@CMMadhyaPradesh एक किसान से पूछिए… एक दाना उगाने में कितनी मेहनत लगती है। बारिश, कर्ज, मौसम और चिंता से लड़कर फसल तैयार होती है पर सिस्टम के लिए शायद सिर्फ स्टॉक है। उसे गोदामों में सड़ने दिया गया। वही अनाज शराब बेचेंगे और अफसर फाइलों में सब नियमानुसार बताते रहेंगे।
क्या 13 मौतों पर सिर्फ आयोग का इंतजार होगा?@DrMohanYadav51 जी, आपकी घोषित जांच रिपोर्ट 15 दिन में आनी थी,लेकिन अफसरों का नया जवाब है, न्यायिक जांच चल रही है। हम जांच नहीं कर रहे हैं। तो क्या बाकी विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठेंगे? संस्कारधानी में यही सवाल और नाराजगी ��गातार बढ़ रही है।
क्रूज हादसा पर्यटन विभाग की अक्षम्य लापरवाही का नतीजा है। कमाई करने वाला विभाग न केवल गैर-जिम्मेदार है, बल्कि लापरवाह भी है।अधिकारियों पर गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज हो. यदि बात केवल जांच, निलंबन और मुआवजे पर खत्म हो गई, तो पर्यटन के नाम पर यह ’खूनी खेल’ कभी बंद नहीं होगा।
नर्मदा में माफिय��� हैवी मशीनें लगाकर 20 फीट तक खुदाई कर रेत निकाल रहा है। मुख्यमंत्री अवैध खनन पर सख्ती के दावे कर रहे हैं, तब जमीनी स्तर पर यह सब कैसे चल रहा है? @jabalpurdm क्या इतने बड़े स्तर पर हो रहे अवैध खनन की जानकारी अफसरों को नहीं है?अगर है, तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
सुको और सरकार के दावे आखिर जमीन पर क्यों नहीं दिखते? जबलपुर में नर्मदा का सीना सैकड़ों मशीनों से चीरा जा रहा है क्या यही सख्ती है? घोषणाएं हवा हो चुकी हैं और माफिया खुलेआम है।अफसर दफ्तरों से बाहर निकलने को तैयार नहीं और कार्रवाई के नाम पर एक-दो नाव तोड़कर खानापूर्ति की जा रही है।
सुको और सरकार के दावे आखिर जमीन पर क्यों नहीं दिखते? जबलपुर में नर्मदा का सीना सैकड़ों मशीनों से चीरा जा रहा है क्या यही सख्ती है? घोषणाएं हवा हो चुकी हैं और माफिया खुलेआम है।अफसर दफ्तरों से बाहर निकलने को तैयार नहीं और कार्रवाई के नाम पर एक-दो नाव तोड़कर खानापूर्ति की जा रही है।
मप्र में परिवहन विभाग पहले ही संगठित भ्रष्टाचार के आरोपों से घिर��� रहा है। चर्चित परिवहन घोटाले ने साबित कर दिया है कि गड़बड़ी सिर्फ निचले स्तर पर ही नहीं, बल्कि पूरे ढांचे में पैठ बना चुकी है, लेकिन जबलपुर का ताजा मामला इस भ्रष्ट तंत्र को और खतरनाक मोड़ देता है। @DrMohanYadav51
राजस्थान पत्रिका के संस्थापक, प्रखर पत्रकार श्री कर्पूर चंद्र कुलिश जी के जन्मशति पर्व पर श्री गुलाब कोठारी जी उनके परिवार एवं राजस्थान पत्रिका के समस्त पत्रकारों व अधिकारी, कर्मचारियों को बधाई। निष्पक्ष व स्वतंत्र पत्रकारिता के जिस मूल भाव को उन्होंने अपना ध्येय बनाया, वह आज भी प्रेरणा है।
राजस्थान पत्रिका के संस्थापक, प्रखर पत्रकार एवं कवि श्री कर्पूर चंद्र कुलिश जी के जन्मशती पर्व पर हार्दिक नमन।
श्री गुलाब कोठारी जी, परिवार एवं समस्त राजस्थान पत्रिका परिवार को शुभकामनाएँ।
उनकी निष्पक्ष व जागरूक पत्रकारिता आज भी लोकतंत्र को प्रकाशमान कर रही है।
