जिन्हें अपने पिताजी का जन्मदिन याद नहीं रहता, वो भी कल मोदी जी का जन्मदिन ऐसे मना रहे थे जैसे घर में ही कोई राष्ट्रीय पर्व निकल आया हो।
दुर्भाग्य नहीं तो और क्या है—कलयुग में चाटुकारिता भी अब भक्ति का नया रूप बन गई है! 😄
मुसलमानों को किसी “मसीहा” की नहीं, ऐसी राजनीति की जरूरत है जो उन्हें डर, नफरत और वोट-बैंक की राजनीति से बाहर निकालकर शिक्षा, रोजगार, इंसाफ और बराबरी की लड़ाई में आगे ले जाए।
@ShayarImran जो अच्छा था उसे दिल में सँजोकर र��ूँगा,
जो ग़लत था उसे इतिहास के हवाले करूँगा।
न मैं किसी शख़्स का, �� किसी दौर का हूँ,
मैं तो करोड़ों हिंदुस्तानियों की आवाज़ हूँ।
लालक़िला सिर्फ़ ईंट-पत्थर की इमारत नहीं,
ये हर उस शख़्स का है जो कहे—
मैं भारत था, भारत हूँ और भारत ही रहूँगा।
@ShayarImran नेहरू के ख़्वाबों का मैं तर्जुमान नहीं हूँ,
हर दौर के सच से मगर अनजान नहीं हूँ।
गांधी की अहिंसा हो या भगत का इंक़लाब,
इस मुल्क की मिट्टी से मैं बेईमान नहीं हूँ।
इंदिरा का हौसला हो, अटल की हो ज़ुबान,
राजीव की सोच हो या मनमोहन की उड़ान,