आतंक का पर्याय था श्रीप्रकाश शुक्ला...
• भूमिहार श्रीप्रकाश शुक्ला अपने ही करीबी, राईट हैंड आनंद पाण्डेय कि बहन से संबंध रखता था..
• कल राजेश पाण्डेय कि पुस्तक में हम लोगों ने पढ़ा कि उसका विधायक पवन पाण्डेय कि प���्नी से संबंध था |
• पुर्वांचल के कद्दावर स्वजातिय नेता कि बेटी के साथ भी संबंध था, सुनने में आता है, लोग बताते हैं कि जबरदस्ती रख लिया था....
यही मुख्य वजह था उसकी अंत का......
स्वजातिय दबंग नेता जी ने ठिकाने लगवा दिया और नैरेटिव गढ़ा गया कि 6 करोड़ में मुख्यमंत्री कल्याण सिंह जी कि सुपारी लिया था उसने इसलिए STF ने मा’र दिया |
• कुल मिलाकर श्रीप्रकाश शुक्ला का अपने स्वजातियों का गैंग था और वह अपने स्वजातिय, अपने ही मित्र, अपने ही गुरु व बड़े के घर पर बुरी नजर रखता था....
“ किसी कि बीबी, किसी कि बहन, किसी कि बेटी”.....
कुल मिलाकर वह पुरा र........... था....😐
समझ में नहीं आता ऐसे लोगों के भी समर्थक होते हैं , जाति देखकर समर्थन करने वाले ✊💦
सपा सरकार बना तो :
मुख्यमंत्री — अखिलेश यादव होंगे
गृहमंत्री — 102 केश वाले आजम खान होंगे
अब PDA कि सच्चाई जनता जान गया :
P — पहला
D — दावेदार
A — अहीर/अल्पसंख्यक
इसी तर्ज पर “समाजवादी पार्टी” पहले भी कार्य की है आगे भी करेगी,
PDA में पिछ��़े, दलित व सवर्ण को कुछ नहीं मिलेगा
प्रतापगढ़ के सिंधौर गांव के निवासी “सौरभ विश्वकर्मा” की पीट पीटकर ह’त्या दिया गया…
ह’त्यारे :
1. अवधेश तिवारी — (ब्राम्हण)
2. सौरभ तिवारी — (ब्राम्हण)
3. मिंटू उपाध्याय — (ब्राम्हण)
प्रशासन ने तीनों अपराधी को भी पकड़ लिया है,
परिवार दाह संस्कार करने से किया मना, बोला मांग पुरी होने पर ही दाह संस्कार करेंगे |
• परिजनों ने आरोपियों के घरों पर बुलडोजर कार्रवाई,
• उनके सरकारी सस्ते गल्ले के लाइसेंस निरस्त करने,
•मृतक की पत्नी को सरकारी नौकरी देने और 50 लाख रुपए मुआवजा देने की मांग की है।
• इसके साथ ही परिवार ने एक शस्त्र लाइसेंस देने की भी मांग रखी है।
छात्रों का आंदोलन वही कमज़ोर हो गया था जब देश और धर्म विरोधी लोगों ने मंच साझा किया जहां से हिन्दुओं को टार्गेट किया गया।
अगर उसी वक़्त छात्र उनके खिलाफ़ एक्शन ले लेते तो आज हमारे जैसे युवा भी सरकार के खिलाफ खुलकर छात्रों का समर्थन कर रहे होते।
देश विरोधी शक्तियों के द्वारा जंतर-मंतर पर छात्रों को मोहरा बनाकर बुलाया गया और छात्रों की वाजिब मांग को न उठाकर देश विरोधियों से मंच साझा कराया गया और धर्म विरोधी नारे लगे जिसके बाद प्रोटेस्ट वही कमज़ोर हो गया और जो छात्र सच मे अपने हक के लिए लड़ रहे थे वो राजनीति का शिकार हो गए