#KarpurChandraKulish #RajasthanPatrika #पत्रकारिता #लोकतंत्र #Inspiration
राजस्थान पत्रिका के संस्थापक, प्रखर पत्रकार एवं कवि श्री कर्पूर चंद्र कुलिश जी की जन्मशति पर उन्हें नमन करते हुए श्री गुलाब कोठारी जी उनके परिवार एवं राजस्थान पत्रिका के समस्त पत्रकारों व अधिकारी, कर्मचारियों को जन्मशती पर्व की बधाई देता हूं।
राजस्थान पत्रिका अखबार के संस्थापक, प्रखर पत्रकार एवं कवि, श्रद्धेय कर्पूर चंद्र कुलिश जी के जन्मशती पर्व पर उन्हें कोटिशः नमन।
“पाठक ही सर्वोपरि” और “य एषु सुप्तेषु ��ागर्ति” जैसे उच्च आदर्शों के साथ कुलिश जी ने पत्रकारिता को जनचेतना और लोकतंत्र की सशक्त आवाज बनाया। उनके द्वारा स्थापित मूल्य आज भी समाज को दिशा दे रहे हैं।
इस अवसर पर आदरणीय श्री गुलाब कोठारी जी, उनके परिवार व राजस्थान पत्रिका समूह के सभी पत्रकारों को हार्दिक बधाई।
#kulishJanmaShatiParv
राजस्थान पत्रिका अखबार के संस्थापक, प्रखर पत्रकार एवं कवि, श्रद्धेय कर्पूर चंद्र कुलिश जी के जन्मशती पर्व पर उन्हें कोटिशः नमन।
“पाठक ही सर्वोपरि” और “�� एषु सुप्तेषु जागर्ति” जैसे उच्च आदर्शों के साथ कुलिश जी ने पत्रकारिता को जनचेतना और लोकतंत्र की सशक्त आवाज बनाया। उनके द्वारा स्थापित मूल्य आज भी समाज को दिशा दे रहे हैं।
इस अवसर पर आदरणीय श्री गुलाब कोठारी जी, उनके परिवार व राजस्थान पत्रिका समूह के सभी पत्रकारों को हार्दिक बधाई।
#kulishJanmaShatiParv
इंदौर चर्चा में है। सदन में बहस जारी है। पर सवाल आम जन को पूछने होंगे। पेयजल कोई साधारण मुद्दा नहीं है। क्या निगम की लाइनों से आया जल इतना शुद्ध है कि सीधे पीया जा सके। सवाल बड़ा है। आने वाले कल के लिए।
#indore#indorewatercrisis@patrika_mp@patrika_mp
जब अपराध थानों के आसपास हो, रंगदारी घरों तक पहुंचे ���िनदहाड़े गोलियां चलें तो सिर्फ अपराध नहीं, व्यवस्था की विफलता है।सवाल यह नहीं कि अपराध बढ़े क्यों, सवाल है कि अपराधियों में कानून का डर कब क्यों खत्म हो गया?क्या जबलपुर अपराध के साथ जीने को मजबूर होगा या कानून फिर डर पैदा करेगा?
पत्रिका जबलपुर आज 18 वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। सूदखोरों के खिलाफ लिखने की बात हो, चिटफंड के मकड़जाल से लोगों को बचाना हो, शहर के तालाबों की सफाई से जुड़ेे अभियान हों, मां नर्मद��� को बचाने का संकल्प हो या फिर स्कूलों में मनमानी फीस के मामले। हमेशा पाठकों का स्ने�� मिलता रहा है।
पत्रिका के सतना संस्करण के खुलासे ने हर किसी को झकझोरा था। थैलेसीमिया से पीड़ित 6 बच्चों को रक्त में चढ़ाने घोर लापरवाही सेे एचआईवी हो गया। इस कांड में आखिरकार एक्शन हो रहा है। हर उस व्यक्ति पर एक्शन जरूरी है जो इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार है।
@rpbreakingnews
पुलिस पर दाग इसलिए नहीं लग रहे ��ि कुछ पुलिसकर्मी गलत हैं, बल्कि इसलिए लग रहे हैं कि सिस्टम कमजोर साबित हो रहा है।
जहां कानून का पालन करवाना चाहिए, वहां कानून तोड़ा जा रहा है। जहां अपराध रोकने चाहिए, वहां अपराध के नेटवर्क में पुलिसकर्मी जुड़े दिखते हैं। @DrMohanYadav51