#समर्थ_कबीर_के_सुदामाओंके_महल
Annapurna Muhim Sant RampalJi
पानीपत के आलुपुर गाँव में संत रामपाल जी महाराज ने एक गरीब मजदूर, रवि के घर में हुए भयानक सिलेंडर धमाके के बाद अविश्वसनीय मदद की। मात्र 20 दिनों में एक शानदार दोमंजिला घर तैयार कर दिया गया, जिसे ग्रामीण अब "सुदामा का महल
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Annapurna Muhim Sant RampalJi
कुरुक्षेत्र के बहादुरपुरा गाँव में बेसहारा अनाथ बच्चों की दय��ीय स्थिति देख संत रामपाल जी महाराज ने 'अन्नपूर्णा मिशन' के तहत मात्र 15 दिनों में उनके कच्चे मकान को एक आधुनिक दो मंजिला पक्के घर में बदल दिया।
जरूरतमंदों की सहायता हेतु 60 यूनिट रक्तदान
"कबीर परमेश्वर प्रकट दिवस" के अवसर पर सतलोक आश्रम शामली (उत्तर प्रदेश) में रक्तदान शिविर का आयोजन हुआ। ��समें श्रद्धालुओं ने समाज के प्रति अपना उत्तरदायित्व निभाते हुए 60 यूनिट रक्तदान किया।
#मानव_धर्म_हमारा
100 शिष्यों ने किया रक्तदान
"कबीर परमेश्वर प्रकट दिवस" के अवसर पर राजस्थान के सतलोक आश्रम सोजत में संत रामपाल जी महाराज के सान्निध्य में रक्तदान शिविर आयोजित किया गया, जिसमें 100 शिष्यों ने स्वेच्छा से रक्तदान कर अ��नी सहभागिता दर्ज कराई।
#मानव_धर्म_हमारा
Sant RampalJi Life Savior
#परमात्मा_चारों_युगमें_आतेहैं
God Kabir In 4Yugas
द्वापरयुग में कबीर साहेब 'करुणामय' ऋषि के रूप में प्रकट हुए थे। जब पांडवों का यज्ञ सफल नहीं हो रहा था, तब कबीर साहेब ने अपने भक्त सुपच सुदर्शन के रूप में आकर उस यज्ञ को सफल करवाया था। इसका प्रमाण संत गरीबदास जी की वाणी में मिलता h
#परमात्मा_चारों_युगमें_आतेहैं
कबीर साहेब चारों युगों में अलग-अलग नामों से प्रकट होते हैं। सतयुग में कबीर परमेश्वर, विष्णु जी के वाहन पक्षीराज गरुड़ से मिले और उन्हें वास्तविक ज्ञान से परिचित कराया:
#परमात्मा_चारों_युगमें_आतेहैं
God Kabir In 4Yugas
कबीर साहेब चारों युगों में अलग-अलग नामों से प्रकट होते हैं। सतयुग में कबीर परमेश्वर, विष्णु जी के वाहन पक्षीराज गरुड़ से मिले और उन्हें वास्तविक ज्ञान से परिचित कराया:
#परमात्मा_चारों_युगमें_आतेहैं
God Kabir In 4Yugas
द्वापरयुग में 'करुणामय' रूप में आए कबीर साहेब ने रानी इन्द्रमती और उनके पति चंद्रविजय को अपनी शरण में लिया ��ा। जब सर्प ने रानी इन्द्रमती को डसा, तब कबीर साहेब ने उनके गुरु रूप में प्रकट होकर उनकी रक्षा की थी:
#परमात्मा_चारों_युगमें_आतेहैं
God Kabir In 4Yugas
कबीर परमात्मा सतयुग में 'सतसुकृत', त्रेतायुग में 'मुनीन्द्र', द्वापर��ुग में 'करुणामय' तथा कलियुग में वास्तविक नाम 'कविर्देव' (कबीर प्रभु) से प्रकट हुए।
#परमात्मा_चारों_युगमें_आतेहैं
द्वापरयुग में कबीर साहेब 'करुणामय' ऋषि के रूप में प्रकट हुए थे। जब पांडवों का यज्ञ सफल नहीं हो रहा था, तब कबीर साहेब ने अपने भक्त सुपच सुदर्शन के रूप में आकर उस यज्ञ को सफल करवाया था। इसका प्रमाण संत गरीबदास जी की वाणी में मिलता है:
कबीर परमात्मा, संत दादू दयाल जी से सन् 1551 में आमेर (राजस्थान) में मिले थे। इस पर दादू जी ने कहा है:
जिन मोकुं निज नाम दिया, सोइ सतगुरु हमार।
दादू दूसरा कोई नहीं, कबीर सृजन हार।। - कबीरपंथी शब्दावली, पृष्ठ 233
#किसको_मिले_कबीरभगवान
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मंसूर अली और उनकी बहन शिमली से भी कबीर परमात्मा ने शम्स तबरेज़ के रूप में भेंट की थी, जिसका वर्णन 'कबीर मंशूर' नामक पुस्तक में मिलता है। संत गरीबदास जी ने कहा है:
गरीब, बहुर शमशतबरेज रूप में, समझाये मनसूर।
शिमली पर साका हुआ, पौंहचे तख्त हजूर।। - #किसको_मिले_कबीरभगवान
Hiiकबीर परमात्मा के दर्शन गरुड़ जी को हुए थे, कबीर सागर में 11वें अध्याय ‘‘गरूड़ बोध‘‘ पृष्ठ 65 (625) पर प्रमाण है कि परमेश्वर कबीर जी ने धर्मदास जी को बताया कि मैंने विष्णु जी के वाहन पक्षीराज गरूड़ जी को उपदेश दिया, उनको सृष्टि रचना ��ुनाई।
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