहेंगे कि पूरी दुनिया में फैल चुका उनका वीडियो AI जेनरेटेड है। सच तो ये है कि अगर जनता चाहे तो AI से होंठों को पढ़कर ये बता सकती है कि ‘वास्तव में उन्होंने किन अपशब्दों का इस्तेमाल किया था’।
जिसका अपने वचन-व्यवहार पर नियंत्रण नहीं वो प्रदेश पर क्या नियंत्रण करेगा और दिल्ली पर राज के सपने क्या देखेगा।
इनके इस कुकृत्य की वजह से अब प्रदेश, देश, दुनिया की कोई महिला चाहे वो माँ हो या बहन, वो अब भाजपा का पूर्ण बहिष्कार करेग���। इस घटना ने संपूर्ण विश्व में भाजपा की दिखावटी, सजावटी, बनावटी छवि को मिट्टी में मिला दिया है। अब भाजपा इनको पद से हटा भी देगी तो भी ‘आधी आबादी’ के वोट नहीं पायेगी क्योंकि ‘बात जब माँ की आती है तो हर सरहद मिट जाती है।’
जनता ने भाजपाइयों का ‘नारी वंदन’ का सच कैमरे के सामने देख लिया है। भाजपा और उनके संकीर्ण सोच के संगी-साथी सभी लोगों की सामंती सोच में जब नारी के लिए ही कोई स्थान नहीं है तो नारी के मान-सम्मान के लिए क्या होगा।
अभूतपूर्व निंदनीय!
भाजपा हटाओ, संवेदना बचाओ!
माँ का दर्द कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा!
अब तो इस्तीफ़ा दे दो!
NEET की परीक्षा में फिर से धोखाधड़ी बताती है कि भाजपाई गैंग इस बार किसी और के लिए पेपर सॉल्व करन��� का मुखौटा लगाकर आई, क्योंकि नीचे-से-ऊपर तक सब मिले थे, इसीलिए बायोमेट्रिक की जाँच में भी घपला किया गया। ये तो एक जगह है जहाँ बात खुल गई, बाक़ी न जाने और कितनी सेंटरों पर ये हुआ होगा।
युवाओं के साथ हो रहा ये धोखा तभी बंद होगा जब भाजपा के ख़िलाफ़ इस देश का हर छात्र, उनके माता-पिता, उनका संपूर्ण परिवार एकजुट हो जाएगा।
भाजपा अपराध और नाउम्मीदगी का दूसरा नाम बन गई है।
वोट की लूट से बनी सरकार, पेपर ध��ंधली से लेकर चढ़ावा-चंदा-दान चोरी तक पहुँच गई है। भाजपा और उनके अनरजिस्टर्ड संगी-साथियों ने सरेआम-बेईमानी के अपने ही बनाए रिकॉर्ड तोड़ दिये हैं।
#NEET
#NEET_REEXAM
पंचायती-समाचार :
टिकटार्थियों के बाद अधिकारी और ठेकेदार मिलके कर रहे ‘ढुंढाई पंचायत’
समाचार-विस्तार : कल तक तो ‘अफ़वाही’ मंत्री जी को केवल वो भावी प्रत्याशी ही ढूँढ रहे थे जिनसे इन्होंने टिकट के नाम पर एडवांस वसूल लिया था, लेकिन अब जो जान गये हैं कि ‘30 सीट’ की बात अफ़वाह है। न तो इन्हें एक भी सीट मिल रही है और ले-देकर मिल भी गई तो भी ये जीतनेवाले नहीं हैं।
इनकी सच्चाई बाहर आते ही अब तो सुना है, वो एई, जेई और एएमए अधिकारी और विभागीय ठेकेदार भी इनको ढूँढने के लिए मिल-बैठकर ‘पंचायत’ कर रहे हैं, जिनसे ट्रांसफ़र-पोस्टिंग व कॉन्ट्रैक्ट दिलवाने के नाम पर इन्होंने एडवांस वसूल लिया है।
जिस काली-कमाई के पैसे के बल पर इनके ‘बड़े बोल’ निकल रहे हैं, अब ���ो पैसा ही इनके ख़िलाफ़ ‘पंचायत’ बैठा रहा है।
नफ़रत के काँटे बहुत हुए, अब तो ‘फूलों का मौसम’ लाना है
‘प्रेम, दया और अपनापन’ लेकर, हर गाँव-गली तक जाना है
हम सबको मिलकर अपने वतन का, लिखना नया फ़साना है
‘इस षड्यंत्र का मूल दूर नहीं है’ इसलिए सच में कार्रवाई करने के लिए कहीं दूर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
यदि दोषी के बारे में पता करने में पुलिस अक्षम तो हम सहायता कर दें।